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उस पादरी की कहानी जिसने 4 साल की लड़की से यौन शोषण किया?

आज की कहानी की शुरुआत करते हैं जनवरी 2019 से. जब एक रोज़ 27 साल की बेम को चर्च में नौकरी मिली. बेम अब चर्च के मुख्य पादरी ब्यूएनाकोसा की असिस्टेंट सेक्रेटरी थीं. इस नौकरी का एक बोनस भी था. बेम की चार बरस की बेटी उसी चर्च के कंपाउंड में बच्चों के लिए बने एक प्रीस्कूल में पढ़ती थी. अब वो दिनभर बेम की आंखों के सामने रहने वाली थी. बेम और उनके पति नोनॉई इस बात से बड़ी राहत महसूस कर रहे थे.

नौकरी जॉइन करने के बाद बेम की दिनचर्या सेट हो गई. उनकी बेटी सुबह 10 बजे तक स्कूल में रहती. वहां छुट्टी होने पर वो मां के पास उनके दफ़्तर में आ जाती. वहां कभी मां के मोबाइल से खेलती. कभी इधर-उधर दौड़ लगाती. ब्यूएनाकोसा, यानी चर्च के मुख्य पादरी को भी बच्ची से बहुत लगाव था. उन्होंने बच्ची को छुटपन से ही देखा था. बल्कि फादर ब्यूएनाकोसा ही थे, जिन्होंने उस बच्ची को बैपटाइज़ किया था. बैपटाइज़ करना, माने किसी को ईसाई धर्म में शामिल करना. ईसाई परिवारों में जब बच्चा बहुत छोटा होता है, तब ही उसे पादरी के हाथों बैपटाइज़ करवाने की परंपरा है.

फादर ब्यूएनाकोसा

फादर ब्यूएनाकोसा कई बार बेम से कहते, बच्ची को थोड़ा घुमाकर लाता हूं. फिर वो बच्ची को साथ लेकर अपने कमरे में चले जाते. वापस लौटते, तो बच्ची के हाथ में टॉफियां होतीं. टॉफी-चॉकलेट ज़्यादातर बच्चों की कमज़ोरी होते हैं. इस बच्ची को भी वो बहुत पसंद थे. लेकिन जाने क्या बात थी कि फादर ब्यूएनाकोसा के पास से लौटने के बाद कई बार वो अकेली बैठकर रोती मिलती. वजह पूछने पर कोई जवाब नहीं देती. कई बार ऐसा भी होता कि फादर ब्यूएनाकोसा को आसपास देखकर वो घबराने लगती. बेम को लगता, फादर बच्चों के साथ मस्ती-मज़ाक करते हैं. इसीलिए शायद बच्ची थोड़ा हिचकती हो.

फिर आई 22 फरवरी, 2019. बेम को नौकरी करते हुए करीब दो महीने होने वाले थे. शुक्रवार का दिन था. दफ़्तर से लौटकर शाम के समय बेम अपनी बिटिया को नहला रही थीं. अचानक उनकी नज़र पड़ी और वो समझ गईं, किसी ने बच्ची के साथ ग़लत हरकत की है. उन्होंने बच्ची से पूछा कि क्या किसी ने उसे छुआ है. बच्ची रोने लगी. पहले तो उसने कोई जवाब नहीं दिया. फिर बहुत समझाने और फुसलाने के बाद बच्ची ने सुबकते हुए नाम लिया- फादर ब्यूएनाकोसा.

बेम की चार बरस की बच्ची एक पादरी की शैतानियत का शिकार हुई थी.

