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750 फर्स्ट क्लास विकेट लेने वाला स्पिनर, जिसने एक भी टेस्ट नहीं खेला

लेखक ‘लल्लनटॉप’ के दोस्त हैं. पढ़ने-लिखने में खूब इंट्रेस्ट रखते हैं. स्पोर्ट्स के समसामयिक और ऐतिहासिक विषयों पर लिखना और पढ़ना खूब पसंद है. नोवाक ज़ोकोविच, रॉजर फेडरर और राफा नडाल के जबरा फैन हैं. बास्केटबॉल से लेकर क्रिकेट तक पर बात करने के लिए कभी भी उपलब्ध रहते हैं. फेसबुक पर यह Cricket Tales के नाम से मौजूद हैं. 21 जून को डोमेस्टिक क्रिकेट के दिग्गज स्पिनर राजिंदर गोयल की मृत्यु हो गई. इसके बाद हमारे दोस्त ने जो लिखा, वो पढ़िए…


हर खेल में कुछ खिलाड़ी होते हैं, जिनकी क्षमता और महानता के बारे में इस कारण भी पता नहीं लग पाता, क्योंकि वे ऐसे दौर में पैदा होते हैं, जिसमें उनसे बड़े नाम होते हैं. दुर्भाग्यवश उन्हें वह प्रसिद्धि नहीं मिल पाती, जिसके वे अधिकारी होते हैं. ऐसे तमाम नामों में कई नाम भारत के भी हैं.

साठ और सत्तर के दशक में भारतीय टीम की स्पिन चौकड़ी विश्व प्रसिद्ध थी. लेफ्ट आर्म स्पिनर बिशन सिंह बेदी, राइट आर्म ऑफ स्पिनर इरापल्ली प्रसन्ना, राइट आर्म लेग स्पिनर भागवत चंद्रशेखर और राइट आर्म ऑफ स्पिनर श्रीनिवास वेंकटराघवन. यह स्पिन चौकड़ी बहुत सफल रही. लेकिन इनके चक्कर में कई ऐसे प्लेयर्स गुमनाम रह गए, जो किसी भी दौर में इंटरनेशनल क्रिकेट के दिग्गज बन सकते थे. इन्हीं में से एक थे स्पिनर राजिंदर गोयल.

साल 1974-75 की भारत-वेस्टइंडीज़ टेस्ट सीरीज के दौरान बेंगलुरु टेस्ट में क्रिकेट के दो महान बल्लेबाजों ने डेब्यू किया. गॉर्डन ग्रीनिज और विवियन रिचर्ड्स. इसी मैच में एक और महान खिलाड़ी का पदार्पण हो सकता था, पर टीम कॉम्बिनेशन ऐसा था कि उस खिलाड़ी को अवसर न मिल सका. यह खिलाड़ी थे लेफ्ट आर्म स्पिनर राजिंदर गोयल.

# नई किट और नए जूते

विश्व क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ लेफ्ट आर्म स्पिनर्स में से एक बिशन सिंह बेदी अनुशासनात्मक कारणों से बेंगलुरु टेस्ट से ड्रॉप हो गए थे. लेकिन टीम मैनेजमेंट ने उनकी जगह दूसरे लेफ्ट आर्म स्पिनर राजिंदर गोयल के बजाय लेग स्पिनर भागवत चंद्रशेखर और दो ऑफ स्पिनर्स, प्रसन्ना और वेंकटराघवन के साथ जाना उचित समझा. सुनील गावस्कर ने अपनी किताब ‘Idols’ में लिखा है कि गोयल नई किट और नए जूते भी ले आए थे, पर अंत में उन्हें पता चला कि वे 12वें खिलाड़ी ही रहेंगे. अगले टेस्ट में बिशन सिंह बेदी वापस आ गए और गोयल को फिर कभी टीम में नहीं चुना गया.

‘डेक्कन हेराल्ड’ के मुताबिक, राजिंदर गोयल ने बाद में कहा था,

‘जब भारतीय टीम दो ऑफ स्पिनर (प्रसन्ना और वेंकट) लेकर खेल सकती है, तो उन्हें दो लेफ्ट आर्म स्पिनर के साथ खेलने से कौन रोक रहा था? मुझे लगता है वे मुझे टीम में लेना ही नहीं चाहते थे, कारण चाहे जो रहा हो. देश के सर्वश्रेष्ठ स्पिनर्स में से एक होने के बाद भी मैं देश के लिए नहीं खेल सका, यह निराशा मृत्यु तक मेरे साथ रहेगी. 1980s में दो लेफ्ट आर्म स्पिनर रवि शास्त्री और दिलीप दोषी एकसाथ खेले हैं, ऐसा विचार 1970s में क्यों नहीं किया गया, ये नहीं पता.’

