Submit your post

Follow Us

'न्यूड' को हटाकर जिसे इफ्फी की ओपनिंग फिल्म बनाया गया है उसके डायरेक्टर का इंटरव्यू

डायरेक्टर विनोद कापरी ने इसका जवाब भी दिया कि रवि जाधव की 'न्यूड' और ससिधरन की 'एस दुर्गा' के बारे में वो क्या सोचते हैं.

190
शेयर्स

गोवा में 20 नवंबर से इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) शुरू हो रहा है. 47 साल से हो रहे इस फेस्टिवल में देश-दुनिया की चुनिंदा फिल्में दिखाई जाती हैं. ज़्यादा इंतज़ार रहता है फेस्टिवल के ‘इंडियन पैनोरमा’ सेक्शन का. इसमें वो भारतीय फिल्में दिखाई जाती हैं जो कई मायनों में खास होती हैं. इस साल इंडियन पैनोरमा की शुरुआत रवि जाधव की फिल्म ‘न्यूड’ से होनी थी. लेकिन सरकार ने ज्यूरी का फैसला बदल दिया और अब ओपनिंग फिल्म होगी ‘पीहू.’ ये एक थ्रिलर है. इस पूरी फिल्म में सिर्फ एक पात्र है. वो है एक 2 साल की बच्ची जो घर पर अकेली है.

‘पीहू’ के डायरेक्टर हैं विनोद कापड़ी जो काफी टाइम पत्रकार रहे हैं. डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाते रहे हैं. 2014 में उन्होंने अपनी डॉक्यूमेंट्री I Can’t Take This Shit Anymore के लिए नेशनल अवॉर्ड जीता था. 2015 से वो फिल्में बना रहे हैं. उस साल उनकी पहली फीचर फिल्म ‘मिस टनकपुर हाज़िर हो’ आई थी. अब दूसरी फीचर ‘पीहू’ आने वाली है. दी लल्लनटॉप ने उनसे बात कीः

DNZApJ6UEAAda4O

#  ‘पीहू’ बनाने का आइडिया आपके दिमाग में कहां से आया?

विनोद – मैंने ये महसूस किया है कि जिस तरह के समाज में हम रहते हैं, उसमें अहंकार और ज़िद बहुत ज़्यादा घर कर चुका है. इसी वजह से हमारे रिश्ते बगड़ रहे हैं, परिवार बिखर रहे हैं. और जिन वजहों से रिश्ते बिगड़ते हैं और घर बिखरते हैं, वो बहुत छोटी होती हैं. लेकिन फिर भी हम उनके लिए अपना सब-कुछ बरबाद करने से नहीं हिचकते. इस चीज़ को मैंने अपने व्यक्तिगत जीवन में जिया है और भोगा है.

मेरा मानना था कि अगर हम बड़े लोगों (वयस्कों) को ये बात समझाने के लिए उन्हीं को किरदार बनाएंगे, तो उतना प्रभाव नहीं पड़ेगा. इसलिए ये कहानी मैं दो साल की बच्ची के नज़रिए से कहना चाहता था. मेरे लिए दो साल की पीहू जीवन का प्रतीक है.

किसी भी परिवार में जो कुछ होता है, उसका सबसे पहला असर बच्चों पर ही होता है. तो ये ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि जो कुछ भी हम कर रहे हैं, उसका असर हमारे बच्चों पर ज़रूर होगा. मेरी फिल्म आज के मध्यमवर्गीय समाज के जीने के तरीके पर टिप्पणी है.

‘पीहू’ के अलावा फिल्म में कोई दूसरा किरदार लेना इसलिए भी प्रासंगिक नहीं लगा क्योंकि इन अदृश्य किरदारों के लिए फैसलों का दंश हम पीहू को झेलते हुए देख ही लेते हैं.

# सिर्फ एक किरदार के साथ इस तरह की फिल्म बनाना काफी असामान्य बात है. जब आप यह आइडिया लेकर निर्माताओं के पास गए तो क्या सुनने को मिला?

विनोद – जब मैं फिल्म की कहानी लेकर निर्माताओं से मिला तो मुझे हर जगह यही सुनने को मिला कि ये प्रोजेक्ट असंभव है क्योंकि 2 साल की बच्ची से आप एक्टिंग करा ही नहीं सकते. अगर आपने ऐसा कर भी लिया, तो कोई भला क्यों थिएटर जाकर 1 घंटे 40 मिनट तक सिर्फ एक बच्ची को देखना चाहेगा? ये फिल्म होल्ड नहीं कर पाएगी ऑडियंस को.

'पीहू' के डायरेक्टर विनोद कापड़ी फिल्म में पीहू का किरदार निभाने वाली बच्ची के साथ
डायरेक्टर विनोद, पीहू का किरदार निभाने वाली बच्ची के साथ.

