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कोरोना डायरीज: उस किन्नर की हालत, जो बैंक-बंदी के बाद अब कोरोना की मार झेल रही है

सुमन
सुमन

नामः सुमन

कामः अपनी किन्नर मंडली के साथ घर-घर जाकर बधाई गाना

जगहः पटना, बिहार

ये सब शुरू होने से पहले रोज़ नहा-धोकर भोर में काम के लिए निकलती थी. और दोपहर होते-होते घर आ जाती थी. फिर अपना मंडली के साथ खाना-पीना खा के टीवी देखती थी. पैसा भी ठीक-ठाक, मतलब कभी चार सौ-पांच सौ तो कभी हज़ार रुपया तक हो जाता था. अब क्या होता है कि जैसे ही टीवी खोलते हैं तो कोरोनावायरस के बारे में दिखाने लगता है. इतना मरा, इतना आदमी को कोरोना हो गया तो डर लग जाता है.

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इ सब के बाद फिर अब जो बधाई मांगने जाती हूं तो जजमान भी ठीक से अंदर नहीं बुलाता है जबकि पहले खुल के हम लोगों को सब बुलाता था, हम लोग का स्वागत करता था. आमदनी भी पहले से कम हो गया है. कोई बोलता है बैंक अकाउंट बंद है तो किसी को तनख्वाह नहीं मिला है. कैसे मिलेगा, डर के मारे कोई काम पर जाएगा ही नहीं तो? बहुत लोग का दुकान सब भी बंद है. इसलिए जब उनलोग के पास पैसा रहेगा तब ना हमलोग को भी देगा.

हमलोग को भी बाहर जाने में डर लगता है लेकिन अगर घर में रहूंगी तो कौन देगा खाने के लिए? जब तक घूमेंगे फिरेंगे नहीं तब तक कुछ नहीं होगा हमलोग का. सब लोग बोलता है मास्क लगा कर निकलो. हाथ धोने बोलता है. तो वो सब तो करती हूं लेकिन हमेशा नहीं हो पाता. सब इ नहीं समझता है कि हमारे समाज में भी अमीर-गरीब लोग होता है. जिसके पास पैसा है उ लोग ले लेता है.

सड़क की ये डरा देने वाली शांति बयां करती है कि खुशियों का क्या हाल है.
सड़क की ये डरा देने वाली शांति बयां करती है कि खुशियों का क्या हाल है.

जब से टीवी पर इ सब दिखाने लगा है तब से बहुत डर है. काहे कि इसका कोई इलाज भी तो नहीं है. कुछ पता नहीं है कि इलाज होगा भी तो मंहगा होगा कि सस्ता, इसलिए और डर लगता है. सब के मुंह से सुनती हूं कि महामारी फैल गया है और इसके बाद अकाल आएगा. खाने को नहीं मिला तो पता नहीं क्या होगा.

जैसे बड़ा शहर में सब लोग डर रहा है. वैसे ही यहां भी लोग बहुत डरता है. जहां जाती हूं सब कोरोनावायरस-कोरोनावायरस करते रहता है. वैसे भी सबलग हमलोग पर हंसता था. पर आजकल नया शुरू हुआ. किसी का मजाक उड़ाना हो तो आदमी लोग बोलता है उ देखो कोरोना जा रहा है. लेकिन क्या करें इ सब तो हमलोग रोज सुनते हैं.

# कोट-

मैं तो बस यही चाहती हूं कि लोग साफ-सफइय्यत से रहे अपना. दुआ करती हूं कि मालिक सब जल्दी ठीक कर देगा. हम लोग का क्या है, हमलोग चले भी जाएंगे तो कोई बात नहीं. हमलोग का जजमान सब अच्छा से रहे बस. बाकी सब बढ़िये होगा


कोरोना डायरीज. अलग अलग लोगों की आपबीती. जगबीती. ताकि हम पढ़ें. संवेदनशील और समझदार हों. ये अकेले की लड़ाई नहीं. है. इसलिए अनुभव साझा करना जरूरी है. आपका भी कोई खास एक्सपीरियंस है. तस्वीर या वीडियो है. तो हमें भेजें.

 corona.diaries.LT@gmail.com


ये स्टोरी मयंक ने की है.


वीडियो देखें: 

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में इस तरह मदद कर रहे दुनिया भर के अमीर लोग-

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