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जय चौधरी: किसान मां-बाप का बेटा कैसे बना भारत का नौवां सबसे अमीर शख़्स?

साल 1975 में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की मैट्रिक का रिज़ल्ट आया तो जगतार सिंह चौधरी के परिवार में खुशी का माहौल था. होनहार बेटे ने पूरे प्रदेश की मेरिट लिस्ट में दूसरा स्थान जो हासिल किया था. किसानी करने वाले मां-बाप के लिए बड़े फख्र का दिन था. उन्हें पक्का यकीन हो गया था कि “बेटा बड़ा नाम करेगा.”

सूट-टाई पहने जय चौधरी, अपनी मां सुरजीत कौर और पिता भगत सिंह के साथ. (तस्वीर-चौधरी परिवार)
सूट-टाई पहने जय चौधरी, अपनी मां सुरजीत कौर और पिता भगत सिंह के साथ. (तस्वीर-चौधरी परिवार)

आज, 45 साल बाद, उस बेटे ने बड़ा नाम और बड़ा काम, दोनों कर दिखाया है. हारून ग्लोबल रिच लिस्ट-2021 में किसान परिवार का ये बेटा- जगतार चौधरी, जय चौधरी नाम से शुमार है. जय चौधरी भारत के नौवें अमीर शख़्स बन गए हैं. आइए जानते हैं, कभी बिना बिजली, बिना पेयजल वाले गांव में पेड़ तले पढ़ाई करने वाले जय कैसे पहुंचे इस मुक़ाम तक!

मौजूदा वक्त में भारत के नौवें सबसे अमीर शख़्स, बिज़नेसमैन, सीरियल आंत्रप्रेन्योर- जय चौधरी.
मौजूदा वक्त में भारत के नौवें सबसे अमीर शख़्स, बिज़नेसमैन, सीरियल आंत्रप्रेन्योर- जय चौधरी (तस्वीर-Zscaler).

‘जय चौधरी: हमेशा टॉपर’

साल 1959 में पहाड़ी प्रदेश हिमाचल के जिला ऊना के तहत आने वाले छोटे से गांव पनोह में जय चौधरी का जन्म हुआ. बचपन से ही पढ़ाई में उनका दिल रमता था. तब तक हिमाचल के उस इलाक़े तक बिजली नहीं पहुंची थी. जय दिन में पेड़ के नीचे पढ़ाई करते और रात में दीये की लौ तले. हमसे बातचीत में जय के बड़े भाई दलजीत सिंह ने बताया,

जब मैं ग्रेजुएशन कर रहा था, तब जय आठवीं में पढ़ता था. वो उसी उम्र में मेरी किताबों से पढ़ता था. इतनी कमांड थी लिखने पर कि टीचर्स तक को डिक्शनरी खोलनी पड़ जाती थी. दसवीं में उसने स्कूल बोर्ड की मेरिट(1974-75) में पूरे हिमाचल में दूसरी पोज़िशन हासिल की. इसके दो साल बाद प्रेप (आज की 11वीं और 12वीं) में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया. वो बचपन से ब्रिलियंट था. खाने खाते वक्त, पशु चराते वक्त, हमेशा किताबें साथ रहती थीं. स्पीकर बहुत अच्छा था. स्कूल की भाषण प्रतियोगिताओं में भी नंबर 1 वही रहता था.

जवानी के सालों में जय चौधरी. आज भी आप देखेंगे तो फिटनेस लेवल में कोई ख़ास कमी नहीं आई है.(तस्वीर-चौधरी परिवार)
जवानी के सालों में जय चौधरी. आज भी आप देखेंगे तो फिटनेस लेवल में कोई ख़ास कमी नहीं आई है.(तस्वीर-चौधरी परिवार)

दलजीत सिंह खुद सरकारी स्कूल से रिटार्यड प्रिंसिपल हैं. उन्होंने कहा,

हमारा परिवार ग़रीब था. पिताजी किसानी करते थे. मैं ग्रेजुएशन करने के बाद टीचर बन गया. मेरे सभी भाई-बहन (3 भाई, 3 बहनें) पढ़ाई में अच्छे थे. जगतार (जय) बचपन से होशियार था. प्रेप के बाद इसे IIT BHU के B.Tech कोर्स में दाखिला मिल गया. वहां से पासआउट हुआ और अमेरिका की सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी में M.Tech(M.S) करने चला गया. वहीं काम शुरू किया. लेकिन कभी अपने किसान माता-पिता का संघर्ष नहीं भूला. एक किसान परिवार से, लो-स्टेटस से उठकर इस मुक़ाम तक पहुंचना जय और उनकी पत्नी ज्योति (प्रभजोत कौर) की मेहनत और मां-बाप के संघर्ष का फल है.

अपनी दादी, माता-पिता, पत्नी ज्योति और भतीजी के साथ जय चौधरी.
अपनी दादी, माता-पिता, पत्नी ज्योति और भतीजी के साथ जय चौधरी.

अमेरिका में जय चौधरी का संघर्ष, फिर सफलता

जय साल 1982 में अमेरिका गए. सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी से M.S करने के बाद उन्होंने कुछ वक्त तक संस्थानों में नौकरी की. फिर 1996 में SecureIT कंपनी की शुरुआत की. ये कंपनी इंटरनेट पर सिक्योरिटी सर्विसेज़ मुहैया करवाती थी. इसे बाद में Verisign कंपनी ने ख़रीद लिया. जय Verisign में कुछ वक्त रहे.