गोयल से पूछा गया कि इतने बढ़िया प्रदर्शन के बाद भी टीम में न चुने जाने पर उन्होंने लगातार खेलना जारी कैसे रखा ? तो उनका उत्तर था,

‘मैं बढ़िया गेंदबाजी करने के अतिरिक्त और कर भी क्या सकता था? क्रिकेट मेरा जीवन है, पर जीवन में हमें सबकुछ नहीं मिलता. आपको बस अपना काम करते रहना है. मैंने भी अपनी क्षमताओं के हिसाब से सदैव अपना सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास किया.’

# गावस्कर के आदर्श

राजिंदर गोयल और पद्माकर शिवालकर, उन दो खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने कभी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला, परंतु सुनील गावस्कर उन्हें अपना आदर्श मानते हैं.

1958-59 में गोयल का फर्स्ट-क्लास करियर पटियाला (बाद में इसे दक्षिणी पंजाब कहा गया) से शुरू हुआ. 1964-65 में गोयल ने श्रीलंका (तब का सीलोन) के विरुद्ध एक अनऑफिशल टेस्ट खेला था. 1958-59 से 1984-85 तक चले घरेलू करियर में गोयल ने दक्षिणी पंजाब, दिल्ली, हरियाणा के लिए रणजी ट्रॉफी और नॉर्थ ज़ोन के लिए दिलीप ट्रॉफी खेली.

‘क्रिकेट कंट्री’ के मुताबिक, 1962 में गोयल ने पंजाब छोड़कर दिल्ली के लिए खेलना शुरू किया. पहले ही सीजन में उन्होंने 25 विकेट लिए, उनकी इकॉनमी मात्र 1.49 रही. अपनी पुरानी टीम दक्षिणी पंजाब के विरुद्ध एक मैच में उनके आंकड़े थे- 31.4 ओवर में 24 मेडेन, 17 रन देकर 5 विकेट. अगले सीजन में उत्तरी पंजाब के खिलाफ एक मैच में गोयल, बिशन सिंह बेदी पर भारी पड़े. उन्होंने इस मैच में 59 रन देकर 10 विकेट लिए. 1973-74 में गोयल ने हरियाणा से खेलना आरम्भ किया और पहले ही मैच में रेलवे के खिलाफ 55 रन देकर 8 विकेट लिए. ये पहली बार था, जब हरियाणा के किसी गेंदबाज ने पारी में 8 विकेट लिए हों.

# स्पिन VS स्पिन

1975-76 दिलीप ट्रॉफी फाइनल में नॉर्थ ज़ोन का मुकाबला साउथ ज़ोन से था. साउथ ज़ोन की ओर से भारत की प्रसिद्ध स्पिन चौकड़ी में से तीन स्पिनर… चंद्रशेखर, प्रसन्ना और वेंकट, जबकि नॉर्थ की ओर से बेदी और गोयल खेल रहे थे. यह मैच स्पिन गेंदबाजों के बीच एक युद्ध था. पहली पारी में साउथ जोन ने 390 रन बनाए, नॉर्थ ज़ोन के लिए बेदी ने एक और गोयल ने सात विकेट लिए.

नॉर्थ ज़ोन की पहली पारी 291 पर सिमटी, चंद्रशेखर ने पांच, प्रसन्ना और वेंकट ने दो-दो विकेट लिए. साउथ ज़ोन ने दूसरी पारी में 134 रन बनाए, बेदी और गोयल ने पांच-पांच विकेट लिए. 234 रनों का पीछा करने उतरी नॉर्थ ज़ोन की टीम वेंकट के सामने टिक नहीं पाई और 196 पर निपट गई। वेंकट ने पांच, प्रसन्ना और चन्द्रशेखर ने दो-दो विकेट लिए.

गोयल के समय में हरियाणा की टीम तीन बार रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में पहुंची. गोयल के रिटायर होने के कई साल बाद. साल 1991 में कपिल देव की कप्तानी में हरियाणा ने वानखेड़े स्टेडियम में मुम्बई को 2 रन से पराजित करके रणजी ट्रॉफी जीती. गोयल उस टीम के मुख्य चयनकर्ता थे.

गोयल ने घरेलू क्रिकेट में 157 मैचों में 18.58 की औसत से कुल 750 विकेट लिए. 59 बार उन्होंने पारी में 5 विकेट और 18 बार मैच में 10 विकेट लिए. गोयल के 750 में से 637 विकेट रणजी ट्रॉफी में आए, यह एक रिकॉर्ड है. 21 जून, 2020 को 77 साल की उम्र में राजिंदर गोयल का निधन हो गया.


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