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जिस गांव की 'वुहान' से तुलना हो रही है, वहां के लोगों का इस पर क्या कहना है?

बिहार का ज़िला सीवान. इस ज़िले का एक गांव है पंजवार. तेरह टोले का गांव है. टोला कहते हैं एक समूह को. आप वॉर्ड समझें. 03 अप्रैल को यहां कोरोना वायरस का पहला पॉजिटिव केस मिला. फ़िलहाल 23 मामले सिर्फ़ इसी गांव से आ चुके हैं. इतने मामले सामने आने के बाद गांव के लोग डरे हुए हैं, वो प्रशासन को जिम्मेदार बता रहे हैं. लोग उस शख्स को भी दोष दे रहे हैं जो ओमान से लौटने के बाद क्वारंटीन नहीं हुआ.

पंजवार को पूरी तरह सील कर दिया गया है. तस्वीर- संजय सिमह
पंजवार को फिलहाल पूरी तरह सील कर दिया गया है. तस्वीर- संजय सिंह

आगे बढ़ने से पहले इस गांव के बारे में एक छोटा सा ट्रिवियाः

1948 का फरवरी. महात्मा गांधी की हत्या के बाद इस गांव ने पूरे रिवाज़ के साथ उनकी अंत्योष्टि की और फिर तेरहवीं भी. समय के साथ इस गांव ने खूब तरक्की की. पंजवार में 1940 से पुस्तकालय है. यहां 1990 के शुरुआती वर्षों से एक संगीत कॉलेज भी चल रहा है. बिस्मिलाह खान संगीत महाविद्यालय. लोग बताते हैं कि आज तक जिसने भी यहां से संगीत की पढ़ाई पूरी की, वह अध्यापक जरूर बना है. 100 प्रतिशत प्लेसमेंट वाला संस्थान है. आस पास के जिले में ऐसा कोई दूसरा संस्थान नहीं है. 1980 के दशक में गांव के लोगों ने गर्ल्स हाई स्कूल बनवाया. कस्तूरबा बालिका इंटर कॉलेज. एक डिग्री कॉलेज भी है. एक अध्यापक, जिन्हें सब गुरु जी कहते हैं, उन्होंने जीवनभर की कमाई लगा कर बनवाया. गांव के लोगों ने जमीनें दान दीं. मकसद बस इतना कि गांव के बच्चे भूजा-सतुआ खाकर भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर लें. छोटे बच्चों के लिए स्पोर्ट्स एकेडमी है. मैरी कॉम स्पोर्ट्स एकेडमी नाम है. तमाम ऐसी गतिविधियों से चर्चा में रहने वाला यह गांव फिलहाल किसी और कारण से चर्चा में है.

मैरी कॉम स्पोर्ट्स एकेडमी की लड़कियां. तस्वीर- The Lallantop
मैरी कॉम स्पोर्ट्स एकेडमी की लड़कियां. तस्वीर- The Lallantop

इतना सब बताने का मकसद ये बताना है कि ये गांव बिहार के आदर्श गांवों में गिना जाता है. पढ़े-लिखे लोगों का गांव है. अब इस गांव में कोरोना के 23 मामले हैं, तो इसे वुहान कहा जा रहा है. वुहान चीन का वो शहर है जहां कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया था. एक शख्स की गलती की वजह से पूरे गांव को इस तरह का टैग दे दिये जाने पर गांववालों का क्या कहना है, गांव का माहौल कैसा है यही जानने-समझने के लिए हमने गांव के कुछ लोगों से बात की.

पंजवार के रहने वाले संजय सिंह एक प्रशासनिक अधिकारी हैं. बीते दिनों की गतिविधियों पर नज़र बनाए हुए हैं. वह कहते हैं,

“गांव सील है. ड्रोन कैमरे पहरा दे रहे हैं. वाच टॉवर भी लगा है. पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ गई है. लोग घरों में हैं. कोरोना और पुलिस दोनों के डर से. अब आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति होने लगी है. राशन, गैस और सब्जी लदी गाड़ियां गांव में घूम रही हैं. थोड़ी अव्यवस्था है. उम्मीद है दो एक दिन में ठीक हो जाएगा. लेकिन अभी भी पूरा गांव सैनीटाइज नहीं किया गया है. भाव ऐसे समझें कि गांव वाले चातक पक्षी हों और सैनेटाइज करनेवाले स्वाति नक्षत्र की बून्द बरसाने वाले. पिछले 10 दिन हमारे लिये बहुत चुनौती भरे रहे हैं. हमारे गांव पंजवार का नाम सुनकर जिनका चेहरा खिल जाता था उनकी मुस्कान भी कुटिल हो गयी. कुछ लोगों ने पंजवार को वुहान की संज्ञा दे दी.”

