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सुषमा स्वराज का अंतिम संस्कार करने वाली बेटी बांसुरी आखिर करती क्या हैं?

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अब हमारे बीच नहीं हैं. 6 अगस्त की रात करीब 9 बजे उनका निधन हो गया. उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद एम्स में भर्ती कराया गया था. लेकिन कई कोशिशों के बाद भी वो नहीं बच सकीं और एम्स में ही आखिरी सांस ली. 7 अगस्त को उनका अंतिम संस्कार किया गया. बेटी बांसुरी ने सारी रस्में पूरी कीं.

कौन हैं बांसुरी?

सुषमा अपने पीछे पति स्वराज कौशल और बेटी बांसुरी स्वराज को छोड़कर चली गईं. स्वराज कौशल, वकील हैं, मिजोरम के पूर्व गवर्नर रहे हैं, और पूर्व राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं. बांसुरी भी वकील हैं. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है. इस वक्त दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लीगल प्रैक्टिस करती हैं. वो क्रिमिनल लॉयर हैं.

सुषमा और स्वराज कौशल, दोनों ही वकील थे, इसलिए बेटी ने बचपन से कानूनी दांव-पेंच देखे थे. और उन्होंने भी वकील बनने का फैसला किया. सुषमा भगवान कृष्ण को बहुत मानती थीं, इसलिए अपनी इकलौती बेटी का नाम ‘बांसुरी’ रखा था.

बांसुरी ने अपनी मां के शव का अंतिम संस्कार किया. फोटो- ANI Twitter
बांसुरी ने अपनी मां के शव का अंतिम संस्कार किया. फोटो- ANI Twitter

ललित मोदी को पासपोर्ट दिलाने के लिए बांसुरी ने केस लड़ा था

इंडियन प्रीमियर लीग, यानी आईपीएल के पहले चेयरमेन का नाम ललित मोदी है. ये नाम आपने कई बारी सुना होगा. बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया, यानी BCCI के वाइस-प्रेसिडेंट भी थे. इनके ऊपर साल 2010 में घोटाले का आरोप लगा. BCCI ने सस्पेंड कर दिया, जिसके बाद ये लंदन चले गए. यहां यूपीए सरकार ने इनका पासपोर्ट रद्द कर दिया.

उसके बाद ललित मोदी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका डाली और सरकार के फैसले को चैलेंज किया. 9 वकीलों की एक टीम ने मोदी के लिए केस लड़ा. अगस्त 2014 में हाई कोर्ट ने पासपोर्ट रिस्टोर कर दिया. उसके बाद ललित मोदी ने एक ट्वीट किया. अपने सभी वकीलों को बधाई दी और थैंक्यू कहा. सभी वकीलों के नाम लिखे. तब ये बात सामने आई, कि सुषमा की बेटी भी इस टीम में शामिल थीं.

बांसुरी दिल्ली हाई कोर्ट में और सुप्रीम कोर्ट में लीगल प्रैक्टिस करती हैं. इस तस्वीर में बांसुरी और सुषमा साथ में हैं. फोटो- आर्काइव
बांसुरी दिल्ली हाई कोर्ट में और सुप्रीम कोर्ट में लीगल प्रैक्टिस करती हैं. फोटो- आर्काइव

सुषमा पर ‘भगोड़े’ की मदद करने का आरोप लगा

साल 2014 में केंद्र में NDA की सरकार बनी. सुषमा स्वराज विदेश मंत्री बनीं. यूके (यूनाइटेड किंगडम) की तरफ से एक सवाल पूछा गया. सवाल ललित मोदी से जुड़ा हुआ था. ललित मोदी की पत्नी मीनल को ब्रेस्ट कैंसर था, उनकी सर्जरी होने वाली थी पुर्तगाल में. सर्जरी के लिए ललित मोदी का कंसेंट जरूरी था. कंसेंट देने के लिए मोदी को पुर्तगाल जाना था. मोदी ने यूके की सरकार से पुर्तगाल जाने की परमिशन देने की अपील की. यूके की तरफ से इंडिया से सवाल किया गया कि परमिशन दी जाए या नहीं?

सुषमा ने जवाब दिया कि ब्रिटिश सरकार अपने नियम-कानून के हिसाब से फैसला कर सकती है. उन्होंने कहा,

‘अगर ब्रिटिश सरकार मोदी को ट्रैवल डॉक्यूमेंट देने का फैसला करती है, तो इससे भारत और यूके के रिश्ते खराब नहीं होंगे.’

इसके बाद सुषमा पर देश के भगोड़े की मदद करने के आरोप लगे. उनकी बेटी ललित मोदी की वकील थीं, ऐसे में सुषमा के ऊपर पद का गलत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगा. ये भी खबर फैली की सुषमा के पति स्वराज कौशल भी ललित के वकील थे. इस पर सुषमा ने संसद में जवाब दिया. बताया कि उनके पति पासपोर्ट केस में ललित मोदी के वकील नहीं थे, और केवल उनकी बेटी थीं. लेकिन बेटी ने ललित मोदी से पैसे नहीं लिए थे. सुषमा ने कहा, ‘मैंने कुछ गलत नहीं किया.’

वहीं, सुषमा की बेटी बांसुरी का बचाव बीजेपी ने भी किया था. पार्टी ने कहा था कि बांसुरी का अपना प्रोफेशन है और वो अपने काम के लिए आजाद हैं.

तो ये हैं सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी. जो वकील हैं और जिन्होंने अपनी मां का अंतिम संस्कार किया है. भारत में जनरली बेटे ही अपने माता-पिता का अंतिम संस्कार करते हैं, लेकिन यहां ये परंपरा टूटी. बांसुरी ने केवल मिट्टी का घड़ा ही नहीं फोड़ा, बल्कि कई साल से चली आ रहीं जड़ प्रथाओं का अंतिम संस्कार करने की भी कोशिश की. जिस देश में बेटियों को बचाने के लिए कानून बनाने पड़ते हैं, मर्जी से शादी करने पर लड़कियों को मारा न जाए, इसके लिए कानून बनाने पड़ते हैं, लड़कियां आगे बढ़ सकें, इसके लिए आरक्षण दिया जाता है, उस देश में एक लड़की ने अपनी मां का अंतिम संस्कार किया. ये बहुत प्रगतिशील बात है. उम्मीद है कि लोग इस बात से कुछ सीखेंगे.


वीडियो देखें: लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने अपने भाषण में यूएन का जिक्र क्यों किया?

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