Submit your post

रोजाना लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

Follow Us

पद्मावती को लेकर बाबा देवकीनंदन ने बेहद घटिया बात बोली है

6.16 K
शेयर्स

कुछ तथ्य.
ये एक ‘संत’ का वीडियो है.
ये उनके फेसबुक पेज पर डाला गया है.
इसे 26 नवंबर 2017 की रात 8.32 तक 33 लाख से ज़्यादा लोग देख चुके हैं.
इसपर एक लाख सात हज़ार से ज़्यादा लाइक्स हैं.
ये 65,538 बार शेयर हुआ है और पांच हज़ार से ज्यादा कमेंट्स हैं.
ये वीडियो उन बेशुमार मूर्खताओं में से एक है, जो मौजूदा भारत की ऐसी-तैसी किए दे रहा है.

आख़िरी बात पर मतभेद हो सकता है कि ये तथ्य है या हमारी निजी राय. बहरहाल हमें तो लगता है ऊपर लिखे तथ्यों में समय के साथ भले ही बदलाव आ जाए लेकिन अंतिम बात कतई अकाट्य तथ्य है. इन जैसे बाबाओं के रहते भारत में न तो आपसी भाईचारे का पौधा पनप सकता है, न इस मुल्क से कभी धर्म से ट्रिगर होनेवाली मूर्खताओं को तड़ीपार किया जा सकता है.

पहले वीडियो देख लीजिए फिर बात करते हैं.

इन जनाब का नाम देवकीनंदन ठाकुर हैं. इनका विकिपीडिया पेज कहता है कि भगवतगीता का पाठ करनेवाले वक्ता हैं. विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक हैं. प्रवचनकार हैं. संत हैं. जो कहीं नहीं लिखा है वो ये कि नफरत के सौदागर हैं. इस्लामोफोबिक हैं. वैसे वाले गडरिए हैं, जो अपने पीछे चलनेवाली तमाम भेड़ों को गड्ढे में गिरा देते हैं.

बाबा पद्मावती मसले पर बोल रहे हैं. कह रहे हैं कि जो इस देश के संस्कारों के अगेंस्ट हो ऐसी फ़िल्में नहीं बननी चाहिए. और बन जाएं तो चाहे उनका 200 करोड़ का नुकसान हो, हमें ऐसी फ़िल्में रिलीज़ नहीं होने देनी चाहिए. आगे ये भी कहते हैं कि मूवी थिएटर बंद होने चाहिए. फ़िल्में बंद होनी चाहिए. बाबा को फिल्मों से दिक्कत है. एक फिल्म पर कंट्रोवर्सी हो गई तो सारी फ़िल्में बंद कर दो. ऐसे तो बाबागिरी के कितने ही महंत जेल में बैठे हैं. आसाराम, राम-रहीम. तो क्या इन तमाम बाबाओं की दुकान का शटर भी गिरा दिया जाए! जानता हूं ये कुतर्क है लेकिन इस बात से साबित भी यही करना है कि बाबा कुतर्की हैं.

गुरमीत राम रहीम को साध्वियों से बलात्कार मामले में 10 साल की सज़ा हुई है.
गुरमीत राम रहीम को साध्वियों से बलात्कार मामले में 10 साल की सज़ा हुई है.

इस देश में एक जाहिलाना ट्रेंड भी चल पड़ा है. कोई विवाद हुआ नहीं कि उसे मुसलमानों की दहलीज पर ले जाकर पटक दो. पद्मावती की कंट्रोवर्सी पर बोलते हुए बाबा बड़ी सहजता से टीपू सुलतान पर पहुंच जाते हैं. संत जी, टीपू किधर से आ गया पद्मावती, भंसाली, करणी सेना के रायते के बीच? समझ में ही नहीं आता कि बाबा किससे बात कर रहे हैं! पद्मावती बनानेवाले भंसाली से या मुसलमानों से.

