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साल 2020 की शुरुआत हम बहुत बड़ी गलती के साथ कर रहे हैं

31 दिसंबर की रात पुराना कैलेंडर कंबल ओढ़ लेगा. सब दस तक गिनती गिनेंगे और चिल्लाएंगे – हैप्पी न्यू इयर. नया साल शुरू होगा. और साल का नंबर होगा 2020. इसे नए साल के साथ-साथ नए दशक की शुरुआत भी कहा जा रहा है

लेकिन क्या ये नए दशक की शुरुआत है?

ये सवाल क्यों उठा? आर्टिकल्स देखकर उठा. दिसंबर शुरू होते ही इंटरनेट पर डीकेड-एंडर आर्टिकल्स तैरने लगे. मसलन –

इस दशक के सबसे बड़े आविष्कार.
इस दशक की सबसे बेहतरीन फिल्में.
इस दशक की महत्वपूर्ण पॉलिटिकल इवेंट्स.

एक नज़र में 2020 को देखकर लगता है कि नए दशक की शुरुआत हो गई है. इसके पीछे का लॉजिक है – दहाई वाले नंबर का बदलना.

2019 से 2020 होगा. और दहाई वाला नंबर 1 से 2 हो जाएगा. इसलिए ज़्यादातर लोगों को लगता है कि ये नए दशक की शुरुआत है. लेकिन इस लॉजिक में बहुत बड़ी गड़बड़ है.

ये लीप ईयर ज़रूर है. फरवरी में 29 दिन होंगे. (सोर्स - विकिकैलेंडर)
ये लीप ईयर ज़रूर है. फरवरी में 29 दिन होंगे. (सोर्स – विकिकैलेंडर)

जो लोग हिसाब के पक्के हैं, वो इसे नया दशक बिलकुल न मानेंगे. क्योंकि हिसाब में छोटा-मोटा नहीं पूरे एक साल का घपला है. बहुत ही सिंपल सी मैथ्स है. बस मैथ्स के पहले कुछ फैक्ट्स जान लीजिए.

कोई ‘ज़ीरो ईयर’ सुना है कभी?

जो हम कहते हैं कि ये साल 2020 शुरू होगा. ये क्यों कहते हैं?

2020 तक पहुंचने के लिए कहीं से गिनती शुरू हुई होगी. ये गिनती कहां से शुरू हुई? और किसने शुरू की? जवाब आपकी हिस्ट्री की किताब में छिपा है.

हिस्ट्री की किताब में साल के साथ AD या BC लिखा होता है. ये AD और BC क्या है?

BC का फुलफॉर्म है Before Christ.
हिंदी में कहते हैं ईसा पूर्व.
मतलब ईसा मसीह के जन्म से पहले वाले साल.

AD का फुलफॉर्म है Anno Domini.
हिंदी में कहते हैं ईसवी.
मतलब ईसा मसीह के जन्म के बाद वाले साल.

कहानियों के मुताबिक ईसा का जन्म चरनी में हुआ था. (सोर्स - विकिमीडिया)
कहानियों के मुताबिक ईसा का जन्म चरनी में हुआ था. (सोर्स – विकिमीडिया)

सालों की गिनती वाला ये सिस्टम रोमन साम्राज्य ने शुरू किया था. ये मानकर कि 1 BC में ईसा मसीह नहीं थे और 1 AD में वो थे. इस हिसाब से ईसा के कथित जन्म के जितने पीछे जाएंगे, BC के पहले उतनी बड़ी संख्या हुई.

उदाहरण के लिए सम्राट अशोक की मौत 232 BC में हुई. और जन्म 304 BC में हुआ.

कुल मिलाकर बात ये है कि सालों की गिनती शुरू करने का एक रिफरेंस प्वाइंट है. और ये रिफरेंस प्वाइंट है – ईसा का कथित जन्मवर्ष.
(मैं बार-बार ईसा का कथित जन्मवर्ष इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि इतिहासकारों के मुताबिक ईसा का जन्मवर्ष 4 BC है.)