फिर साल 2000 में CoreHarbor और Cipher Trust की स्थापना की. साल 2002 में AirDefense कंपनी बनाई, जो वायरलेस नेटवर्क पर सुरक्षा मुहैया करवाती थी. इसका अधिग्रहण मोटोरोला ने कर लिया. इसके बाद आई जय चौधरी की सबसे सफल कंपनी- Zscaler. ये साइबर सिक्योरिटी फर्म है जो दुनिया के 190 देशों में अपनी सेवाएं दे रही है. दुनिया की टॉप 500 कंपनियों में से ज़्यादातर जय चौधरी की कंपनी Zscaler की ग्राहक हैं.

अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज NASDAQ में लिस्टिंग के वक्त मौजूद Zscaler की टीम.
अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज NASDAQ में लिस्टिंग के वक्त मौजूद Zscaler की टीम.

Zscaler के 10 साल होने पर मार्केट में पहली बार आम लोगों को इसकी हिस्सेदारी ख़रीदने का मौका मिला. 2018 में आए IPO में लोगों ने कंपनी में भरोसा दिखाया. कोविड आने के बाद दुनियाभर में ‘वर्क फ्रॉम होम’ अचानक से बढ़ गया. इसका फायदा Zscaler को हुआ. दुनियाभर में सिक्योर कनेक्शंस की डिमांड बढ़ी और इसे पूरा किया Zscaler ने. आज शेयर बाज़ार में Zscaler की ग्रोथ पांच गुना हो चुकी है. वो भी मात्र ढाई साल के छोटे अंतराल में. Zscaler इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी क्लाउड सिक्योरिटी कंपनी बन गई है.

‘जय-ज्योति के साथ पूरा परिवार’

जय चौधरी के भाई दलजीत चौधरी बताते हैं-

जय की पत्नी ज्योति चौधरी भी MBA हैं. कंपनी का सारा फाइनांस वही संभालती थीं. कुछ वक्त पहले ही उन्होंने कंपनी की ज़िम्मेदारियां छोड़ी हैं. हमारे माता-पिता जय के साथ अमेरिका में ही रहते हैं. वे 90 के दशक में अमेरिका चले गए थे ताकि जय और ज्योति काम को ज़्यादा वक्त दे सकें और वे उनके बच्चे संभाल सकें. मेरे पिता 98 साल के हैं, मां भी 90+. ज्योति के माता-पिता भी अमेरिका में ही साथ रहते हैं. अब वो ज़्यादा वक्त परिवार को दे पा रही हैं.

अपने भाइयों और बहन के साथ जय.
अपने भाइयों और बहन के साथ जय.

उन्होंने बताया,

जय और ज्योति के 2 बेटे और एक बेटी है. हालांकि, कोई भी बच्चा फिलहाल पिता के साथ कंपनी काम नहीं कर रहा. पूरा परिवार आज भी ज़मीन से जुड़ा हुआ है. बच्चे आज भी हमारे इलाके की भाषा बोलते हैं. उनका एक बेटा ऑर्थोपेडिक सर्जन है, उसने तो ट्रेनिंग के लिए भी भारत आना चुना. हमारा मंझला भाई जो वेटनरी डॉक्टर है, 2001 में जय के पास अमेरिका चला गया था.

जय अपनी पत्नी और बच्चों के साथ.
जय अपनी पत्नी और बच्चों के साथ.

दलजीत बताते हैं कि जय चौधरी शिक्षा क्षेत्र के बारे में खासे उत्साहित रहते हैं. उन्होंने एजुकेशन वेलफेयर ट्रस्ट के ज़रिए हमारे गांव के आसपास के इलाक़ों में स्कूलों को खूब दान दिया है.

“हारून की लिस्ट में जय चौधरी”

हारून रिच लिस्ट-2021 ने दुनिया के अमीरों की सूची में जय चौधरी को इस साल 577 स्थान ऊपर 185वें स्थान पर रखा है. भारत के हिसाब से देखें तो वो नौंवे स्थान पर आते हैं. बीते एक साल के अंदर उनकी संपत्ति में 271% का इज़ाफ़ा हुआ है. फिलहाल उनकी संपत्ति 13 बिलियन डॉलर आंकी गई है.

इन्वेस्टर्स.कॉम को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि “हम यूरोप के अलावा भारत, जापान की मार्केट पर फोकस कर रहे हैं.” जय की कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर तमाम पदों पर नौकरी के लिए आवेदन मांगे हैं, जो कंपनी के अपना कारोबार बढ़ाने की ओर इशारा करता है.

जय चौधरी और उनका परिवार आज भी गांव आता है. सभी स्थानीय बोली-भाषा बोलते हैं. जय चौधरी ने 2018 में एक इंटव्यू में कहा था,

मेरे लिए पैसे की महत्ता बहुत कम है. अगली पीढ़ी के लिए संपत्ति छोड़कर जाने से ज़्यादा ज़रूरी मेरे लिए है कि मेहनत, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा सरीखे जो गुण मैंने किसानी करने वाले मेरे माता-पिता से सीखे हैं, उन्हें अगली पीढ़ी को सौंपकर जाऊं.

जय बताते हैं कि वो पहली बार एयर प्लेन में तब बैठे थे जब उनका एडमिशन सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी में हुआ. उन्हें स्कॉलरशिप मिली और टाटा कंपनी ने अमेरिका जाने के लिए उन्हें फंड किया था. सिनसिनाटी से पढ़ने के बाद उन्होंने IBM और Unisys जैसे कंपनियों में काम किया था.

Zscaler के सफल संस्थापक और लीडर जय चौधरी.
Zscaler के सफल संस्थापक और लीडर जय चौधरी.

जय चौधरी उदाहरण हैं कि लगातार मेहनत औेर फ्रेश आइडिया किसी के लिए भी सफलता की राह खोल सकता है. फिर फर्क़ नहीं पड़ता कि आप कहां से आते हैं, किसी मैगासिटी से या बिन बिजली वाले छोटे से गांव से.


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