पंं. राजेन्द्र प्रसाद के जयंती पर संस्था 'आखऱ' के द्वारा होने वाले सालाना कार्यक्रम की एक तस्वीर. साभार- दीपक
पंं. राजेन्द्र प्रसाद के जयंती पर संस्था ‘आखऱ’ के द्वारा होने वाले सालाना कार्यक्रम की एक तस्वीर. साभार- दीपक

हमारी बात निरुपमा सिंह  से हुई. वह गांव के कस्तूरबा देवी बालिका इंटर कॉलेज में संगीत की शिक्षिका हैं. बहुत प्यारा गाती हैं. निरुपमा इस बात से चिंतित हैं कि ऐसे परिवारों का क्या होगा जो रोज़ कमाते खाते हैं. वह कहती हैं कि गांव में कई ऐसे परिवार हैं मैं उनकी मदद करना चाहती हूं लेकिन बाहर निकलना मना कर दिया गया है. निरुपमा बताती हैं,

“हमारा पूरा ध्यान फिलहाल उन परिवारों पर है जिनकी जीविका का संकट है. ऐसे कई परिवारों को मैं जानती हूं. हम मदद करने की कोशिश भी कर रहे हैं लेकिन प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है. अभी पता चला कि राशन कार्ड वगैरह के आधार पर प्रति व्यक्ति पांच किलो चावल दिया जा रहा है. यह भी ठीक नहीं है. कम से कम वो सब कुछ दिया जाना चाहिए जिससे वह खाना खा सकें. सिर्फ चावल का क्या तुक है. हमारे बाहर जाने पर रोक है.”

निरुपमा से जब हमने कोरोना प्रभावित लड़के के बारे में बात की तो उन्होंने कहा,

“मैं उसका उतना दोष नहीं मानती हूं. यह काम प्रशासन का था. जब वह दूसरी बार सीवान गया था तब ही उसे वहां क्वारंटीन कर लिया जाना चाहिए था. वह 21 मार्च को आया है और 3 अप्रैल तक घूमा है. यह कंसर्न प्रशासन को लेना था. और तो और अभी आज 14 अप्रैल तक हमारे वार्ड में सैनेटाइजेशन नहीं हुआ है. जबकि हमारे और उनके (कोरोना पॉजिटिव शख्स) घर के बीच लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी है. हमारा वार्ड नंबर 8 है और उनका 6. अब भी ऐसी लापरवाही का क्या मतलब है.”

पंजवार का विद्यालय, जहां निरुपमा अध्यापिका हैं तस्वीर- The Lalantop
पंजवार का विद्यालय, जहां निरुपमा अध्यापिका हैं तस्वीर- The Lalantop

पंजवार गांव में कुल 23 लोग कोरोना पॉज़िटिव हैं. इन 23 कोरोना पॉज़िटिव में से 21 एक ही परिवार के हैं. 60 साल की हीरा देवी कहती हैं कि उन्होंने इस तरह का माहौल पहली बार देखा है. उन्होंने हमसे भोजपुरी में बात की. कहा,

“हमनी के त ओही दिन से हदस समाईल बा. बाहर जा नइखीं सकत. एगो आंगनबाड़ी वाली से पुछनी कि का भईल त उ कुल्ह बतवली. रामायण से दू घंटा सांझ सबेरे कटता बाकी त दिन बोझा भईल रहता. भगवान से इहे प्रार्थना बा कि इ ग्रह जल्दी कटे. “

(हम सब तो उसी दिन से डरे हुए हैं. बाहर नहीं जा सकते. एक आंगनबाड़ी में काम करने वाली हैं, मैंने उनसे पूछा कि क्या हो रहा तो पता चला. रामायण देखकर सुबह शाम दो घंटे कट रहे वरना तो दिन बोझ की तरह हुआ रहता है. ईश्वर से प्रार्थना है कि ये ग्रह जल्दी से कट जाए.)