ये मामला है कहां का? प्रशांत महासागर के पश्चिमी हिस्से में बसा एक द्वीपीय देश है- फिलिपीन्स. भारत से पूरब की तरफ आगे बढ़ेंगे, तो थाइलैंड, कंबोडिया और वियतनाम पार करने के बाद आएगा फिलिपीन्स. करीब 10 करोड़ की आबादी में 90 फीसद से ज़्यादा लोग ईसाई हैं यहां. एशिया में सबसे बड़ा और दुनिया में पांचवें नंबर का क्रिश्चन देश है फिलिपीन्स. बहुतायत लोग रोमन कैथलिक चर्च को मानते हैं. फिलिपीन्स में जनता का दिल जीतने का रास्ता चर्च से होकर जाता है. धार्मिक लीडरों का सपोर्ट पाने के लिए नेताओं में होड़ लगी रहती है.

Philippines
लाल घेरे में फिलिपीन्स (स्क्रीनशॉट: गूगल मैप्स)

ज़ाहिर है, जो लीडर चर्च से समर्थन पाकर सत्ता में आएगा वो चर्च के खिलाफ़ जाने की हिमाकत तो कभी नहीं करेगा. फिर चाहे मामला चर्च के लोगों द्वारा किए जा रहे यौन शोषण जितना गंभीर क्यों न हो. बीते दशकों में कितनी बार ही ऐसे शोषण के मामले सामने आए. जिस किसी ने भी न्याय पाने की कोशिश की, वो अकेला पड़ गया. समाज का बहिष्कार. चर्च की धमकियां. चर्च सपोर्टर्स की आक्रामकता. सिस्टम की उदासीनता. चर्च पर नर्म न्यायपालिका. ऐसे में आप कैसे लेंगे न्याय?

ब्यूएनाकोसा के खिलाफ़ लड़ते तो लड़ते कैसे?

22 फरवरी, 2019 की उस शाम बेम के आगे भी यही सवाल थे. उन्हें लगा, उनके पांव के नीचे की ज़मीन खिसक गई है. उस रात न वो सो पाईं और न अपने पति से ही इस बारे में कुछ कह पाईं. अगली सुबह ब्यूएनाकोसा का सामना करने के इरादे से बेम बच्ची को साथ लेकर दफ़्तर पहुंचीं. उन्होंने ब्यूएनाकोसा को घेरा, मगर वो ख़ुद को निर्दोष बताता रहा.

चर्च में बेम और ब्यूएनाकोसा के बीच जो बहस हुई, उसे वहां मौजूद कुछ और लोगों ने भी देखा. इनमें एक पुलिस अधिकारी भी था. उसने काडिज़ सिटी के चीफ पुलिस इंस्पेक्टर बर्ट मैनस्यूटो तक ख़बर पहुंचाई. बर्ट ने तत्काल कुछ पुलिसवालों को चर्च भेजा. सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में बेम और उनकी बच्ची का बयान लिया गया. बच्ची ने बताया कि ब्यूएनाकोसा उसके साथ क्या-क्या करता था. बच्ची के मुताबिक, ऐसा कई बार हुआ. बच्ची के बयान कन्सिस्टेंट थे. कई बार पूछने पर भी वो वही चीजें बता रही थी. ऐसे में पुलिस ने तफ़्तीश शुरू करने का फैसला किया. बच्ची की मेडिकल जांच हुई. बच्ची के साथ यौन शोषण होने की बात कन्फर्म हुई.

ब्यूएनाकोसा पर लगे आरोपों की ख़बर चर्च के बड़े अधिकारियों तक भी पहुंची. उन्होंने एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई. ब्यूएनाकोसा से अस्थायी तौर पर चर्च का कामकाज वापस ले लिया गया. चीजें आगे बढ़ तो रही थीं, मगर अब भी कई सारी दिक्कतें थीं. एक तो ये कि चर्च आने वाले कई लोग ब्यूएनाकोसा के पक्ष में खड़े हो गए थे. वो पादरी को निर्दोष बता रहे थे. इस वजह से बेम और उनके परिवार पर दबाव बढ़ रहा था. दूसरी परेशानी थी, केस लड़ने की. फिलिपीन्स में आपको कोई सरकारी वकील नहीं मिलता. ख़ुद वकील रखना होता है. बेम फैमिली के पास प्राइवेट वकील रखने के पैसे नहीं थे. जबकि आरोपी ब्यूएनाकोसा को बचाने के लिए तीन वकीलों की टीम थी.

राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते क्यों सामने आए?

ऐसे में एक उम्मीद आई मार्च 2019 में. ये उम्मीद आई एक लीडर की तरफ से. वो लीडर, जो बेहूदी बातें करने के लिए कुख़्यात है. वो लीडर, जिसने एक बार अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को ‘वेश्या का बेटा’ कहा था. वो लीडर, जिसने एक बार एक रेप सर्वाइवर के लिए कहा था कि वो इतनी सुंदर थी, काश उसका बलात्कार सबसे पहले मैंने किया होता.

Rodrigo Duterte
फिलिपीन्स के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते (फोटो: एपी)

किसकी बात कर रहे हैं हम? हम बात कर रहे हैं फिलिपीन्स के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की. राष्ट्रपति दुतेर्ते की चर्च से लड़ाई थी. लड़ाई की वजह थी, ड्रग्स के कारोबार पर राष्ट्रपति की सख़्ती. दुतेर्ते ने सत्ता संभालने के बाद ड्रग्स कारोबार के खिलाफ जंग छेड़ दी. करीब 27 हज़ार लोग मारे गए. इनमें कई निर्दोष भी थे, कई कम उम्र के बच्चे भी थे. दुतेर्ते की क्रूरता के खिलाफ उठी आवाज़ों में चर्च भी शामिल था. इसी को लेकर दोनों में ठन गई. दुतेर्ते पहले राष्ट्रपति थे फिलिपीन्स के, जिन्होंने चर्च के साथ कोई करीबी नहीं दिखाई थी. वो खुलेआम पादरियों को गालियां देते थे. कहते थे, उन्हें पादरियों से चिढ़ है. इस चिढ़ की एक वजह दुतेर्ते के बचपन से भी जुड़ी थी. दुतेर्ते के मुताबिक, जब वो छोटे थे तो एक पादरी ने उनका शोषण किया था.

राष्ट्रपति और चर्च की ये रार बेम और उनकी बच्ची के लिए उम्मीद जगाने की बड़ी वजह बनी. मार्च 2019 में बेम को पता चला कि दुतेर्ते चुनाव प्रचार के लिए पास के एक शहर में आ रहे हैं. बेम और उनके पति नोनॉई एक चिट्ठी में अपनी अपील लिखकर दुतेर्ते से मिलने उनकी चुनावी रैली में पहुंचे. वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों को अपनी आपबीती सुनाई. उनमें से ही किसी अधिकारी का दिल पिघला और उसने उन्हें दुतेर्ते से मिलवाया. उनकी कहानी सुनकर दुतेर्ते ने पादरियों को गरियाते हुए कहा-

तुम लोग चिंता मत करो. मैं करूंगा तुम्हारी मदद.

कोरोना के कारण सुनवाई टली?

बेम और नोनॉई के लिए ये बहुत उम्मीद बंधाने वाला आश्वासन था. दुतेर्ते ने अपने जस्टिस डिपार्टमेंट से इस केस को सुपरवाइज़ करने का निर्देश दिया. डिपार्टमेंट ने ये केस लड़ने के लिए एक सरकारी वकील की नियुक्ति की. अब शुरू हुआ असली खेल. फिलिपीन्स में राष्ट्रपति भले आपको न्याय का आश्वासन दे, मगर इसका मतलब ये नहीं कि चर्च के खिलाफ आपको बढ़त मिल गई. अभी कई चुनौतियां बाकी थीं. ऐसी चुनौतियां, जिसमें बचाव पक्ष उस चार साल की बच्ची का चरित्रहनन करने वाला था. उसके उठने-बैठने के तरीके पर उंगली उठाने वाला था. कहने वाले थे कि बच्ची ऐसे बैठती थी कि उसकी जांघें नज़र आती थीं. आरोपी पादरी कोर्ट में गवाही देने वाला था कि बच्ची का परिवार झूठ बोल रहा है. पादरी को फंसा रहा है. चर्च के वो अधिकारी, जो शुरू में ब्यूएनाकोसा को लानतें दे रहे थे, वो भी चर्च की प्रतिष्ठा के नाम पर उसके साथ हो जाने वाले थे.

