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माकी काजी: Sudoku के गॉडफादर, जिनके लिए लोगों की खुशी करोड़पति बनने से ज्यादा जरूरी थी

लॉजिक बेस्ड गेम सुडोकू (Sudoku) के गॉडफादर कहे जाने वाले माकी काजी (Maki Kaji) का 69 साल की उम्र में निधन हो गया. दुनिया को अपने बनाए खेल सुडोकू में उलझा कर रखने वाले जापान के माकी काजी ने बीती 10 अगस्त को टोक्यो में अंतिम सांस ली. वो 69 साल के थे और पित्त के कैंसर से जूझ रहे थे. माकी काजी के निधन की घोषणा उनकी पजल कंपनी निकोली (Nikoli) ने मंगलवार 17 अगस्त को की. माकी काजी इस कंपनी के को-फाउंडर थे.

सुडोकू लगभग दो दशक पहले जापान के बाहर लोकप्रिय हुआ. इसके लोकप्रिय होने की वजह देश-विदेश के अखबारों द्वारा इसे छापना माना जाता है. सुडोकू को मानसिक क्षमताओं को तेज रखने के तरीके के रूप में आज भी पसंद किया जाता है. इस खेल को एक तरह की ब्रेन एक्सरसाइज कहा जाता है.

Sudoku नाम कैसे पड़ा?

साल 2008 के अपने एक भाषण में माकी काजी ने बताया था कि कैसे 1984 में Sudoku को ये नाम मिला. उन्होंने कहा था,

उस साल नंबर प्लेस नाम के एक गेम से मुझे प्यार हुआ. मैंने इसका नाम बदलकर सुडोकू कर दिया. मैं एक जापानी नाम बनाना चाहता था. मैंने लगभग 25 सेकंड में ये नाम बना लिया, जो सिर्फ सिंगल डिजीट को इंगित करता है. उम्मीद नहीं थी कि नाम टिकेगा.

काजी ने बताया था कि उस समय तक उन्होंने निकोली कंपनी की स्थापना कर ली थी. और जापान में पहली पजल मैग्जीन की पब्लिशिंग शुरू कर दी थी. माकी काजी कहते थे,

मुझे नंबर प्लेस से प्यार हो गया था और मैंने इसे अपने मेन्यू में शामिल करने का फैसला किया. लेकिन नंबर प्लेस के नाम ने मुझे प्रभावित नहीं किया. मैं एक जापानी नाम चाहता था. नंबर… एक बॉक्स में एक नंबर… सिंगल डिजीट. मैंने इसे बनाया. Suuji wa dokushin ni kagiru. जिसका मतलब होता है नंबर सिंगल होना चाहिए. अनमैरिड होना चाहिए. ये फॉर्मल नाम था, लेकिन इसके साथ दिक्कत ये थी कि ये बहुत लंबा नाम था. फिर इसे हमने संक्षिप्त नाम Sudoku कहना शुरू किया. “SU” यानी नंबर “DOKU” यानी सिंगल या अविवाहित.

Japan Obit Maki Kaji
फाइल फोटो-AP

माकी काजी ने ये भी बताया,

बेशक, मुझे उम्मीद नहीं थी कि सुडोकू विश्व स्तर पर स्वीकृत नाम होगा. सच कहूं तो मेरे पास समय नहीं था, क्योंकि मेरा स्टाफ मुझ पर नाम बनाने के लिए दबाव डाल रहा था, और मैं उस दिन घुड़दौड़ में जाना चाहता था. इसलिए मैंने लगभग 25 सेकंड में नाम बना लिया. तब से हमारी टीम ने उच्च गुणवत्ता वाले आसान से कठिन पहेली तक हजारों सुडोकू पहेलियां तैयार की हैं.

निकोली ने सुडोको को पूरी दुनिया में पहुंचाया

निकोली कंपनी का दावा है कि वो पजल मैग्जीन और बुक्स के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है. 2000 के दशक के मध्य में निकोली ने सुडोकू को मुख्यधारा में लाने में मदद की. इसने खुद को जापान की पहली पजल मैग्जीन होने का दावा किया.

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक कंपनी खुद नए पजल्स नहीं बनाती है. माना जाता है कि एक अमेरिकी ने सुडोकू के पुराने संस्करण का आविष्कार किया था, लेकिन इसकी असली उत्पत्ति संदिग्ध है. कुछ लोग इसे 18वीं सदी के स्विस गणितज्ञ लियोनहार्ड यूलर से जोड़ते हैं. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ये विचार चीन से होकर भारत के जरिए आठवीं या नौवीं शताब्दी में अरब दुनिया में आया था.

