Submit your post

रोजाना लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

Follow Us

इंडियन फुटबॉल टीम जूते नहीं, किसी और कारण के चलते 1950 के वर्ल्ड कप में शरीक नहीं हो पाई

502
शेयर्स

फाइट क्लब का एक डायलॉग है – अगर आपके पास खोने को कुछ नहीं है तो आप कुछ भी करने के लिए आज़ाद हो.

ये ‘कुछ भी करने के लिए आज़ाद’ होना क्या होता है, शायद ये 1948 के ओलंपिक्स में जाने वाली भारतीय फुटबॉल टीम हमें अच्छे से बता सकती है.

देश नया-नया आज़ाद हुआ था. भारत ने लंदन में होने वाले 1948 के ओलंपिक्स में क्वालीफाई कर लिया था. होने को क्वालिफाइंग राउंड में भारत ने एक भी मैच नहीं खेला था, लेकिन चूंकि बाकी विपक्षी टीमों ने क्वालिफाइंग राउंड में भाग ही नहीं लिया था इसलिए भारत को वॉक ओवर मिल गया था. मगर एआईएफएफ के पास फ़ीफ़ा को मेम्बरशिप फीस देने के लिए पैसा ही नहीं था.

एआईएफएफ - ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (भारत की ऑफिशियल फुटबॉल अथॉरिटी)

फ़ीफ़ा - फेडरेशन इंटरनेशनल डी फुटबॉल एसोसिएशन (विश्व की ऑफिशियल फुटबॉल अथॉरिटी)

मेम्बरशिप फीस न देने का अर्थ होता वर्ल्ड फ़ुटबाल एसोसिएशन का हिस्सा न होना. आसान शब्दों में कहें तो इसके चलते भारत को ओलंपिक में खेलने से रोका जा सकता था.

भारत की फुटबॉल टीम की विश्व भर के टीमों के बीच रेंक.
भारत की फुटबॉल टीम की विश्व भर के टीमों के बीच रेंक.

इस बात का खतरा भांपते हुए, आनन फानन में एआईएफएफ ने फ़ीफ़ा और ओलिंपिक एसोसिएशन से बातचीत का दौर शुरू किया. भारत के ओलंपिक्स में खेलने देने की इजाज़त मिल गई. यूं भारत की फुटबॉल टीम ओलंपिक्स शुरू होने के एक हफ़्ते बाद लंदन पहुंची.

भारत ने अपना पहला और एकमात्र नॉकआउट मैच फ्रांस के साथ खेला. ऑन पेपर्स ये मैच ऐसा ही था जैसे भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच का क्रिकेट मैच. बताने की आवश्यकता नहीं है कि अबकी ‘भारत’ कौन था और ‘ऑस्ट्रेलिया’ कौन था.

और यूं, इस मैच में भारत से जीतने की उम्मीद लगाना तो दूर लोग इस बात पर शर्तें लगा रहे थे कि फ्रांस, इंडिया को दस से ज़्यादा गोलों से हरा पाएगा या नहीं. लेकिन फ़्रांस को पहला गोल करने में ही पसीने छूट गए. साथ ही इस एक गोल के बाद फ़्रांस दूसरा कोई गोल कर पाने में सफल नहीं हो पा रहा था. अगर ये एक बहुत बड़ा सरप्राइज़ था तो ‘वाव मोमेंट’ आना तो अभी भी बाकी था. भारत के फॉरवर्ड खिलाड़ी सारंगापानी रमन ने फ़्रांस के गोलकीपर को छकाते हुए मैच में वापसी कर ली. स्कोर – भारत: 1 / फ्रांस: 1

इसके बाद मैच में कई ऐसे मोड़ आए जब भारत अगले राउंड के लिए क्वालीफाई कर सकता था. लेकिन नंगे पैर खेल रही भारतीय फुटबॉल टीम का स्टेमिना नब्बे मिनट तक खेलते-खेलते जवाब देने लगा और मैच अंत के कुछ मिनटों में 2-1 से फ्रांस के पक्ष में चला गया.

आज़ाद भारत का ये पहला ही अंतराष्ट्रीय मैच ‘अंडरडॉग’ भारत के लिए उम्मीदों की एक नई खेप लेकर आया.