मैं काफी हतोत्साहित हुआ. लेकिन मुझे लगा कि अगर आपका स्क्रीनप्ले मज़बूत हो और आपकी स्टोरीटेलिंग में कोई दिक्कत न हो फिल्म बनाई जा सकती है. मैंने सोचा कि अगर शुरुआती 10-12 मिनट में दर्शकों को बच्ची से प्यार करना सिखा दिया जाए और जो आगे बच्ची के साथ होने वाला है, उससे उन्हें जोड़ दिया जाए तो बात बन सकती है. हर जगह से निराश होकर मैं अपने मरहूम दोस्त कृष्ण कुमार के पास गया. वो ये फिल्म बनाने के लिए तैयार हो गए लेकिन उनके पास केवल 47 लाख रुपए थे.

ये बजट कम था, लेकिन मेरी चिंता ये थी कि अगर मैंने और देर की तो पीहू के किरदार के लिए जो बच्ची मैंने चुनी है, वो बड़ी होने लगेगी. 3 की उम्र से बच्चों में चीज़ों को लेकर समझ विकसित होने लगती है. मैं पीहू का रोल एक ऐसी बच्ची से कराना चाहता था जो पूरी तरह मासूम हो. इसलिए मैंने इसी बजट में शूटिंग शुरू करने का फैसला लिया. मेरी टीम में कई लोगों ने कम बजट को देखते हुए अपनी फीस 50 से 70 फीसदी कम की और मुंबई से नोएडा आकर फिल्म का काम कराया.

# मेकिंग के दौरान या फिल्म पूरी करने के बाद क्या मुश्किलें आईं?

विनोद – फिल्म का पहला कट तैयार होने के बाद प्रोड्यूसर कृष्ण कुमार को हार्ट अटैक आ गया. उनका देहांत हो गया. ये हमारे लिए बड़ा सेटबैक था. तब फिल्म का काफी काम बाकी था – जैसे म्यूज़िक, साउंड डिज़ाइन, फाइनल एडिट वगैरह. लेकिन जब इन प्रोफेशनल्स ने फिल्म देखी तो वो काफी कम फीस पर काम करने को तैयार हो गए. इस तरह फिल्म पूरी हुई.

हमें लग रहा था कि जिस तरह का प्रयोग इसमें दिखाया गया है वो भारतीय दर्शकों को पहली बार में कुछ अटपटा लग सकता है. इसलिए हमने फिल्म को पहले फेस्टिवल सर्किट में दिखाने का फैसला लिया ताकि लोग इसके बारे में जान सकें. इसी दौरान हमें मालूम चला कि ‘पीहू’ IFFI में ओपनिंग फिल्म होनी वाली है. इससे हमें बड़ा बूस्ट मिला है. थिएटर में फिल्म रिलीज़ करने का हमारा रास्ता इससे काफी हद तक तय हो चुका है.

विनोद 'पीहू' से पहले 'मिस टनकपुर हाज़िर हो' बना चुके हैं
उससे पहले विनोद ने ‘मिस टनकपुर हाज़िर हो’ बनाई थी.

# आपके मुताबिक, ‘पीहू’ को भारतीय दर्शकों तक लाने के लिए आपको फेस्टिवल सर्किट के रास्ते आना पड़ा. भारतीय दर्शकों को किसी ट्रेनिंग की ज़रूरत है कि वो नए तरह के सिनेमा को सही से ले पाएं?

विनोद – आमतौर पर ये धारणा है कि हम अच्छी फिल्में दर्शकों को परोस नहीं रहे हैं. लेकिन जब अच्छी फिल्में दर्शक को परोसी भी जाती है, तब दर्शक ‘गोलमाल अगेन’ देखने चला जाता है. ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ और ‘गोलमाल अगेन’ साथ-साथ रिलीज़ हुई थीं. ‘गोलमाल अगेन’ से मुझे आपत्ति नहीं है, मनोरंजन भी होना ही चाहिए. लेकिन जब आपके सामने एक ईमानदार नीयत से बनाई एक बहुत ही हाई कॉन्टेंट वाली फिल्म हो, जिसमें एक बहुत बड़ा विषय भी है और दूसरी ओर ‘गोलमाल अगेन’, तब उनके कलेक्शन में भारी अंतर ध्यान खींचता है. कलेक्शन कामयाबी का पैमाना नहीं हो सकता, लेकिन अच्छी फिल्में चलेंगी नहीं तो नए निर्माता ऐसे विषयों को छुएंगे कैसे जिनकी समाज को ज़रूरत है.

# IFFI के इंडियन पैनोरमा में ‘पीहू’ ओपनिंग फिल्म बनाई गई रवि जाधव की ‘न्यूड’ को हटाकर. एक फिल्मकार की हैसियत से आप सरकार के इस फैसले को कैसे देखते हैं?

विनोद – मैंने उन दो फिल्मों (रवि जाधव की ‘न्यूड’ और ससिधरन की ‘एस दुर्गा’) के डायरेक्टर और सरकार दोनों के तर्कों को नहीं सुना है. लेकिन ये जो भी कुछ हो रहा है, बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. उन दो फिल्मों में काफी लोगों की मेहनत लगी है. लेकिन साथ ही साथ मैं ये भी कहना चाहूंगा कि अब हमें सारी नकारात्मकता को पीछे छोड़ देना चाहिए. जो 26 फिल्में IFFI में दिखाए जाने के लिए चुनी गई हैं, उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए. उनके पीछे भी बहुत लोगों ने मेहनत की है. ऐसी चीज़ें होती रहती हैं, इससे पीछे छोड़ देना चाहिए.

