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इंटर्नशिप मिलने के बाद भी क्यों परेशान थी पूनम?

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रश्मि प्रियदर्शिनी पांडे
रश्मि प्रियदर्शिनी पांडे

रश्मि प्रियदर्शिनी एक स्वतंत्र लेखक/पत्रकार हैं. मैथिली-भोजपुरी अकादमी की संचालन समिति की सदस्य हैं. उन्हें ज़ी नेटवर्क और हमार टीवी में पत्रकारिता का लंबा अनुभव प्राप्त है. कई मंचों से काव्य-पाठ करती आ रही हैं. आजकल ‘बिदेसिया फोरम’ नाम के डिजिटल प्लेटफॉर्म का संचालन कर रही हैं. दी लल्लनटॉप के लिए एक लंबी कहानी ‘शादी लड्डू मोतीचूर‘ लिख रही हैं. शादी लड्डू मोतीचूर कहानी शहर और गांव के बीच की रोचक यात्रा है. कहानी के केंद्र में है एक विवाहित जोड़ी जिन्होंने शादी का मोतीचूर अभी चखा ही है. प्रस्तुत है इसकी 17वीं किस्त-

Shadi Laddu Motichoor - Banner


भाग 17- इंटर्नशिप मिलने के बाद भी परेशान थी पूनम

टेस्ट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी. स्क्रिप्ट लिखने के लिए दो-तीन विषय दिए गए थे जिनमें से किसी पर लिखना था. पूनम ने दो मिनट सोचकर एक विषय चुना- बिहार- कल,आज और कल.

करीब घंटे भर के इंतज़ार के बाद पंद्रह लोगों को एक केबिन में बुलाया गया. पूनम उनमें से एक थी. सामने ही बढ़ी दाढ़ी-मूंछों में एक रोबदार शख़्स बैठा हुआ था. उनकी कुर्सी के पीछे वाली दीवार पर चमकती लकड़ी की फ्रेमिंग में “पाश” के अल्फ़ाज़ चमक रहे थे-

सबसे ख़तरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
ना होना तड़प का
सब कुछ सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौट कर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना

सबको उसी केबिन में बैठाया गया. जल्द ही सब समझ गए कि उनकी लिखी हुई स्क्रिप्ट पर सवाल-जवाब करने के बहाने उनका इंटरव्यू लिया जा रहा है. पूनम की स्क्रिप्ट पर एक नज़र डालने के बाद उन्होंने पूछा- “पूनम. आपने लिखा है कि शब्द “बिहारी” जो हाल फिलहाल तक एक गाली बन चुका था, आज उसका वो अर्थ नहीं रह गया है! बहुत मुमकिन है कि शीघ्र ही बिहार अपने वैभवशाली अतीत को फिर से आने वाले कल में देखे! आपको नहीं लगता कि आप इस निर्णय पर ज़रा जल्द पहुंच गईं?”

पूनम ने अपनी घबराहट पर काबू पाते हुए जवाब दिया- ‘जी नहीं सर! हम दिल्ली की ही बात करते हैं पहले. इसी दिल्ली ने वो वक़्त भी देखा है जब कोई भी बिहारी अपने बिहारी होने की बात लुकाता-छिपाता था. भोजपुरी सिर्फ रिक्शा-ठेलों वालो की भाषा मानी जाती थी. निःसंदेह आज ये स्थिति नहीं है. मेट्रो में, ऑफिसों में, मॉल्स में युवा धड़ल्ले से भोजपुरी में बतियाते दिख जाते हैं. ये युवा अपने-अपने क्षेत्रों के सफल लोग हैं. ये युवा या किशोर दिल्ली के कॉलेजों में पढ़ रहे हैं. खोज-खोज के समृद्ध भोजपुरी के बारे में जानकारी इकट्ठी कर रहे हैं. इन युवाओं को प्रेरणा मिलती है मशहूर मीडियाकर्मियों से जो बिहारी है और खुल कर बताते हैं कि वो बिहारी हैं. मनोज वाजपेयी और पंकज त्रिपाठी से लेते हुए विभिन्न फ़िल्मकर्मी या युवा साहित्यकार इनके रोल मॉडल हैं. अब इनके लिए इनका लहजा, इनकी वेश-भूषा शर्म की बात नहीं रह गई है. ये युवा वो हैं जो अब भोजपुरी गीतों को रिकॉर्ड कर रहे हैं, गांव-घर जा कर शादियों या छठ के गीत लाइव करते हैं फेसबुक पर. ये युवा अश्लीलता का पर्याय बन चुकी भोजपुरी की छवि को नोच फेंकना चाहते हैं अपनी भोजपुरी से. देश-विदेश में फैले सफल बिहारियों ने निःसंदेह “बिहारी” शब्द को गाली नहीं रहने दिया है.’