भारत की घुड़सवार सेना, फ़्रांस में फुटबाल खेलते हुए. उस दौर में भारत में फुटबॉल का कितना क्रेज़ था, वो इस फोटो में दिखता है. (फोटो: ब्रिटिश लाइब्रेरी)
भारत की घुड़सवार सेना, फ़्रांस में फुटबाल खेलते हुए. उस दौर में भारत में फुटबॉल का कितना क्रेज़ था, वो इस फोटो में दिखता है. (फोटो: ब्रिटिश लाइब्रेरी)

इसके दो साल बाद यानी 1950 में भी लगभग यही सब हुआ. लेकिन 1950 की घटना का ‘क्लाइमेक्स’ इतना उम्मीदों भरा नहीं हुआ जितना 1948 वाली. बल्कि अगर ये कहा जाए कि 1950 में जो सब हुआ उसी के चलते भारत आज फुटबॉल में 97वें स्थान पर है तो ग़लत न होगा.

भारत ने ठीक 1948 के ओलंपिक्स की तरह ही बिना एक भी मैच खेले 1950 के फुटबॉल वर्ल्ड कप में भी क्वालीफाई कर लिया था. उधर जब फ़ीफ़ा ने भारत को ओलंपिक्स में नंगे पैर खेलते हुए देखा तो पहले ही आगाह कर दिया कि वो भारत को इस वर्ल्ड कप में नंगे पैर खेलने की इजाज़त नहीं देगा.

लेकिन भारत की तरफ से इसके विरोध या समर्थन में कोई जवाब नहीं आया. वैसे भी 1948 में भी सारे खिलाड़ी नंगे पैर नहीं खेल रहे थे. साथ ही फ्रांस से हुए मैच से पहले वॉर्म अप मैचों में भी भारत ने बारिश होने की दशा में जूते पहन के मैच खेले थे.

फिर भी 1950 के वर्ल्ड कप में भारत और स्कॉटलैंड दो ऐसे देश बने जो खेलने नहीं पहुंचे.

अगर भारत वर्ल्ड कप खेलती तो टीम यही होती. (फोटो: बोल्डमेरे सेंट माईकलेस)
अगर भारत वर्ल्ड कप खेलती तो टीम यही होती. (फोटो: बोल्डमेरे सेंट माईकलेस)

यानी बेशक ये कहना गलत होगा कि भारत ने जूतों के चक्कर में इस वर्ल्ड कप में भाग नहीं लिया लेकिन कोई न कोई कारण तो रहा होगा कि भारत ने इतना बड़ा इवेंट मिस कर दिया.
असल में कारण एक नहीं कई थे.


# यात्रा से दिक्कत –

ये एक बड़ा संयोग था कि जिस देश के साथ भारत ने अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेला था (फ़्रांस), ने भी इस वर्ल्ड कप में क्वालीफाई करने के बावज़ूद खेलने से इंकार कर दिया. उन्हें दिक्कत ट्रैवलिंग से थी.

भारत ने बेशक किसी ऑफिशियल बयान में तो ऐसा नहीं कहा लेकिन साउथ अमेरिका तक यात्रा करना भारत के लिए भी एक बहुत बड़ा मुद्दा था. दूरी के हिसाब से भी कहा जाए तो फ़्रांस के मुकाबले दुगना बड़ा मुद्दा.


# लज्जा –

नए नए आज़ाद हुए और कुछ ही साल पहले दूसरे विश्व युद्ध की मार झेल चुके देश के लिए किसी खेल इवेंट में हिस्सा लेना एक ‘लग्ज़री’ सरीखा होता. जिसका देश के अंदर और बाहर हर जगह विरोध किया जाता कि भारत की आधी आबादी भूख से मर रही है और ये पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर फुटबॉल खेलने जा रहे हैं. तो इसी शर्म के चलते. लेकिन ये इसलिए इतना बड़ा मुद्दा नहीं लगता क्यूंकि उससे दो साल पहले टीम ओलंपिक्स में भी गई थी.