कोर्ट की तारीख़ों पर वो परिवार अदालत में अकेला होता. और ब्यूएनाकोसा अपने समर्थकों की भीड़ लेकर आता. समाज ने भी जैसे बच्ची के परिवार का बहिष्कार कर दिया. सोसायटी के लोग अपने बच्चों को उस बच्ची के साथ नहीं खेलने देते. कोई उससे बात नहीं करता था. बेम और नोनॉई को भी कोई अपने घर नहीं बुलाता था. लेकिन बेम और नोनॉई ने हार नहीं मानी. वो संघर्ष करते रहे. आख़िरकार सितंबर 2019 में बच्ची ने अदालत में आकर गवाही दी. उसने जजों के सामने आरोपी की पहचान की. अप्रैल-मई 2020 तक इस केस में दोनों पक्षों की ओर से गवाही देने की प्रक्रिया पूरी हो जानी थी. मगर कोरोना के कारण ऐसा नहीं हो सका. इस केस में अगली सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए टल गई है. कोर्ट के पास बच्ची का बयान है. मेडिकल रिपोर्ट जैसे सबूत हैं. लेकिन तब भी ये निश्चित नहीं कि फैसला बच्ची के हक़ में आए. क्योंकि ऐसे मामलों में पादरियों पर नरमी का लंबा इतिहास रहा है.

लंबा इतिहास है

ऐसा ही लंबा इतिहास पादरियों द्वारा किए जाने वाले यौन शोषणों का भी है. इनमें ‘पिडोफिलिया’ के केस काफी ज़्यादा हैं. पिडोफिलिया, माने ऐसी मानसिक बीमारी जिसमें छोटे बच्चों के लिए यौन उत्तेजना महसूस होती है. अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया, हर जगह पादरियों पर यौन शोषण के आरोप हैं. ये कितना बड़ा मामला है, ये समझने के लिए आप कुछ सैंपल ख़बरें देखिए-

1. जनवरी 2002: ‘बोस्टन ग्लोब’ की एक रिपोर्ट आई. इसके मुताबिक, बोस्टन के डेढ़ हज़ार पादरियों में से करीब 70 ने बच्चों का यौन शोषण किया था.

2. जून 2018: वैटिकन के एक पूर्व आला अधिकारी को चाइल्ड पॉर्नोग्रफी के केस में पांच साल की सज़ा.

3. जुलाई 2018: ऑस्ट्रेलियन आर्कबिशप फिलिप विल्सन का इस्तीफ़ा. पादरियों द्वारा बच्चों के यौन शोषण के मामले दबाने में दोषी पाया गया.

Archbishop Philip Wilson
ऑस्ट्रेलियन आर्कबिशप फिलिप विल्सन यौन शोषण के मामले को दबाने का दोषी पाया गया. (स्क्रीनशॉट: बीबीसी न्यूज़)

4. अगस्त 2018: पेन्सिलविनिया ग्रैंड जूरी द्वारा 1,400 पन्नों की रिपोर्ट के मुताबिक, 300 पादरियों ने हज़ार से ज़्यादा बच्चों का यौन शोषण किया.

5. फरवरी 2019: UN ने अपनी एक रिपोर्ट में इटली की आलोचना की. किसलिए की? क्योंकि वहां चर्च के लोगों द्वारा सैकड़ों बच्चे यौन शोषण के शिकार हुए थे. मगर इन मामलों में हुई जांच और अदालती कार्रवाई की संख्या बेहद कम थी.