पंजवार के ही रहने वाले और बीएचयू में इतिहास के असिस्टेंस प्रोफेसर लक्ष्मीकांत सिंह  बताते हैं,

“मेरा गांव बिहार का आदर्श गांव है. हर परिवार में कामयाब लोग हैं. इलाके के पहले संगीत स्कूल से लेकर लायब्रेरी तक सब है. लेकिन फिलहाल गांव के चर्चा में आने का कारण कुछ और है. मैंने सुना तो खुद बहुत अजीब लगा. मैं उस लड़के को जानता हूं. वह जिम्मेदार है. लेकिन चूक तो किसी से हो सकती है. उसे थोड़ा जिम्मेदारी से काम लेना था. खैर, ये हिम्मत से काम लेने का समय है. लापरवाही उस लड़के की भी है और प्रशासन भी ढीला पड़ा है. लेकिन यह समय जिम्मेदारी से पेश आने का है. बड़ा गांव है. हर बार मजबूती से खड़ा हुआ है. इस बार भी ये लड़ाई हम लोग जीत जाएंगे.”

फिलहाल गांव के भीतर सब पुलिस की निगरानी में है. तस्वीर- संजय सिंह
फिलहाल गांव के भीतर सब पुलिस की निगरानी में है. तस्वीर- संजय सिंह

बिहार में लंबे समय तक पत्रकार रहे और पंजवार से जुड़ेनिराला बिदेसिया कोरोना के बाद के सिचुएशन को लेकर चिंतित हैं. वह कहते हैं,

“पंजवार में इस तरह से अचानक कोरोना पॉज़िटिव के मिलने के बाद इसकी चर्चा दूसरे कारणों से होने लगी है. यह गांव इससे पहले किसी अपनी लायब्रेरी और कॉलेज के पढ़े लड़कों की उपलब्धियों के कारण चर्चा में रहता था. लेकिन इन सब के बीच सवाल आगे का है. क्या यह उस तरह का मॉडल गांव रह पायेगा. किसी तरह का दुराव नहीं पनपेगा? ये ऐसे सवाल हैं जिनको हवा मिले तो मजबूत हो जाते हैं. जहां तक मैं जानता हूं यह गांव किसी भी धार्मिक दुराव से आगे आकर अपनी जिम्मेदारी समझेगा. फिलहाल प्रशासनिक रवैया थोड़ा चिंताजनक है. उम्मीद है कि चीजें कंट्रोल में रहेंगी.”

पंजवार में ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी निगरानी से ज्यादा जरूरी है कि गांव को सैनिटाइज कराया जाए. लोग खुद ही घरों में हैं. प्रशासन को सहयोग करना चाहिए जबकि उसके होने से लोगों में डर बढ़ रहा है.

स्थानियों के मुताबिक इन्हीं बसों से गांव के करीब 150 लोगों को जांच के लिए ले जाया गया था. तस्वीर- संजय सिंह
स्थानियों के मुताबिक इन्हीं बसों से गांव के करीब 150 लोगों को जांच के लिए ले जाया गया था. तस्वीर- संजय सिंह

हमारी पंजवार के जितने भी लोगों से बात हुई, सबने गांव के वरिष्ठ और गुरु जी कहे जाने वालेघनश्याम शुक्ल  का जिक्र किया. वही गुरुजी जिनका जिक्र हम पहले कर चुके हैं. सादा जीवन जीते हैं और फिलहाल सेल्फ आइसोलेशन में हैं. उनसे हमने फोन पर बात की. वह दु:खी थे. बताया किसी शौकत नाम के शख्स की मृत्यु हो गई है. उन्होंने बात करने में असमर्थता जताया और कहा,

“मन अभी इस स्थिति में नही हैं. आज ही शौकत का सामाचार मिला. दो एक दिन से वह बीमार था. हॉस्पिटल जाने से इनकार करता रहा. हम सब ने उसे डांटा और अधिकार से उसे भेजा. साथ में गांव के मुखिया भी थे. आज उसके मृत्यु का समाचार मिला है. छोटे बच्चे हैं उसके. सब कुछ बंद है. मैंने कुछ दिन पहले उसके बच्चों और भतीजों को चना-भूजा वगैरह दिया था. उसकी बेटी मैरी कॉम स्पोर्टस ऐकेडमी में पढ़ती है. फिलहाल मन दु:खी है.”

