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एक अरब से ज़्यादा लोगों के कंप्यूटर पर दिखने वाली ये फोटो आई कहां से है?

इस धरती पर ऐसा शख्स़ ढूंढना लगभग नामुमकिन है जिसने कंप्यूटर पर काम किया हो लेकिन माइक्रोसॉफ्ट की इस घर-घर पहचानी गई तस्वीर को न देखा हो. माइक्रोसॉफ्ट के विन्डोज़ एक्सपी (XP) का ये डिफ़ॉल्ट वॉलपेपर हुआ करता था. बहुत कम लोगों को पता है कि ये कंप्यूटर जनरेटेड वॉलपेपर न होकर एक सच्ची-मुच्ची की तस्वीर है, जो इत्तेफाक से वजूद में आई है. आज आपको इसकी दिलचस्प कहानी सुनाते हैं.

इसे खींचने वाले शख्स थे मशहूर फोटोग्राफर चार्ल्स ओ’रियर.

अपनी अमर तस्वीर के साथ चार्ल्स ओ'रियर.
अपनी अमर तस्वीर के साथ चार्ल्स ओ’रियर.

कहां की है ये तस्वीर?

इस तस्वीर को लेकर बहुत सस्पेंस रहा है. पहले कुछ सालों तक किसी को इस तस्वीर की लोकेशन नहीं पता थी. लोग अंदाज़े लगाया करते थे. कोई कहता फ्रांस की है, कोई इंग्लैंड बताता, तो कोई स्विट्ज़रलैंड का दावा ठोकता. एक वेबसाइट ने तो इसके आयरलैंड की होने की घोषणा तक कर दी थी. इसके फोटोग्राफर चार्ल्स को माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस से एक बार फोन भी आया. वहां के इंजिनियर्स में शर्त लगी थी और वो चाहते थे कि चार्ल्स मामला सेटल करें. कईयों को लग रहा था कि ये तस्वीर वॉशिंगटन की है. चार्ल्स ने सही जानकारी देकर मामला सुलझा दिया. सही जानकारी ये थी कि ये फोटो अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया प्रांत का है. यहां नेपा वैली नामक एक जगह है जिसके पास के कस्बे सोनोमा काउंटी में है ये छोटी सी पहाड़ी.

कैसे कैप्चर हुआ ये ख़ूबसूरत लम्हा?

साल था 1996. जनवरी का महीना. चार्ल्स अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने अपनी कार पर निकले. हाल ही में इलाके में आंधी-तूफ़ान आया था और उसके बाद पहली बार मौसम खुला था. सोनोमा हाईवे से गुज़रते हुए चार्ल्स की नज़र अचानक इस पहाड़ी पर पड़ी और वहीं अटक कर रह गई. इतना सुंदर नज़ारा सामने था कि चार्ल्स मंत्रमुग्ध हो गए. एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर होने के नाते कैमरा हर वक़्त उनके पास रहता था. उन्होंने फटाफट ट्राईपॉड निकाला और उस पर अपना मामिया RZ-67 कैमरा फिट कर दिया. कैमरे में फुजीफिल्म कंपनी का वेल्विया रोल था. हां हां वही जिससे कभी ’36 फोटो खींचने की सीमा’ में रहकर फोटोग्राफी करते थे. सामने का दृश्य तेज़ी से बदलता जा रहा था. बादल आ-जा रहे थे. उन्होंने थोड़े-थोड़े अंतराल पर 4 फोटो खींची और लौट आएं.

अब ऐसे रोल इतिहास की चीज़ बन गए हैं.
अब ऐसे रोल इतिहास की चीज़ बन गए हैं.

उसके बाद क्या हुआ?

उस वक़्त चार्ल्स नेशनल जियोग्राफिक चैनल के लिए काम करते थे. उनकी नौकरी में इस फोटो का कोई काम नहीं था. सो उन्होंने ये तस्वीर फोटो स्टॉक करने वाली वेबसाइट कॉर्बिज पर डाल दी. जहां से थोड़ी सी लाइसेंसिंग फीस के बदले इसे कोई भी इस्तेमाल कर सकता था. चार-पांच साल अचानक एक दिन उन्हें माइक्रोसॉफ्ट की डेवलपमेंट टीम का कॉल आया. उन्हें वो तस्वीर चाहिए थी. अपने नए ऑपरेटिंग सिस्टम का डिफ़ॉल्ट वॉलपेपर बनाना चाहते थे वो. ये तस्वीर हर लिहाज़ से सूटेबल थी उनके लिए. वो तस्वीर किराए पर नहीं बल्कि खरीदना चाहते थे. उसके ओरिजिनल नेगेटिव सहित.

