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आम आदमी को घर में मिलने में क्यों आ रही है मुश्किल?

आम आदमी के लिए बजट का सिर्फ इतना ही मतलब होता है- रोटी, कपड़ा और मकान. रोटी और कपड़ा रोजगार से जुड़े हैं. बीते कुछ सालों के दौरान रोजगार की हालत बहुत अच्छी नहीं मानी जा रही है. ऐसा ही हाल मकान को लेकर भी है. मोदी सरकार का दावा है कि वो 2022 तक सभी को घर मुहैया करा देगी. मगर अभी ये दावा दूर की कौड़ी ही लगता है. बीते कुछ सालों से रियल एस्टेट सेक्टर मुश्किलों का सामना कर रहा है. अब पूरे हाउसिंग सेक्टर को बजट से बड़ी उम्मीदें हैं. सरकार ने भी इस सेक्टर में बढ़ावा देने के संकेत दिए हैं. क्या है रियल एस्टेट सेक्टर का संकट? आइए समझते हैं.

संकट में क्यों है रियल एस्टेट सेक्टर?

प्रॉपर्टी बाजार के संकट की कुछ वजहें ये हैं-

1- रियल एस्टेट का संकट दो तरह का है. पहला, प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं. दूसरा, बाजार में खरीदार नहीं हैं.
2- प्रोजेक्ट अधूरे होने की वजह है डेवलपर्स के पास फंड की कमी.
3– बीते कुछ सालों के दौरान डेवलपर्स ने अंधाधुंध प्रोजेक्ट दर प्रोजेक्ट लॉन्च किए. जो उनके लिए मुसीबत का कारण बन गए हैं.
4- डेवलपर्स ने एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में लगा दिया.
5– डेवलपर्स ने बैंकों से जो लोन लिया, उस फंड का भी बेहतर इस्तेमाल नहीं किया.
6- 8 नवंबर, 2018 को नोटबंदी और उसके बाद 1 जुलाई, 2017 से जीएसटी लागू कर दिया गया. इसने प्रॉपर्टी बाजार की कमर तोड़ दी.
8– सरकार ने बेनामी संपत्ति कानून लागू कर दिया है. इस वजह से कालेधन से हो रही मकानों की खरीद पर रोक लगी है.
9- रियल एस्टेट बाजार में ब्लैकमनी बहुत ज्यादा लगती थी. मगर सरकार की सख्ती से अब लोग नंबर दो का पैसा भी इसमें नहीं लगा रहे हैं.
10- रेरा जैसी नियामक संस्था के आ जाने से डेवलपर्स पर नए प्रोजेक्ट का पैसा उसी प्रोजेक्ट में लगाने का दबाव है.

क्या चाहिए रियल एस्टेट को?

जानकारों का कहना है कि मकानों की बिक्री बढ़ाने के लिए सरकार से कुछ ठोस कदम उठाए जाने की दरकार है. मसलन-

1- सस्ते घरों की परिभाषा में बदलाव की जरूरत है.
2- अफोर्डेबल हाउस को बढ़ावा देने के लिए होम लोन की ब्याज में भी अतिरिक्त छूट की मांग चल रही है.
3- घर खरीदारों को अतिरिक्त टैक्स छूट मिलने की जरूरत महसूस की जा रही है.
4- साल 2018 के बाद ये सेक्टर रेरा और जीएसटी के मुताबिक चल रहा है. अब जीएसटी में सुधार की मांग की जा रही है.
5- डेवलपर्स सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधा मांग रहे हैं. मतलब ये कि अभी एक प्रोजेक्ट लॉन्च करने पर डेवलपर्स को तरह-तरह की एनओसी के लिए कई जगह चक्कर लगाने पड़ते हैं.
6- होम लोन के ब्याज पर छूट की सीमा बढ़ाने की भी मांग की जा रही है.
7- होम डेवलपर्स रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं. उनका मानना है कि इससे सेक्टर तेजी से आगे बढ़ेगा. और लोगों का भरोसा बढ़ेगा.
8- प्रधान मंत्री आवास योजना के लिए धन आवंटन बढ़ाना वक्त की जरूरत है. इससे लोगों को घर जल्दी मिलेंगे. अभी 2022 तक आवास देने का लक्ष्य है.
9- स्टील, सीमेंट और ठेकेदार की सेवा पर जीएसटी कम करने की मांग भी चल रही है.
10- अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराने की मांग भी हो रही है.
11- कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में नई टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.
12- एनबीएफसी के संकट को हल किया जाए ताकि सेक्टर में नकदी की कमी दुरुस्त की जा सके.
13– धारा 80 ईई के तहत पहली बार घर खरीदने वालों के लिए 50,000 रुपए तक की छूट मिलने का प्रावधान है. इस सीमा को बढ़ाने की जरूरत है.


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