सर ने मुस्कुराते हुए पूनम की बात पर सर हिलाया. पूनम अपनी सीट पर बैठ गई. वो मन ही मन सोच रही थी कहीं उसने ज़्यादा तो नहीं बोल दिया. किसी ने धीरे से फुसफुसाते हुए कहा कि ये एडिटर इन चीफ कुमार विमल सिंह है! पूरी मीडिया बिरादरी में कुमार विमल का नाम बेहद प्रतिभाशाली और तेज़ तर्रार पत्रकार कर रूप में विख्यात है. थोड़ी देर कागजों में जोड़-घटाव करने के बाद कुमार विमल चले गए. पर पूनम सहित सारे लोगों को अभी रोका गया था.

पूनम बैठी-बैठी सोच रही थी कि जल्दी ये लोग छोड़ें और वो बाहर जाए. उसे पक्का यक़ीन था कि उसका तो यहां होगा नहीं. कम से कम सही समय से निकल लेंगे तो कुछ देर दीदी के घर बैठ जाएंगे. तभी एक अन्य ने आकर सूचना दी-

‘आप सबको चैनल एक महीने के इंटर्नशिप पर रख रही है. उसके बाद आपके परफॉरमेंस के हिसाब से आपकी जॉब डिसाइड होगी. सो कॉन्ग्रेचुलेशन्स एंड बेस्ट ऑफ लक टू ऑल ऑफ यू!’

एक तरफ जहां सबके चेहरे खिल उठे वही पूनम घबरा गई. वो अंदर से शायद इतनी जल्दी इस चीज़ के लिए तैयार नहीं थी. वो समझ नहीं पा रही थी कि वो क्या प्रतिक्रिया दे. सब बाहर निकलने लगे तो पूनम ने भी पर्स उठाया और केबिन से बाहर चल पड़ी. चन्दर अंदर रिसेप्शन में ही बैठा उसका इंतजार कर रहा था. एक तरफ जहां सबके चेहरे खिल हुए थे वही पूनम के चेहरे पर अजीब से भाव थे. चन्दर समझ गया कि पूनम की बात नहीं बन पाई यहां. मन ही मन निश्चिंत होता चन्दर पूछ बैठा- ‘क्या हुआ?’
पूनम ने किसी तरह कहा- ‘सोमवार से इंटर्नशिप के लिए बुलाया है.’
चन्दर को तो जैसे काठ मार गया- ‘क्या? इंटर्नशिप? इसी सोमवार से?’
‘हां’
‘ह्म्म्म, ठीक है. चलो फिर. घर चलते हैं..’
‘पर. आप ही ने तो कहा था इंटरव्यू के बाद दीदी के घर जाएंगे..’
‘अरे यार! एक दिन तो छुट्टी होती है. अब घर जाकर आराम करूं या तुम्हें रिश्तेदारों के यहां घुमाता फिरूं?’ कहता हुआ चन्दर बाहर की ओर तेज़ कदमों से चल पड़ा.

पूनम उसके पीछे-पीछे चली. रास्ते भर पूनम उससे कुछ न कुछ बात करने की कोशिश करती रही पर ‘हां’, ‘हूं’ के अलावा चन्दर के मुंह से कुछ न निकला. पूनम कुछ समझ नहीं पा रही थी. वो मायूस होकर चुप हो गई. उसे चुप होते देख चन्दर को मन ही मन खुद पर गुस्सा आया. ‘क्या कर रहा है वो? आखिर चाहता क्या है?’ उसने खुद को समझाया और पूनम को देखते हुए बोल पड़ा- ‘अरे पूनम, तुम्हारे पास ऑफिस आने लायक कपड़े हैं? मतलब साड़ियां तो पहनोगी नहीं न! चलो कुछ आरामदायक ऑफिस जाने लायक कपड़े ले लेते हैं.’

बेचारी पूनम इतनी सी बात से खिल उठी. ‘ सूट तो हैं मेरे पास. कॉलेज वाले कुछ कपड़े भी मैं ले आई हूँ पर थोड़े बहुत तो लेने पड़ेंगे.’

चन्दर उसके खिले चेहरे को देख शर्मिंदा हो गया. खामाखा इस प्यारी लड़की को परेशान कर दिया. दोनों ने अट्टा मार्केट में थोड़ी बहुत शॉपिंग की. खाना खाया और घर वापस चले. पूनम बहुत खुश थी. पर मन ही मन घबरा भी रही थी. रात भर वो ऑफिस के ही सपने देखती रही. कभी कंप्यूटर के सामने खुद को देखती तो कभी कैमरे के सामने.

दो दिन बाद ही सोमवार आ गया. आज पूनम का पहला दिन था ऑफिस में. उसकी घबराहट को देखते हुए चन्दर ने छुट्टी ले ली थी. घर से निकलने के पहले पूनम ने शांत मन से ईश्वर के आगे सर झुकाया. अपने गांव की वो पहली लड़की थी जो ऑफिस जा रही थी. उसने ईश्वर से शक्ति मांगी,साहस मांगा और सर नवाती उठ खड़ी हुई.