Japan Obit Maki Kaji
सुडोकू को हर दिन करोड़ों लोग खेलते हैं. (फाइल फोटो-AP)

हालांकि कि ये सच है कि माकी काजी की कंपनी ने सुडोकू और इसी तरह के पजल को दुनियाभर में मशहूर बना दिया. 2007 में माकी काजी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को निकोली का रहस्य बताया था. उन्होंने कहा था कि कंपनी ने मौजूदा पहेलियों का बड़े पैमाने पर परीक्षण और सुधार किया है. काजी ने कहा था,

मैं निकोली को पजल गेम्स का वर्ल्ड सोर्स बनाना चाहता था. हमारे पास और भी बहुत से पजल्स हैं जहां से सुडोकू आया था.

1990 के दशक में जब उन्होंने न्यूयॉर्क और लंदन में प्रकाशकों को सुडोकू पहेली पेश की तो वो सफल नहीं रहे थे. लेकिन एक दशक के भीतर ये पहेली दुनियाभर के सैकड़ों अखबारों में प्रकाशित हो रही थी, जिससे लाखों डॉलर की कमाई हुई.

निकोली कंपनी के मुताबिक 100 देशों के लगभग 20 करोड़ लोगों ने पजल को हल किया है. दुनियाभर में नियमित 10 करोड़ लोग इस पहेली को खेलते हैं. बच्चे हों या बूढ़ें, हर उम्र के लोग इस खेल को खेलते हैं. कहा जाता है कि समझ में आने के बाद ये खेल अधिक आसान होने के साथ और रोचक हो जाता है.

2011 के विनाशकारी भूकंप के बाद उत्तरी जापान के एक शहर ओत्सुची (Otsuchi) में अस्थायी आवास में रहने वाले एक बुजुर्ग व्यक्ति ने काजी को बताया कि उनके पजल बहुत कठिन होते हैं. इसने काजी को बच्चों और वृद्ध लोगों के लिए अधिक सुलभ पहेलियां बनाने के लिए प्रेरित किया.

कौन थे माकी काजी?

माकी काजी का जन्म 8 अक्टूबर 1951 को जापान के साप्पोरो में हुआ था. सुडोकू वर्ल्ड क्रेज पर लिखी एक किताब के मुताबिक, काजी के पिता एक टेलीकॉम कंपनी में इंजीनियर थे. उनकी मां एक किमोनो शॉप में काम करती थीं. माकी काजी ने टोक्यो के शकुजी हाई स्कूल से ग्रेजुएशन किया. लेकिन पढ़ाई पूरी करने से पहले वो बाहर हो गए. उनके परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं.

एक ऐसे युग में जहां अधिकांश सुडोकू और इसी तरह की पहेलियां कंप्यूटर से उत्पन्न होती हैं, निकोली ने मनुष्यों द्वारा बनाई गई पहेलियां बनाना जारी रखा.

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काजी 69 साल की उम्र में कैंसर से जंग हार गए. (फाइल फोटो-AP)

BBC से 2007 में बात करते हुए माकी जाकी ने कहा था,

जब मुझे एक पहेली के लिए नया आइड‍िया आता है तो मैं खुश हो जाता हूं. पहेलियां गढ़ना ही जिंदगी की असली खुशी देने जैसा था. बेहतर पहेली बनाने के लिए नियमों को आसान बनाना जरूरी होता है. ये खजाना खोजने जैसा है.

माकी काजी ने बताया था कि जब 2005 में सुडोकू इंग्लैंड और फिर पूरी दुनिया में थोड़ा हिट हुआ तो उनके दोस्तों ने उन्हें हर देश में सुडोकू का ट्रेडमार्क करने की सलाह दी थी, क्योंकि इससे वे करोड़पति बन सकते थे. लेकिन काजी ने इससे इन्कार कर दिया. कहा,

“नहीं, मैं यही नहीं चाहता. मुझे ये देखकर खुशी होगी कि दुनिया में हर कोई सुडोकू का अधिक आसानी से आनंद ले रहा हैये सच है मैं करोड़पति नहीं बना. लेकिन मुझे खुशी है कि सुडोकू को अब अरबों लोग पसंद करते हैं. मैं अपने कर्मचारियों का ये कहते हुए आनंद लेता हूं कि उन्हें अपनी नौकरी पर गर्व है. मैं जिस तरह से हूं, उससे बहुत संतुष्ट हूं. 

माकी काजी ने इसी साल जुलाई में खराब स्वास्थ्य कारणों के चलते अपनी कंपनी के प्रमुख के रूप में पद छोड़ दिया था.


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