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कोरोना वायरस लैब में बना, ये बताने वाला रिसर्च पेपर क्यों हटाया गया?

कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत सारी कॉन्सपिरेसी थ्योरीज़ तैर रही हैं. उन सबकी मदर थ्योरी ये है कि कोरोना वायरस चीन का बायोलॉजिकल वेपन है. इस थ्योरी के मुताबिक, ये वायरस जानवरों से इंसानों तक नहीं आया है. इसे चीन की किसी लैब में बनाया गया था. और वहां से ये गलती से लीक हो गया.

थ्योरी सिर्फ थ्योरी रहती है, जब तक उसे सब्सटेंशिएट न किया जाए. इसलिए इसके साथ हमेशा कुछ न कुछ जोड़ा जाता है.

पिछले महीने कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी इसे ट्विटर पर उड़ाया था. उन्होंने एक फिक्शन नॉवेल का एग्ज़र्प्ट डाल कर सवाल उठाए थे. तब भी इस थ्योरी पर सवाल उठे थे.

भारत में कोरोना वायरस के केस बढ़ रहे हैं. और अब ये थ्योरी मार्केट में लौट आई है. इस बार इसका आधार कोई फिक्शन नॉवेल नहीं बल्की एक रीसर्च पेपर है. और वो भी भारतीय रीसर्चर्स द्वारा पब्लिश किया गया रीसर्च पेपर. पहले इस रीसर्च पेपर की कहानी जानिए.

यहां बायोलजी से जुड़े पेपर्स और जर्नल्स छपते हैं. (bioRxiv)
यहां बायोलजी से जुड़े पेपर्स और जर्नल्स छपते हैं. (bioRxiv)

पेपर में क्या है?

जनवरी की शुरुआत में ही इस कोरोना वायरस का जीन सीक्वेंस सार्वजनिक कर दिया गया था. दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने इस सीक्वेंस को स्टडी किया. इसी के सहारे लैब टेस्ट्स और वैक्सीन का काम शुरू होना था.

31 जनवरी को इस सीक्वेंस पर सवाल खड़े करता एक पेपर सामने आया. ये पेपर bioRxiv पर छपा था. और इसे छापने वाले लोगों में थे IIT दिल्ली और DU के रीसर्चर्स. इस पेपर में वायरस के प्रोटीन सीक्वेंस में कुछ ‘इन्सर्शन्स’ की पहचान की गई थी. इंसर्ट अंग्रेज़ी का शब्द है, जिसका मतलब है डालना. यहां इन्सर्शन्स से आशय है कि वायरस प्रोटीन सीक्वेंस के कुछ हिस्से इसमें डाले गए थे. इंसानों द्वारा, किसी लैब में. और क्लेम ये था कि इन्सर्शन्स HIV से मेल खाते हैं. HIV मतलब Human Immunodeficiency Viruses. आसान भाषा में कहें तो एड्स वाले वायरस.

चार हिस्से जो ऐड्स के वायरस से मिलते हैं. (पेपर)
चार हिस्से जो ऐड्स के वायरस से मिलते हैं. (पेपर)

इन रीसर्चर्स ने सीक्वेंस में चार जगहों पर ऐसे हिस्सों की पहचान की थी, जहां इन्सर्शन्स हों. ये पेपर सामने आने के अगले दिन ज़ीरो हेज नाम की वेबसाइट ने एक स्टोरी पब्लिश की. ये सवाल उठाते हुए कि ये कोरोना वायरस आर्टिफिशियली क्रिएटेड वेपन है. और यहां से ये पेपर चर्चा में आ गया.

पेपर कितना भरोसेमंद?

अब तक ये पेपर पीयर रिव्यू के स्टेप तक भी नहीं पहुंचा था. रीसर्च पेपर पब्लिश होने में पीयर रिव्यू एक बड़ा स्टेप होता है. इस दौरान उस फील्ड के एक्सपर्ट्स उस पेपर को चैक करते हैं. ताकि रीसर्च पेपर पर भरोसेमंद और हाई क्वालिटी वाला लेबल लग सके. लेकिन ये पेपर पीयर रिव्यू से पहले ही दुनिया की नज़र में आ गया.

दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने इस एनालिसिस में गलतियां निकलनी शुरू कर दीं. वे इस ओर ध्यान ले गए कि ये सीक्वेंस बहुत ही छोटे हैं. और ये कई दूसरे ऑर्गेनिज़्म्स के सीक्वेंस में भी मिल जाएंगे. इसलिए ये कहना ठीक नहीं होगा कि ये HIV से इस वायरस में आए हैं.

छपने के दो दिन बाद ये पेपर विथड्रॉ कर लिया गया. यानी जिन्होंने इसे छापा था, उन्होंने इसे वापस ले लिया. वे रिसर्च कम्युनिटी से मिले कमेंट्स के बाद अपना टेक्नीकल अप्रोच और नतीजों की व्याख्या में सुधार लाना चाहते हैं. उन में से एक ने कहा कि हमरा मकसद इन कॉन्सपिरेसी थ्योरीज़ को हवा देना नहीं था. और न ही हमने ऐसा कोई दावा किया है.

पीयर रिव्यू साइंटिफिक मैथड का बड़ा अहम हिस्सा है. (विकिमीडिया)
पीयर रिव्यू साइंटिफिक मैथड का बड़ा अहम हिस्सा है. (विकिमीडिया)

लेकिन तब तक इस पेपर को डाउनलोड किया जा चुका था. और इसे आधार बनाकर कॉन्सपिरेसी थ्योरी को सर्कुलेट भी किया जाने लगा था. अब जब भारत में ये कोरोना वायरस के केसेस बढ़ रहे हैं, तब ऐसे मैसेज का वॉट्सऐप पर सर्कुलेट होना लाज़िमी है. लेकिन ध्यान रखिए, इस वायरस के बायोइंजीनियर्ड होने के कोई सबूत नहीं है.

अब bioRxiv ने भी अपनी साइट पर चेतावनी लगा दी है कि हमें कोरोना वायरस पर बहुत सारे रीसर्च पेपर मिल रहे हैं. ये पेपर्स पीयर-रिव्यूड नहीं हैं. इन्हें किसी भी चीज़ का आधार न बनाया जाए.

दी लल्लनटॉप ने बायोलॉजिकल वेपन्स और कोरोना वायरस के लैब में बनने की संभावना को लेकर एक डीटेल्ड स्टोरी की की है. चाहें तो उसे पढ़ सकते हैं. चाहें तो वही वीडियो की शक्ल में भी देख सकते हैं.


वीडियो – क्या कोरोना वायरस चीन के शहर वुहान की लैब में तैयार किया गया जैविक हथियार है?

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