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मधुबनी हत्याकांड: जातिगत लड़ाई या आपसी रंजिश का मामला?

पग पग पोखरि माछ-मखान… माने जहां कदम-कदम पर आपको तालाब, मछली और मखाना मिल जाए. मिथिला शब्द सुनते ही ये पंक्तियां ध्यान आती हैं, लेकिन अबकी मामला काफ़ी अलग है. मधुबनी, अपनी लोककला मिथिला पेंटिग्स के लिए विश्वविख्यात है. लेकिन आजकल 5 लोगों के मर्डर को लेकर ख़बरों में है. होली के दिन जिले के बेनीपट्टी थाने के महमदपुर गांव में जमीन और तालाब विवाद को लेकर हुई फायरिंग में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत हो गई है. आइए इस पूरे मामले के बारे में विस्तार से जानते हैं.

तारीख़ 29 मार्च. जगह महमदपुर, बेनीपट्टी, मधुबनी. इस दिन दोपहर करीब 12 तालाब से मछली पकड़ने को लेकर हुए विवाद में एक पक्ष के 3 लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में रणविजय सिंह, वीरेंद्र सिंह, राणा प्रताप सिंह शामिल हैं. दो लोग रूद्र नारायण सिंह और मनोज सिंह घायल थे, इन दोनों की मौत अस्पताल में हुई.

घटना के बाद मृतक परिवार के राम नारायण सिंह के बयान के आधार पर प्रवीण झा, नवीन झा सहित कुल 35 लोग नामजद किए गए. घटनास्थल से पुलिस को 8 खोखे कारतूस,  2 बाइक और 1 मोबाइल मिला था. घटना के बाद पुलिस ने गांव में कैंप करना शुरू कर दिया. मामले को लेकर एसपी मधुबनी, सत्य प्रकाश ने 30 मार्च को कहा था, ‘एक भी आरोपित को बख्शा नहीं जाएगा. फिलहाल स्थिति सामान्य हो रही है. पीड़ितों को पूरा न्याय मिलेगा.’

Praveen Jha
हत्याकांड का मुख्य आरोपी प्रवीण झा. (तस्वीर: ट्विटर)

मामले को लेकर शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि मुहमदपुर गांव और पौआम गांव की सीमा पर एक तालाब में मछली पकड़ने को लेकर पहले से ही विवाद था. लेकिन होली वाले दिन दोनों पक्षों में कहासुनी हाथापाई में बदल गई. इसके बाद प्रवीण झा अपने दर्जनों लठैतों को लेकर आए और गाली गलौज करते हुए फायरिंग की. इसमें तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. घायल लोगों को दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां दो और लोगों की मौत हो गई. ग्रामीणों का दावा है इस दौरान करीब 20-30 राउंड गोलियां चलीं.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स से इतर बीबीसी की एक रिपोर्ट बताती है कि मामला सिर्फ तालाब और मछली को लेकर नहीं है. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक़ तालाब और मछली का संबंध मठ की जमीन से है. इसी मठ की जमीन पर तालाब है, जिस तालाब से मछली पकड़ने को लेकर दोनों पक्षों में विवाद होता रहा है, जो अबकी बार हिंसक हो गया. मुख्य आरोपित प्रवीण झा को लेकर बीबीसी की एक रिपोर्ट बताती है कि वह बजरंग दल का जिलाध्यक्ष है और रावण सेना के नाम से स्थानीय स्तर पर संगठन भी चलाता है. यह संगठन कथित तौर पर ब्राह्मणों के हितों की बात करता है.

Muhamadpur Pond
वो तालाब जिसकी वजह से दो पक्षों में सालों से विवाद है. (तस्वीर: प्रभात ख़बर)

तालाब को लेकर क्या विवाद?

प्रभात ख़बर की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ जिस तालाब को लेकर दो समुदाय में लड़ाई होती है, उसमें दोनों समुदाय का आधे-आधे हिस्से पर स्वामित्व है. एक समुदाय के लोगों ने अपने हिस्से का भाग महमदपुर गांव के सुरेंद्र सिंह के बेटे संजय सिंह के हाथों मछली पालन के लिए मछुआ सोसाइटी के माध्यम से बेच दिया है, जबकि बाकी आधे हिस्से को दूसरे समुदाय के लोगों ने भी किसी को लीज पर दिया है. लीज के दो साल पूरे हो चुके हैं. जबरन मछली पकड़ने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद होता आया है.

4-5 अप्रैल को मुख्य आरोपियों की कुर्की-ज़ब्ती की जा चुकी है. इसके बाद 7 अप्रैल को मुख्य आरोपी प्रवीण झा के साथ भोला सिंह, चंदन झा, कमलेश सिंह, मुकेश साफी आदि को गिरफ़्तार किया गया है.

नेता क्या कह रहे?

बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि आरोपित प्रवीण झा के स्थानीय डीएसपी से अच्छे संबंध हैं. तेजस्वी ने मामले को लेकर पुलिस पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने सीएम नीतीश कुमार पर भी आरोप लगाते हुए कहा है कि नीतीश कुमार आरोपियों को संरक्षण दे रहे हैं.

6 अप्रैल को तेजस्वी यादव पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि दुर्भाग्य है कि मधुबनी नरसंहार पर मुख्यमंत्री जी ने कोई शोक संवेदना और खेद तक प्रकट नहीं किया. सत्ता संरक्षण में हुए इस नरसंहार में अगर किसी विधायक, मंत्री की कोई संलिप्तता नहीं है, तो अभी तक दोषियों को बचाया क्यों जा रहा है? डीएम/एसपी ने अभी तक घटनास्थल का दौरा क्यों नहीं किया?

विपक्ष के साथ ही बीजेपी के मंत्री और विधायक भी इस घटना पर सवाल उठा रहे हैं. वन एवं पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री नीरज सिंह बबलू ने घटना को नरसंहार बताया है. उन्होंने कहा है कि पुलिस में कुछ निकम्मे अधिकारी बैठे हुए है, जिसकी वजह से इस तरह की घटनाएं हो रही हैं. बीजेपी के विधायक ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू ने कहा कि वक्त आ गया है कि पुलिस पैसे के लिए शराब पकड़ना छोड़ अपराधियों को पकड़े.

देरी से ही सही सीएम नीतीश कुमार का बयान भी आया. उन्होंने कहा कि कोई किसी का मर्डर करके बच नहीं सकता है. मैं लगातार डीजीपी के संपर्क में हूं और मामले को देख रहा हूं.

सीएम नीतीश ने स्पीडी ट्रायल की बात कही है. कहा है कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे.

पूर्व सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि मधुबनी नरसंहार को इवेंट के रूप में नहीं देखें. न ही इसे जातीय विद्वेष फैलाने का जरिया बनाएं. पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ें. पीड़ित परिवार आमरण अनशन पर बैठा है, उनका साथ दें. प्रवीण झा गिरफ्तार हुआ है, लेकिन ऐसे गिरोहों के जन्मदाता बजरंग दल पर पहले प्रतिबंध लगे.

बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने ट्वीट कर बताया है कि मधुबनी में घटित जघन्य अपराध के मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है. राज्य में अराजकता फैला कर कोई भी अपराधी बच नहीं सकता. हमारी सरकार की अपराध को लेकर जीरो-टॉलरेंस की नीति हमेशा से रही है. राज्य में संगठित अपराध को जड़ से उखाड़ फेंका गया है. इस प्रकरण में भी अपराधियों के खिलाफ सख़्त कार्यवाही होगी.

इस हत्याकांड में पूर्व मंत्री और बेनीपट्टी भाजपा विधायक विनोद नारायण झा पर भी आरोप लग रहे हैं कि उनकी आरोपियों के साथ सांठगांठ है और वह उनकी मदद कर रहे हैं. मामले को लेकर विनोद नारायण झा ने आज तक से कहा है कि महमदपुर गांव, हरलाखी विधानसभा क्षेत्र तहत आता है, बेनीपट्टी के नहीं. यह मेरे विधानसभा क्षेत्र का मामला नहीं है.

उन्होंने बताया कि मेरी निजी जिंदगी में दिक्कतें बढ़ी हुई हैं. मेरे दामाद का इलाज़ आईसीयू में चल रहा है और इसी कारण से मैं पीड़ित परिवारों से नहीं मिल पा रहा हूं. इस हत्याकांड में जो भी दोषी हैं, उन्हें फांसी की सजा मिलनी चाहिए ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो सके.

Vinod Narayan Jha
बीजेपी विधायक विनोद नारायण झा. (तस्वीर: फेसबुक)

पीड़ित परिवारों का क्या कहना है?

मृतक के परिजन अनशन पर बैठे हुए हैं. इन लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द दोषियों पर कार्रवाई की जाए. लोगों का कहना है कि घटना में लापरवाही बरतने और भेदभावपूर्ण कार्रवाई करने को लेकर स्थानीय एसएचओ को सात दिन में सस्पेंड कर खानापूर्ति की जा रही है. पीड़ितों की मांग है कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए, डीएम और एसपी पर कार्रवाई की जाए, साथ ही पीड़ित परिवारों को मुआवजा और नौकरी दी जाए.

28 साल पहले का क्या कनेक्शन?

आज तक ने मामले की पड़ताल की है. पड़ताल में पता चला कि इस गांव में साल 1993 में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. दावा है कि तब अभी के हत्याकांड में जान गंवाने वाले रूद्र नारायण के पिता का मर्डर कर दिया गया था.  इसके बदले में अभी के हत्याकांड में अपने तीन बेटों को खोने वाले BSF में रहे सुरेंद्र सिंह ने गांव के 3 लोगों की हत्या कर दी थी, जो मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है.