देखते ही देखते पूनम ऑफिस थी. पूनम को काम समझाया गया. टीम के लोगों से परिचय कराया गया. कुछ बेसिक बातें समझाकर उनके बॉस सिन्हा सर शूट पर चले गए. पूनम ने आस-पास निगाह दौड़ाई. कुछ लोग कंप्यूटर पर लगे थे तो कुछ लिखने में. कुछ मॉडल जैसी लड़कियां पूरे मेकअप में शायद एंकरिंग के लिए तैयार थीं तो कहीं सफाई कर्मचारी हर एक कॉर्नर को साफ करने में लगे थे. पूनम भी कागज़-कलम हाथ मे लिए टेप लॉग करने में लग गई. तभी एक आवाज़ उसके पास से आई- ‘अरे यार, ये क्या बोल रही है? फ़ना क्या होता है?

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आस-पास मौजूद लोग उस लड़के को देखने लगे.उन्हें भी “फ़ना” शब्द का अर्थ नहीं पता था. वो लड़का शायद बॉलीवुड का कोई प्रोग्राम तैयार कर रहा था. अचानक एक पतली सी आवाज़ कहीं से आई. सब उधर ही देखने लगे. ‘फ़ना मतलब होता है ख़ुद को किसी के प्यार में जानते-बूझते तबाह कर देना. जैसे शमा के आस-पास पतंगे उड़ के आते हैं. वो जानते हैं कि ये रौशनी उन्हें जला देगी पर फिर भी वो खुद को फ़ना कर देते है’ – ये पूनम थी.

कुछ देर तक तो वहां सन्नाटा रहा. ‘वाह ! बिल्कुल सही. बहुत खूब’ न जाने कहां से उसी समय सिन्हा सर भी आ गए और उन्होंने मुस्कुराते हुए पूनम के जवाब पर तालियां बजानी शुरू कर दी. सबने सर का साथ दिया. पूनम शरमा सी गयी. ये उसका पहला दिन था! ज़िन्दगी के नए सफर का पहला दिन.

वो बहुत खुश थी. घर आकर उसने चन्दर को एक-एक बात बताई. चन्दर ने मुस्कुराते हुए उसे बधाई दी और कहा- ‘मैडम अब सो जाओ. कल तुम्हें अकेले जाना है मेट्रो से. तैयारी कर ली है न कल की?’ पूनम ने दांतों तले उंगली दबा ली. उसने अब तक कोई तैयारी नहीं की थी. वो कपड़े प्रेस करने के लिए उठने ही वाली थी कि उसके फोन पर मैसेज आया- ‘ऑफिस के पहले दिन की ढेरों बधाई.’ वो दंग रह गई. ‘किसका नंबर है ये? कौन है जिसने इतनी रात में मैसेज किया?’


…टू बी कंटीन्यूड!


भाग 1 दिल्ली वाले दामाद शादी के बाद पहली बार गांव आए हैं!

भाग 2 दुल्हन को दिल्ली लाने का वक़्त आ गया!

भाग 3 हंसती खिलखिलाती सालियां उसके इंतज़ार में बाहर ही बरसाती में खड़ी थीं

भाग 4 सालियों ने ठान रखा है जीजाजी को अनारकली की तरह नचाए बिना जाने नहीं देंगे

भाग 5 ये तो आंखें हैं किसी की… पर किसकी आंखें हैं?

भाग 6 डबडबाई आंखों को आंचल से पोंछती अम्मा, धीरे से कमरे से बाहर निकल गई!

भाग 7 घर-दुआर को डबडबाई आंखों से निहारती पूनम नए सफ़र पर जा रही थी

भाग 8 काश! उसने अम्मा की सुन ली होती

भाग 9 औरतों को मायके से मिले एक चम्मच से भी लगाव होता है

भाग 10 सजना-संवरना उसे भी पसंद था पर इतना साहस नहीं था कि होस्टल की बाउंडरी पार कर सके

भाग 11 ये पीने वाला पानी खरीद के आता है? यहां पानी बेचा जाता है?

भाग 12 जब देश में फैशन आता है तो सबसे पहले कमला नगर में माथा टेकते हुए आगे बढ़ता है

भाग 13 अगर बॉस को पता चला कि मैंने घूमने के लिए छुट्टी ली थी, तो हमेशा के लिए छुट्टी हो जाएगी

भाग 14 बचपन से उसकी एक ही तो इच्छा थी- ‘माइक हाथ में थामे धुंआधार रिपोर्टिंग करना’

भाग 15 उसे रिपोर्टर बनना था रिसेप्शनिस्ट नहीं

भाग 16 ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? जॉब नहीं मिलेगी? यही न? बिंदास जा. इंटरव्यू दे. जो होगा, देखा जाएगा



वीडियो-  किताबवाला: चौचक दास्तानगो हिमांशु बाजपेयी ने सुनाए लखनउआ किस्से

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