जब इंश्योरंस कंपनियों ने हाथ खड़े कर दिए

माइक्रोसॉफ्ट ने जो कीमत ऑफर की वो हैरान कर देने वाली थी. हालांकि सही कीमत का कभी खुलासा नहीं हुआ लेकिन बताते हैं कि दुनिया की महंगी तस्वीरों में इसका नंबर दूसरा है. इससे ज़्यादा महंगी तस्वीर सिर्फ वो थी जिसमें बिल क्लिंटन मोनिका लेविंस्की को गले लगा रहे हैं. चार्ल्स से एक गोपनीयता अग्रीमेंट साइन करवाया गया. चार्ल्स से कहा गया कि वो ओरिजिनल रोल उन्हें भेजें. जब कोरियर कंपनियों को उस रोल के कीमती होने का पता चला, तो उन्होंने उसे ले जाने से मना कर दिया. उनका कहना था कि जितनी रकम का कवर वो दे सकते हैं उससे ज़्यादा तो तस्वीर की कीमत ही है. आख़िरकार माइक्रोसॉफ्ट ने चार्ल्स के लिए प्लेन टिकट भेजा. चार्ल्स खुद गए और तस्वीर डिलीवर कर दी. माइक्रोसॉफ्ट ने तस्वीर का नामकरण किया, ‘ब्लिस (BLISS). जिसका तर्जुमा हुआ परमानंद.

फिर कोई कैप्चर नहीं कर पाया ये नज़ारा

लोकेशन का पता चलने पर कईयों ने वहां जाकर वही सीन दोबारा कैमरे में कैद करने की कोशिश की. कोई कामयाब न हो सका. सबसे बड़ी वजह तो ये रही कि वहां उसके बाद अंगूर की बेलें हो गई हैं. जिस वजह से प्लेन पहाड़ी का व्यू असंभव हो गया. 2006 में गोल्डिन और सेनेबी नाम के दो आर्टिस्ट सोनोमा में उसी जगह गए. फिर से वहां की फोटो खींची. जिसे पैरिस की आर्ट गैलरी में प्रदर्शित किया गया.

गोल्डिन-सेनेबी का रिक्रियेशन.
गोल्डिन-सेनेबी का रिक्रियेशन.

2006 में ही स्विस आर्टिस्ट सेबेस्टियन मेट्रौक्स ने एक तस्वीर जारी की. नाम था ‘ब्लिस आफ्टर बिल गेट्स’. ये तस्वीर स्विट्ज़रलैंड की थी जो काफी हद तक ‘ब्लिस’ से मिलती-जुलती थी. ऐसी अफवाहें भी फैलीं कि माइक्रोसॉफ्ट ने इसी तस्वीर में बदलाव करके अपना वॉलपेपर बनाया था. ये अफवाहें बाद में झूठी साबित हुईं.

ब्लिस आफ्टर बिल गेट्स. फोटो: सेबेस्टियन मेट्रौक्स

मई 2010 में टोनी इम्मूस नाम के एक फोटोग्राफर ने सेम लोकेशन पर एक तस्वीर खींची. ये भी ओरिजिनल से काफी मिलती-जुलती थी. टोनी ने इसका नाम रखा, ’21st Century Bliss’.

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21st Century Bliss. तस्वीर: टोनी इम्मूस.

इस तस्वीर ने धरती का हर वो कोना देख लिया है जहां कंप्यूटर की पहुंच है. कहते हैं एक अरब से ज़्यादा लोगों की निगाहों से गुज़री है ये. चार्ल्स ओ’रियर ने इस तस्वीर के सदके बहुत नाम कमाया. सही वक़्त पर सही जगह होने का ईनाम ऐसे ही मिलता है.


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