चुनाव यात्रा के दौरान पंजवार गई हमारी टीम को किताबें दिखाते घनश्याम शुक्ल जी
चुनाव यात्रा के दौरान पंजवार गई हमारी टीम को किताबें दिखाते घनश्याम शुक्ल जी

पंजवार के मिडिल स्कूल के अध्यापक संतोष ने बताया कि वह उस युवक को टीचर रह चुके हैं. उसके आने के बाद उन्होंने उसको समझाया था कि कुछ दिन मत ही घूमो लेकिन उसने बात सुनी नहीं. संतोष बताते हैं,

“वह लड़का बहुत पढ़ लिख नहीं सका. न ही परिवार में कोई बहुत पढ़ा लिखा है. मजदूरी से जीविका चलती है. उनके सामने तो रोटी का संकट है. वह मेरा स्टूडेंट था. मैंने उसे प्राइमरी में पढ़ाया है. जब वह आया तो मैंने उसको बोला. कुछ दिन घर में रहो. लेकिन वह माना नहीं. क्या कर सकते हैं. थोड़ी नाराजगी तो है. खासकर उसके व्यवहार को लेकर. लेकिन फिलहाल हिम्मत से काम लेने का समय है. धीरे धीरे सब ठीक कर लिया जाएगा.”

सांकेतिक तस्वीर. साभार- दीपक
सांकेतिक तस्वीर. साभार- दीपक

हमने गांव के मुखिया गोपाल जी से बात करने की कोशिश की मगर उनसे बात नहीं हो सकी. उनके बेटे राजेश ने बताया कि पापा गांव में सब्जी और राशन बंटवाने गए हैं. सब कुछ कंट्रोल में है. फिलहास थोड़ी व्यस्तता है. तो बात संभव नहीं है.

पंजवार में किसानी जिविका का प्रमुख साधन है. अधिकतर परिवार खेती करते हैं. लगभग फसल तैयार है. किसान और पंचायत शिक्षक विनोद तिवारी कहते हैं,

“खेत में फसल लगी है लेकिन इतना डर है कि कोई खेत में नहीं जा रहा. बीडीओ और बाकी अधिकारी कह रहे हैं कि हम कटवाएंगे आपकी फसल. कल थोड़ी सी बारिश हुई तो सबका हाथ छाती पर आ गया. रात भर दहशत में थे. इस सब का ध्यान नहीं रखा गया तो कोरोना के बाद रोटी का संकट आ जाएगा.”

गांव का एक राजकिया बालिका विद्यालय. तस्वीर- दीपक
गांव का राजकिया कन्या बालिका विद्यालय जहां नूतन अध्यापिका हैं. तस्वीर- दीपक

एक उदाहरण ये भी है

बातचीत में ही हमें दीपक के बारे में पता चला. दीपक 21 मार्च को दूबई से लौटे थे. उन्हें भी ठीक वही निर्देश दिए गए थे जो उस लड़के को. दीपक ने घर आकर खुद को क्वारंटीन किया और जिला मुख्यालय पर क्वारंटीन भी रहे हैं. दीपक ने बताया,

“मुझे जांच के लिए जब सीवान भेजा गया तो मुझे कोई लक्षण नहीं था. मुझे फिर भी रहने के लिए कहा गया. मैं रुका. मुझे 29 मार्च से 5 अप्रैल तक सीवान के एक कॉलेज में रखा गया था. मैं घर आया तो पता चला की उस लड़के का कोरोना पॉज़िटिव आया है. लोग मेरी तुलना उससे कर रहे हैं. मैं मानता हूं उसे सावधानी रखनी चाहिए थी. उसकी गलती है लेकिन कोई बात नहीं हमारा गांव का बहुत जिम्मेदार गांव है. हम लोग मिल जुल कर निपट लेंगे.”

पूरी बातचीत में इस गांव ने जिम्मेदारी दिखाई. किसी के भी मन में रोष नहीं था. लोग भय में हैं, मगर आश्वस्त हैं.

लोकसभा चुनाव के दौरान लल्लनटॉप की चुनावी यात्रा इस गांव में  पहुंची थी. उसका वीडियो आप नीचे देख सकते हैं. वहां के कॉलेज और तमाम जिम्मेदार लोगों को देख,सुन सकते हैं.


वीडियो देखें: सीवान के पंजवार जैसा गांव आपने बिहार में देखा नहीं होगा

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