‘न्यूड’ का टीज़र:

# ‘पीहू’ का टीज़र आने के बाद इसकी थीम को हॉलीवुड फिल्म ‘होम अलोन’ से हो रही है जो एक बच्चे के घर पर अकेले रहकर कारनामे करने के बारे में है.

विनोद – ‘होम अलोन’ एक कॉमेडी फिल्म है. उसे देखकर आप खुश होते हैं. ‘पीहू’ ऐसी है ही नहीं. ये काफी डिस्टर्बिंग फिल्म है. जर्मनी में एक शो के दौरान एक कपल इस फिल्म को देखकर इतना विचलित हुआ कि आधे घंटे में बाहर चला गया. मैं जब सिनेमा हॉल से बाहर निकला, तब उन्होंने मुझसे कहा कि वो मेरी कला का सम्मान करते हैं लेकिन उनके लिए फिल्म देखना मुश्किल हो गया था क्योंकि उनकी भी एक बच्ची है. तुलना होती रहे, लेकिन दोनों फिल्मों में बहुत अंतर है.

# आप पत्रकार से पहले डॉक्यूमेंट्री मेकर बने और अब फिल्में बनाने लगे हैं. ये सफर कैसा रहा?

विनोद – स्टोरीटेलिंग के लिए पत्रकारिता ढेर सारा कच्चा माल मुहैया कराती है. दिन भर ढेर सारी खबरें आती हैं. इन खबरों में आपको ढेर सारी कहानियां मिलती है, उनके किरदार भी मिलते हैं. ‘पीहू’ दिल्ली में हुई एक सच्ची घटना पर ही आधारित है. मेरी आने वाली फिल्म भी एक सच्ची घटना पर ही आधारित है.

# आने वाले प्रोजेक्ट क्या हैं?

विनोद – एक डॉक्यूमेंट्री पर काम कर रहा था जिसे अब एक फिल्म की शक्ल में बनाया जाएगा. इसका नाम होगा ‘फ्रॉक’. इसमें भी एक बच्ची की कहानी होगी. इसे दृश्यम फिल्म्स प्रोड्यूस कर रही है. इसकी शूटिंग मार्च 2018 में शुरू होगी. एक प्रोजेक्ट पर सिद्धार्थ रॉय कपूर से भी बात चल रही है.

‘पीहू’ का टीज़रः

और पढ़ेंः
केजरीवाल खुद पर बनी इस फिल्म से ये पांच बातें सीख सकते हैं
पंजाबी गायकी का वो रॉकस्टार जिसके फैन्स दिलजीत दोसांझ और जैज़ी बी हैं
पद्मावती एक भुला दी जानी वाली फिल्म ही तो है
सरकार हमें ‘न्यूड’ फिल्म क्यों नहीं देखने देना चाहती?
बाहुबली के धांसू डायलॉग लिखने वाले मनोज मुंतशिर से लल्लनटॉप बातचीत

Irrfan Khan ने बताया हम कैसा रोमैंस खोजते हैं और वो मिलता नहींः

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

अमिताभ बच्चन तो ठीक हैं, दादा साहेब फाल्के के बारे में कितना जानते हो?

खुद पर है विश्वास तो आ जाओ मैदान में.

‘ताई तो कहती है, ऐसी लंबी-लंबी अंगुलियां चुडै़ल की होती हैं’

एक कहानी रोज़ में आज पढ़िए शिवानी की चन्नी.

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो कितना जानते हो उनको

मितरों! अच्छे नंबर चइये कि नइ चइये?

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

इस क्विज़ में परफेक्ट हो गए, तो कभी चालान नहीं कटेगा

बस 15 सवाल हैं मित्रों!

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

इंग्लैंड के सबसे बड़े पादरी ने कहा वो शर्मिंदा हैं. जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

KBC क्विज़: इन 15 सवालों का जवाब देकर बना था पहला करोड़पति, तुम भी खेलकर देखो

आज से KBC ग्यारहवां सीज़न शुरू हो रहा है. अगर इन सारे सवालों के जवाब सही दिए तो खुद को करोड़पति मान सकते हो बिंदास!

क्विज: अरविंद केजरीवाल के बारे में कितना जानते हैं आप?

अरविंद केजरीवाल के बारे में जानते हो, तो ये क्विज खेलो.

क्विज: कौन था वह इकलौता पाकिस्तानी जिसे भारत रत्न मिला?

प्रणब मुखर्जी को मिला भारत रत्न, ये क्विज जीत गए तो आपके क्विज रत्न बन जाने की गारंटी है.

ये क्विज़ बताएगा कि संसद में जो भी होता है, उसके कितने जानकार हैं आप?

लोकसभा और राज्यसभा के बारे में अपनी जानकारी चेक कर लीजिए.