पद्मावती के रेफरेंस से बात चलती है और राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर तक जा पहुंचती है. भारत के लोग बोर हो गए हैं ये सब सुनते-सुनते. पहले ये भाषा सिर्फ धार्मिक गुंडे और राजनैतिक पार्टियों के गुर्गे बोला करते थे. अब संत लोग भी बोल रहे हैं. ‘हिम्मत है तो करके दिखाओ’ जैसे जुमले साधू के मुंह से सुनकर विडंबना अपने मुंह पर कपड़ा डालकर पंडाल से खिसक लेती है.

आसाराम बापू भी अरसे से जेल में बंद हैं.
आसाराम बापू भी अरसे से जेल में बंद हैं.

फिल्म ‘गुलाल’ की दो लाइनें हैं:

इस मुल्क ने हर शख्स़ को जो काम था सौंपा
उस शख्स़ ने उस काम की माचिस जला के छोड़ दी

ऐसा होता दिख भी रहा है. नेता लोग सरकार चलाना छोड़कर बाकी सब करते दिख रहे हैं. अभिनेता राजनीति कर रहे हैं. पत्रकार ट्रोलिंग कर रहे हैं. बाबा लोग भक्तों को अमन का पाठ पढ़ाने की जगह हिंसा पर उकसा रहे हैं. कल को इनके वचनों से प्रभावित हुआ कोई तलवार लेकर सड़कों पर उतर आएगा. उनको सबक सिखाने के ‘उदात्त’ उद्द्येश्य से जो ‘गौरवशाली’ इतिहास से छेड़छाड़ कर रहे हैं. ग़लती से अगर वो पुलिस/प्रशासन की जवाबी कार्यवाई में मारा गया तो ये उसको वापस तो लाने से रहे. कहीं और प्रवचन दे रहे होंगे. इनको फर्क भी नहीं पड़ेगा कि इनकी कही बात ने किसी को मौत के मुहाने तक पहुंचा दिया है.

बाबा देवकीनंदन ठाकुर, विनम्रता के फ्रंट पर कंगाल संत.
बाबा देवकीनंदन ठाकुर, विनम्रता के फ्रंट पर कंगाल संत.

धर्मगुरुओं में लोगों की बेशुमार आस्था होती है. हमारे मुल्क में तो ख़ास तौर से. ये उनकी ज़िम्मेदारी है कि वो अपने करोड़ों फॉलोअर्स को प्रेम की, भाईचारे की बातें सिखाएं. न कि अंधी भीड़ बनने के लिए उकसाएं. एक साधु का लहज़ा कैसा होना चाहिए इनका बाबा को ज्ञान ही नहीं है. कहने को ज्ञान बांटना ही इनका काम है. (वही गुलाल वाली बात).

एक जगह बाबा कहते हैं,

“जिस समाज में रहते हो उसका रिस्पेक्ट ‘करना पड़ेगा‘. जिस देश में रहते हो उस देश का रिस्पेक्ट ‘करना चाहिए’.”

इस ‘करना पड़ेगा’ और ‘करना चाहिए’ में जो अंतर है न, वो अगर बाबा की समझ में आ जाए तो सामने मौजूद अथाह जनसैलाब को कुछ देने के काबिल हो जाएंगे. वरना ये ‘करना पड़ेगा’ वाली भाषा तो किसी गुंडे की लगती है, संत की नहीं.

बाबा ये भूल जाते हैं कि फिल्मों को सेंसर करने के लिए संस्था है. वो अपना काम करेगी. ये बाबा का काम नहीं है बताना कि किस पर बैन लगना चाहिए. फिर भी उनकी ज़िद है तो सेंसरिंग तो उनकी भी होगी. कल कोई भला मानुस इस बात के लिए खड़ा हो सकता है कि ऐसे बाबाओं की उलजुलूल बकवास पर बैन लगाया जाए. तब तो बाबा फ्रीडम ऑफ़ स्पीच पर व्यंग्य नहीं करेंगे न?

'पद्मावती' के रिलीज़ से पहले फिल्म पर एक और तरफ से चोट हो रही है.
‘पद्मावती’ मसले ने न जाने कितनों की पोल खोल दी.