ये AD और BC वाला सिस्टम रोमन साम्राज्य ने 525 AD में बनाया. और पूरी दुनिया में फैला दिया. पूरी दुनिया इसे मानती ज़रूर है लेकिन इसमें मॉडर्न नंबर्स के हिसाब से बहुत बड़ी गलती है.

रोमन नंबर्स. (सोर्स - विकिमीडिया)
रोमन नंबर्स. (सोर्स – विकिमीडिया)

इस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली नंबर रोमन थे. और रोमन नंबर्स में ज़ीरो नहीं था. इसलिए इसमें ज़ीरो ईयर(शून्य वर्ष) जैसा कुछ नहीं है.

1BC के बाद सीधे 1 AD शुरू हो जाता है. 31 दिसंबर 1 BC के बाद अगली तारीख 1 जनवरी 1 AD थी.

इतिहासकार ऐसा मानते हैं कि ईसा 3-4 BC में पैदा हुए.
इतिहासकार ऐसा मानते हैं कि ईसा 3-4 BC में पैदा हुए.

ज़ीरो ईयर के न होने से पूरा हिसाब गड़बड़ा गया है. अब समझते हैं कि दशकों का क्या हिसाब है? और इसमें क्या गड़बड़ है?

पहला दशक कब खत्म हुआ?

दशक की एक परिभाषा में कोई विवाद नहीं है. वो परिभाषा ये है कि एक दशक में दस साल होते हैं. अब शुरू से गिनती करते हैं.

जब हमें गिनती नहीं आती थी तो उंगलियों से ही गिनते थे. (सोर्स - विकिमीडिया)
जब हमें गिनती नहीं आती थी तो उंगलियों से ही गिनते थे. (सोर्स – विकिमीडिया)

जब 1 AD खत्म हुआ, तब एक साल पूरा हुआ. 2 AD पर दो साल पूरे हुए. 3 AD पर तीन. ऐसे ही जब 10 AD खत्म हुआ, तब दस साल पूरे हुए. पहला दशक पूरा हुआ.

अगले दशके के लिए दस और जोड़ना होगा. तो जब 20 AD खत्म हुआ, तब दस और साल पूरे हुए. दूसरा दशक पूरा हुआ. साफ अक्षरों में देख लीजिए –

1 AD से 10 AD तक पहला दशक.

11 AD से 20 AD तक दूसरा दशक.

ऐसे ही दस-दस जोड़ते जाने पर हम 2020 तक पहुंचेंगे. 2020 के खत्म होने पर 202वां दशक पूरा होगा. नए दशक की शुरुआत 1 जनवरी 2021 से होगी.

यही गड़बड़ हिसाब शताब्दी के पूरे होने में भी है. पहली शताब्दी तब पूरी हुई, जब 100 AD वर्ष खत्म हुआ. लेकिन दुनिया भूल गई. पूरी दुनिया ने 1801 की जगह साल 1800 को उन्नीसवीं सदी की शुरुआत मान लिया. और 1901 की जगह 1900.

पैरिस के आइफिल टावर में नए मिलेनियम का काउंटडाउन. पूरी दुनिया ने एक साल पहले ही नए मिलेनियम मान लिया. (सोर्स - विकिमीडिया)
पैरिस के आइफिल टावर में नए मिलेनियम का काउंटडाउन. पूरी दुनिया ने एक साल पहले ही नए मिलेनियम मान लिया. (सोर्स – विकिमीडिया)

सबसे बुरा तो तब हुआ तब साल 2000 को नए मिलेनियम(सहस्त्राब्दी) की शुरुआत मान लिया गया था. वैसे तब भी ज़ीरो ईयर पर बहस छिड़ी थी. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. बहस का फायदा हुआ होता तो 2020 को नए दशक की शुरुआत न माना जाता.

बताइए एक ज़ीरो ईयर के न होने से कितनी बड़े झूठ को सब सच मान रहे हैं. वैसे सारा खेल मानने और न मानने का है. आप मानते हैं तो कुछ है. नहीं तो नहीं है. सब माया है.


वीडियो – योगी आदित्यनाथ ने मैथ्स और विज्ञान को छोड़कर आध्यात्म को क्यों चुना ?

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