6. मार्च 2019: ऑस्ट्रेलिया के बड़े पादरी जॉर्ज पेल को छह साल जेल की सज़ा हुई. जॉर्ज ने दो बच्चों को मॉलेस्ट किया था. जॉर्ज पोप फ्रांसिस का सलाहकार और वैटिकन का खजांची भी था.

7. नवंबर 2019: अर्जेंटीना के दो पादरियों को 40 साल जेल की सज़ा हुई. इन्होंने चर्च के एक स्कूल में विकलांग बच्चों का यौन शोषण किया था.

8. मार्च 2020: फ्रांस की एक कोर्ट ने 74 साल के पादरी को पांच साल जेल की सज़ा सुनाई. इस पादरी ने तीन दशकों के भीतर दर्ज़नों बच्चों का यौन शोषण किया.

ये सारे केस सिर्फ़ सैंपल हैं. पादरियों द्वारा किए जाने वाले यौन शोषण के मामलों का दशमलव हिस्सा. असली तस्वीर बहुत ज़्यादा बड़ी और डरावनी है. ऐसे मामलों पर नज़र रखने वाली एक संस्था है- बिशप अकांउटिबिलिटी ऑर्गनाइज़ेशन. इसने पाया कि नवंबर 2019 तक करीब साढ़े छह हज़ार पादरियों और कैथलिक स्कूलों के अधिकारियों पर यौन शोषण के आरोप थे. इतनी बड़ी संख्या भी इस मामले का छोटा सा ही पक्ष है. इसलिए कि ज़्यादातर मामले रिपोर्ट ही नहीं होते. बहुत सारे ऐसे केस भी हैं, जिन्हें चर्च दबा देता है. कभी डरा-धमकाकर. कभी पैसा खिलाकर. ‘वॉक्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2001 से 2010 के बीच कैथलिक चर्च ने ऐसे मामलों में करीब तीन बिलियन डॉलर यानी साढ़े 22 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए.

पोप फ्रांसिस का रुख क्या है?

अगस्त 2018 में पोप फ्रांसिस ने चर्च के लोगों द्वारा किए जाने वाले बच्चों के यौन शोषण की आलोचना की थी. उन्होंने ‘टू द पीपल ऑफ गॉड’ नाम से एक चिट्ठी जारी की. इसमें इस तरह के शोषण को ख़त्म करने की अपील की गई थी. साथ ही, चर्च के लोगों द्वारा किए गए अपराध पर मुआफ़ी भी मांगी पोप ने. पोप ने कहा, वो पीड़ितों के साथ हैं. पोप ने दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया. मगर जानकार कहते हैं कि इन आश्वासनों के बावजूद चर्च ईमानदार नहीं है. वो पादरियों पर लग रहे आरोपों की संख्या बताने में पारदर्शिता नहीं बरत रहा.

Pope Francis
पोप फ्रांसिस (फोटो: एपी)

फरवरी 2019 में एक इटैलियन अख़बार द्वारा पब्लिश रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे मामलों में अब भी गोपनीयता बरती जा रही है. ‘कॉन्फिडेन्शिएलिटी’ के नाम पर आरोपियों के नाम छुपाए जा रहे हैं. वैटिकन के जो अधिकारी इन मामलों पर बोलते हैं, उनके बर्खास्त होने का जोखिम रहता है. पीड़ित और उनके परिवार वैटिकन क़ानूनों में बड़े स्तर पर सुधार चाहते हैं. वो चाहते हैं, चर्च आरोपियों का बचाव करना छोड़े. अपनी कार्रवाई में पारदर्शिता और अकाउंटिबिलिटी लाए. जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक बेम की बेटी और उसके जैसे हज़ारों बच्चे धर्म की आड़ में छुपे ढोंगी पादरियों का शिकार होते रहेंगे. जो चर्च ख़ुद धर्म की राह न चल सके, वो अपने करोड़ों अनुयायियों को क्या रास्ता दिखाएगा?


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