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कोरोना डायरीज़: कन्नौज, यूपी के एमपी लॉकडाउन पर बोले, 'हम साढ़े चार महीने जेल में रहे हैं'

सुब्रत पाठक
सुब्रत पाठक

नामः सुब्रत पाठक

कामः उत्तर प्रदेश से लोकसभा सदस्य

जगह: दिल्ली

मैं लोकसभा सदस्य हूं. हमारा हर रोज़ का ऐसा था कि अगर दिल्ली में हैं तो सब काम से फुर्सत होते ही सीधा संसद जाना होता था. फिर शाम में अगर मन हुआ तो किसी से मिलने-जुलने या कहीं खाने-पीने निकल गए. अगर कन्नौज में होते थे तो सवेरे तमाम लोगों से मिलना होता जो अपनी समस्या या कोई बात लेकर आते थे. फिर अगर कहीं किसी कार्यक्रम में जाना हुआ तो गए.

अब सवेरे उठकर सबसे पहले तो ट्रेडमिल पर वॉक करते हैं एक घंटे. फिर नहा-धोकर पूजा-पाठ किए और फिर नाश्ता. पूरा दिन खाली रहता है तो कभी कोई किताब पढ़ लेते हैं, कभी कोई मूवी देख लिए.

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अगर ऐसे लॉकडाउन में रहने की बात करें तो हम तो साढ़े चार महीने जेल में भी रहे हैं लेकिन परिस्थितियां ऐसी होती हैं तभी आदमी रुकता है. जैसे जीवन चलने का नाम है वैसे ही आदमी भी चलने का नाम है. चलता रहेगा तो आगे बढ़ता रहेगा लेकिन सब ब्रेक हो गया है कोरोना की वजह से. बाहर के सभी लोगों का आना हमने बंद कर दिया है, बस जो घर के सदस्य मेरे साथ थे वही हैं. जो हमारे यहां काम करने आते थे उनको भी हमने कह दिया है कि अभी कुछ दिन अपने-अपने घरों में ही रहें. जिनकी जो सैलरी है वो उनको मिलती रहेगी.

Aiims Raipur
प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई

अभी हम दिल्ली में हैं और कुछ दिन पहले हमारा भाई आ रहा था कन्नौज से तो हमने उसको बोला था कि देखो ऐसा माहौल है तो जरूरी राशन-पानी का सामान लेते आना. वैसे भी हमारा सारा सामान कन्नौज से ही आता है. तो अभी 10-12 दिन का सामान है लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि सभी जरूरी चीज़ें जैसे दूध-सब्ज़ी वगैरह तो ओपन ही है.

बहुत लोग हैं जो इससे डर रहे हैं, घबरा रहे हैं. उनसे यही कहना है कि ऐसा तो नहीं है कि सब लोग कोरोना से मर ही रहे हैं. बहुत लोग ठीक भी हुए हैं. अभी तक 23 से ज्यादा पेशेंट उत्तर प्रदेश में ठीक हो चुके हैं. कुल मिलाकर यह कि कोरोना से इतना डरने की ज़रूरत भी नहीं है लेकिन हां हमारा बचाव बहुत जरूरी है. यह संक्रमण से फैलता है और अगर हम खुद को और अपने परिवार को संक्रमित होने से बचा ले गए तो हम यह लड़ाई जीत जाएंगे.

कोट-

यह ऐसी लड़ाई है जिसमें दुश्मन कौन है, उसकी ताक़त क्या है, हमें पता ही नहीं. मगर यह लड़ाई हमें लड़नी भी है और जीतनी भी है. इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि सरकार के सभी निर्देशों का पालन किया जाए. अगर इतना हम लोग कर सके तो ये लड़ाई हम ज़रूर जीतेंगे.


कोरोना डायरीज. अलग अलग लोगों की आपबीती. जगबीती. ताकि हम पढ़ें. संवेदनशील और समझदार हों. ये अकेले की लड़ाई नहीं. है. इसलिए अनुभव साझा करना जरूरी है. आपका भी कोई खास एक्सपीरियंस है. तस्वीर या वीडियो है. तो हमें भेजें. corona.diaries.LT@gmail.com


ये स्टोरी मयंक ने की है.



वीडियो देखें:कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन में देश के किसान इतने चिंतित क्यों हैं?

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