# वर्ल्ड कप को सीरियसली न लेना –

दूसरे मुद्दे को थोड़ी और विस्तार दिया जाए तो भारत में उन दिनों ओलंपिक्स को जितना सीरियसली लिया जाता था उसके मुकाबले फुटबॉल वर्ल्ड कप ऐसा ही था जैसे आजकल क्रिकेट में आईसीसी वर्ल्ड कप के मुकाबले रणजी. तो जहां शर्म ओलंपिक्स में जाने से नहीं रोक पाई वहीं इस शर्म फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप के साथ कोई ब्रेक इवन पॉइंट नहीं बन रहा था. मतलब ये कि फुटबॉल वर्ल्ड कप संबंधित भारतीय संस्था के लिए ‘उतना बड़ा’ इवेंट नहीं था.

स्पोर्ट्स इल्यूसट्रेटेड नामक मैगजीन में ‘बेयरफुट’ यानी नंगे पैर नाम के एक लेख के लिए अरिंदम बासु ने जब उस वक्त के कैप्टन मन्ना का इंटरव्यू लिया था तो मन्ना ने कहा – हमें तब वर्ल्ड कप के बारे में कोई आईडिया नहीं था. अगर हमें अच्छे से बताया जाता तो हम खुद से ही पहल करते. हमारे लिए तो ओलंपिक्स की सब कुछ था.

नंगे पैरों खेलना पसंद करती थी इंडिया. मगर बारिश में जुटे पहनने में उसे कोई दिक्कत न थी.
नंगे पैरों खेलना पसंद करती थी इंडिया. मगर बारिश में जूते पहनने में उसे कोई दिक्कत न थी.

होने को सच में भी फुटबॉल वर्ल्ड कप को उस वक्त इतना बड़ा इवेंट नहीं माना जाता था. ख़ास तौर पर एशिया में, जहां की बाकी सारी टीमों ने तो क्वालिफाइंग मैच खेलने से ही मना कर दिया था, जिसके चलते ही भारत को वॉक ओवर मिला.


# पैसा –

पैसे की कमी भी एक बड़ा मुद्दा हो सकती थी, ख़ास तौर पर दुनिया के दूसरे छोर में ट्रेवल करने के वास्ते. लेकिन फ़ीफ़ा ने भारत को ऑफर किया कि भारतीय टीम का खर्चा वो उठाएगी. फ़ीफ़ा ने भारत को ये ऑफर इसलिए दिया क्यूंकि भारत एकमात्र एशियन टीम थी जो क्वालीफाई कर पाई थी. और फ़ीफ़ा के पास फुटबॉल को एशिया में प्रचारित का एक मात्र विकल्प भारत ही था.

1948 की ओलंपिक्स की इंडियन टीम फ़्रांस के साथ चल रहे खेल के दौरान (फोटो: स्पोर्ट्स कीड़ा)
1948 की ओलंपिक्स की इंडियन टीम फ़्रांस के साथ चल रहे खेल के दौरान (फोटो: स्पोर्ट्स कीड़ा)

फ़ीफ़ा के इस ऑफर के बावज़ूद भी इंडिया को काफी सारे और पैसों की ज़रूरत पड़ती. तो पैसा भी बेशक अकेला कारण न हो मगर इसने बाकी सारे कारणों के साथ मिलकर जाने की संभावना को और क्षीण कर दिया.


# एक और लज्जा –

भारतीय टीम इतने दूर वहां जाती और बुरी तरह हार के आ जाती तो पूरी दुनिया के सामने भारत की बेइज्जती होती. 1948 में भारत के पास खोने के लिए कुछ नहीं था, लेकिन 1950 में वो स्थिति नहीं रही थी.


# ऑफिशियल कारण –

एआईएफएफ ने एक प्रेस रिलीज़ में ब्राज़ील न जाने का कारण – कम प्रैक्टिस टाइम का मिलना और टीम के सेलेक्शन में सहमति न बन पाना बताया.


यानी एआईएफएफ ने जो कारण बताया वो ‘जूते वाले’ और ऊपर बताए गए बाकी सारे कारणों से कहीं हास्यास्पद लगता है. हां मगर बाकी सारे कारणों के साथ मिलकर ये कारण भी ब्राज़ील न जाने के लिए पर्याप्त और जेन्युइन था.