इससे पहले भी बाबा देवकीनंदन का एक वीडियो वायरल हुआ था. जिसमें एक लड़की का साफ़-साफ़ बुली किया था उन्होंने. अपनी फैन फॉलोइंग के दम पर उस पर हावी होने की कोशिश की थी. अपमान किया था उसका. लड़की महज़ इस बात के लिए आग्रही थी कि होली में पेड़ न काटकर पर्यावरण बचाया जाए. शिवलिंग पर बहाकर दूध नष्ट करने की बजाय उसे गरीबों में बांटा जाए. बाबा उससे असहमत थे. असहमति का स्वागत है लेकिन जिस लहज़े में बाबा ने उससे बात की थी वो साधु की मर्यादा के दायरे में तो कतई नहीं आता. बेसिक शालीनता तो आम इंसान में भी होनी चाहिए. खुद को ईश्वर का दूत बताते लोगों में तो और भी ज़्यादा मात्रा में होनी चाहिए. बाबा को अपने ही धर्म का बेसिक यूजर मैन्युअल पढ़ लेना चाहिए जिसमें एक चैप्टर नम्रता पर ज़रूर-ज़रूर होगा.

वो वाला वीडियो भी देख लीजिए:

बाबा अपने वीडियो की आख़िर में एक लाइन कहते हैं.

‘इस समाज में हम जैसों की ज़रूरत नहीं रहेगी’.

थोड़े से बदलाव के साथ मैं इस लाइन से सहमत हो जाऊंगा. बस ‘नहीं रहेगी’ की जगह ‘नहीं है’ कर दीजिए.

इस समाज में बाबा देवकीनंदन ठाकुर जी जैसों की ज़रूरत नहीं है.


ये भी पढ़ें:

‘हर हिंदू के पास मोबाइल की जगह हथियार होने चाहिए’

उस आदमी का इंटरव्यू जिसने बोला हैः ‘पद्मावती के दर्शकों को छूने वाले हाथों को उखाड़ फेंकेंगे’

मुसलमान बहुसंख्यक न हो जाएं, इसके लिए शंकराचार्य नया फॉर्मूला लाए हैं!

वीडियो: पद्मावती के जौहर और विलेन खिलजी की कहानी सुनी होगी, अब ये सुनिए-देखिए

लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
Devakinandan Thakur is the new entry in padmavati row, says film should be banned

कौन हो तुम

फवाद पर ये क्विज खेलना राष्ट्रद्रोह नहीं है

फवाद खान के बर्थडे पर सपेसल.

दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला के बारे में 9 सवाल

कुछ ऐसी बातें, जो शायद आप नहीं जानते होंगे.

कोहिनूर वापस चाहते हो, लेकिन इसके बारे में जानते कितना हो?

आओ, ज्ञान चेक करने वाला खेल खेलते हैं.

कितनी 'प्यास' है, ये गुरु दत्त पर क्विज़ खेलकर बताओ

भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर्स में गिने जाते हैं गुरु दत्त.

इंडियन एयरफोर्स को कितना जानते हैं आप, चेक कीजिए

जो अपने आप को ज्यादा देशभक्त समझते हैं, वो तो जरूर ही खेलें.

इन्हीं सवालों के जवाब देकर बिनिता बनी थीं इस साल केबीसी की पहली करोड़पति

क्विज़ खेलकर चेक करिए आप कित्ते कमा पाते!

सच्चे क्रिकेट प्रेमी देखते ही ये क्विज़ खेलने लगें

पहले मैच में रिकॉर्ड बनाने वालों के बारे में बूझो तो जानें.

कंट्रोवर्शियल पेंटर एम एफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एम.एफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद तो गूगल कर आपने खूब समझ लिया. अब जरा यहां कलाकारी दिखाइए

KBC क्विज़: इन 15 सवालों का जवाब देकर बना था पहला करोड़पति, तुम भी खेलकर देखो

अगर सारे जवाब सही दिए तो खुद को करोड़पति मान सकते हो बिंदास!

राजेश खन्ना ने किस हीरो के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीता था?

राजेश खन्ना के कितने बड़े फैन हो, ये क्विज खेलो तो पता चलेगा.