हालांकि सुरेंद्र सिंह ने किसी भी पुरानी रंजिश से इनकार किया और दावा किया कि 28 साल पहले हुए हत्याकांड का अभी हुए हत्याकांड से कोई कनेक्शन नहीं है. सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस और राजनेताओं की मिलीभगत से ये घटना हुई है. उन्होंने बताया कि छठ के वक्त आरोपित उनके तालाब से मछलियां चोरी कर रहे थे, जब उनके बेटे (संजय सिंह) ने रोका तो उसकी टांग काट दी गई. उन्होंने आगे कहा कि मामले को लेकर एफआईआर हुई थी, लेकिन दरोगा और डीएसपी ने मिलकर सफाया कर दिया और उनके बेटे को एससी/एसटी एक्ट के तहत जेल भेज दिया.

महंत रूद्र नारायण, जिन्होंने इस हत्याकांड में अपनी जान गंवाई है, 28 साल पहले इनके पिता जी की भी हत्या कर दी गई थी. रूद्र नारायण के भाई सूर्य नारायण ने 28 साल पहले हुई उनके पिता की हत्या और अभी हुए हत्याकांड के बीच कनेक्शन को लेकर कुछ साफ-साफ नहीं बताया. सिर्फ इतना कहा कि छठ के मौके पर तालाब से मछली मारने को लेकर विवाद हुआ था.

मृतक रूद्र नारायण की मां ने 28 साल पुराने हत्याकांड को लेकर बताया कि सब गांव के ही लोग थे, अब उन्हें कुछ याद नहीं. स्थानीय लोगों ने आज तक के रिपोर्टर पर 28 साल पहले की घटना से जुड़े सवाल न पूछने का दबाव बनाया था. स्थानीय लोगों का दावा है कि दोनों घटनाओं का कोई रिश्ता नहीं है.

मृतक राणा प्रताप की बेटियों ने भी किसी भी तरह की पुरानी लड़ाई से इंकार किया. उनकी मांग है कि दोषियों को फांसी की सजा मिले. पीड़ित परिजनों की शिकायत है कि घटना से काफी पहले ही पुलिस को जानकारी दे दी गई थी लेकिन पुलिस हत्याकांड के कई घंटे बाद मौके पर पहुंची.

जातिगत लड़ाई?

कई लोग और मीडिया के एक सेक्शन में इस हत्याकांड को जाति की लड़ाई बताया जा रहा है. लेकिन पुलिस प्रशासन इसे जातिगत लड़ाई मानने से इंकार कर रहा है. दरभंगा रेंज के आईजी अजिताभ कुमार ने हत्याकांड को लेकर बीबीसी से बात करते हुए कहा,

यह कांड दो जाति का मामला नहीं, बल्कि दो गुटों के आपसी रंजिश का है. पुलिस के पास जो सबूत हैं, उसके आधार पर पुलिस अभियुक्तों को गिरफ़्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है. आईटी सेल का भी सहयोग लिया जा रहा है.

हत्याकांड में लापरवाही के आरोपों पर मधुबनी एसपी सत्य प्रकाश ने बीबीसी को बताया है,

लापरवाही के आरोप में बेनीपट्टी के थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है. हमने घटना की रात ही एसआईटी का गठन कर जांच शुरू कर दी थी. अब यह मामला इतना बड़ा बन चुका है कि किसी को संरक्षण देने का कोई सवाल ही नहीं रह जाता.

मामला कितना पेचीदा?

आरोपियों के चाचा चंद्रप्रकाश झा का दावा है कि नवीन और प्रवीण ने कोई हत्या नहीं की है. उन्होंने सारे आरोपों को निराधार बताया है. उन्होंने बताया कि प्रवीण झा मुखिया का चुनाव भी लड़ने वाला था, इसी कारण से उसे फंसाया गया है. जिस तालाब की बात की जा रही है, उसके दूसरी तरफ का हिस्सा हमारा है, पूर्वजों से चला आ रहा है. लेकिन वो लोग पता नहीं कहा से कागज बनवाकर उसमें मछली पालन करते हैं. जब वो तालाब हमारे पुरखों की है,  तो वो जगह मछुआ सोसाइटी को कैसे चली गई?

मधुबनी हत्याकांड का मामला बेहद पेचीदा है. गांव में कोई भी कैमरे पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहा है. पीड़ित परिवार और आरोपियों के परिजनों ने आज तक से बातचीत में एक बार भी किसी तरह के जातीय संघर्ष का जिक्र नहीं किया. हालांकि उनकी बातचीत से आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई साफ झलकती है. स्थानीय लोगों के मुताबिक दोनों ही पक्षों के लोग अपराधिक छवि के रहे हैं.


वीडियो- जमीन पर किस कदर भ्रष्टाचार है, मधुबनी के लोगों ने बताया

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