एक इंटरव्यू के दौरान किसी क्रिकेटर ने कहा था कि भारत में क्रिकेट को नहीं सफलताओं को सेलिब्रेट किया जाता है. अगर क्रिकेट को सेलिब्रेट किया जाता होता भारत में रणजी ट्रॉफी की इतनी दयनीय स्थिति नहीं होती. 1983 क्रिकेट वर्ल्ड कप में जीत के चलते भारत में जो बूस्ट क्रिकेट को मिला वही, 1950 के फुटबॉल वर्ल्ड कप से मिल सकता था.

कैप्टन सेलेन मन्ना
कैप्टन सेलेन मन्ना

मन्ना भी कहते हैं कि अगर भारत ने उस वर्ल्ड कम में भाग ले लिया होता आज भारत की फुटबॉल में कुछ और ही धाक होती.

चलिए कोई बात नहीं. 14 जून के फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप शुरू होने वाला है, पिछली बार जर्मनी जीती थी. अबकी बार बिना ‘इंडिया’ के भी खेल में भारत नज़र रखेगा ही. हां आगे कभी भारत ने क्वालीफाई किया तो माहौल किस्सा होगा वो सोचकर ही रोंगटे खड़े होते हैं.


 

ये भी पढ़ें:

सुना था कि सायनाइड का टेस्ट किसी को नहीं पता, हम बताते हैं न!
क्या होता है रुपए का गिरना जो आपको कभी फायदा कभी नुकसान पहुंचाता है
जब हादसे में ब्लैक बॉक्स बच जाता है, तो पूरा प्लेन उसी मैटेरियल का क्यों नहीं बनाते?
प्लेसीबो-इफ़ेक्ट: जिसके चलते डॉक्टर्स मरीज़ों को टॉफी देते हैं, और मरीज़ स्वस्थ हो जाते हैं
रोज़ खबरों में रहता है .35 बोर, .303 कैलिबर, 9 एमएम, कभी सोचा इनका मतलब क्या होता है?
उम्र कैद में 14 साल, 20 साल, 30 साल की सज़ा क्यूं होती है, उम्र भर की क्यूं नहीं?
प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से पहले उसके नीचे लिखा नंबर देख लीजिए
हाइपर-लूप: बुलेट ट्रेन से दोगुनी स्पीड से चलती है ये
ATM में उल्टा पिन डालने से क्या होता है?


Video देखें:

पंक्चर बनाने वाले ने कैसे खरीदी डेढ़ करोड़ की जगुआर, 16 लाख रुपए की नंबर प्लेट?

लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
Did India refused to play FIFA world cup 1950 in Brazil even after qualifying as he was not allowed to play football barefoot?

कौन हो तुम

राजेश खन्ना ने किस हीरो के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीता था?

राजेश खन्ना के कितने बड़े फैन हो, ये क्विज खेलो तो पता चलेगा.

QUIZ: आएगा मजा अब सवालात का, प्रियंका चोपड़ा से मुलाकात का

प्रियंका की पहली हिंदी फिल्म कौन सी थी?

कौन है जो राहुल गांधी से जुड़े हर सवाल का जवाब जानता है?

क्विज है राहुल गांधी पर. आगे कुछ न बताएंगे. खेलो तो बताएं.

Quiz: संजय दत्त के कान उमेठने वाले सुनील दत्त के बारे में कितना जानते हो?

जिन्होंने अपनी फ़िल्मी मां से रियल लाइफ में शादी कर ली.

क्विज़: योगी आदित्यनाथ के पास कितने लाइसेंसी असलहे हैं?

योगी आदित्यनाथ के बारे में जानते हो, तो आओ ये क्विज़ खेलो.

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

आज जानते हो किसका हैप्पी बड्डे है? माधुरी दीक्षित का. अपन आपका फैन मीटर जांचेंगे. ये क्विज खेलो.

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 31 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.

सुखदेव,राजगुरु और भगत सिंह पर नाज़ तो है लेकिन ज्ञान कितना है?

आज तीनों क्रांतिकारियों का शहीदी दिवस है.

आमिर पर अगर ये क्विज़ नहीं खेला तो डुगना लगान देना परेगा

म्हारा आमिर, सारुक-सलमान से कम है के?