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लीक हुई Whatsapp चैट में ऐसा क्या है कि इतना हंगामा हो गया है?

न्यूज़ ब्रॉड्कास्टर्स असोसिएशन यानी NBA ने ब्रॉड्कास्ट ऑडियन्स रिसर्च काउन्सिल (BARC) के पूर्व प्रमुख पार्थो दासगुप्ता और टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी के बीच की वॉट्सऐप चैट सार्वजनिक होने के बाद एक स्टेटमेंट जारी किया है. इसमें NBA ने कहा है कि ये चैट हैरान करने वाली हैं. ये दिखाता है कि ताक़त को लेकर कितना बड़ा खेल चल रहा था. इसी के साथ NBA ने BARC से अपील की है कि तो रिपब्लिक टीवी की रेटिंग सस्पेंड कर दें. इंडियन ब्रॉड्कास्टिंग फ़ाउंडेशन (IBF) से मांग की है कि अर्नब गोस्वामी की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाए. इसके अलावा कई राजनीतिक दल इस कथित खुलासे को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए मोदी सरकार को भी घेरने में जुट गए हैं.

Partho Dasgupta
तस्वीर 30 दिसम्बर की. BARC के पूर्व प्रमुख पार्थो दासगुप्ता को कोर्ट में पेश करती पुलिस. (PTI)

NBA ने ऐसी मांग क्यों की है? पूरा मामला क्या है? और क्यों इस मोड़ तक पहुंच गया? ये सब बताएंगे. लेकिन आगे बढ़ने से पहले 2-3 छोटे-छोटे नाम सुन-समझ लीजिए. पूरी कहानी समझने में मदद मिलेगी.

BARC क्या है?

पूरा नाम तो बता दिया. ब्रॉड्कास्ट ऑडियन्स रिसर्च काउन्सिल. काम क्या है? टीवी पर आने वाले चैनलों की निष्पक्ष और सटीक रेटिंग निकालना. समय-समय पर BARC टीवी चैनलों की रेटिंग, जिसे हम टेलीविज़न रेटिंग प्वाइंट यानी TRP कहते हैं, जारी करता है. BARC ऐसा करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के लगभग 44 हज़ार घरों में लगी TRP मॉनिटरिंग मशीनों का सहारा लेता है. TRP के सामने आने के बाद ये पता चलता है कि एक ख़ास समयावधि में किसी ख़ास चैनल पर दिखाए जा रहे कंटेंट से उस चैनल की व्यूअरशिप कितनी बढ़ी या घटी. कई टीवी चैनल इस TRP का इस्तेमाल अपने शो और कार्यक्रमों की प्लानिंग के लिए करते हैं. इनके नंबरों के आधार पर अपनी पॉपुलैरिटी साबित करते हैं.

IBF क्या है?

टेलीविज़न चैनलों के जो समूह होते हैं, उन्होंने मिलकर एक फ़ाउंडेशन तैयार किया साल 1999 में. नाम दिया इंडियन ब्रॉड्कास्टिंग फ़ाउंडेशन. इसका काम है सरकार की नीतियों का टेलीविजन इंडस्ट्री पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, उसे देखना और टेलीविजन इंडस्ट्री के भिन्न-भिन्न अंगों के अधिकारों की रक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करना.

NBA क्या है?

NBA यानी न्यूज़ ब्रॉड्कास्टर्स असोसिएशन. ये विशुद्ध रूप से ख़बरिया दुनिया से जुड़ी हुई संस्था है. साल 2007 में भारत में टीवी पर न्यूज़ चैनल चलाने वाली जितनी कंपनियां हैं, उन्होंने मिलकर NBA का गठन किया. काम ये था कि न्यूज़ चैनलों को जो भी नीतिगत दिक्कतें आती हैं, या क़ानूनी अड़चनें आती हैं, उनसे निपटना और उनका निवारण करना. NBA का एक सबसे ज़रूरी काम ये भी है कि ये न्यूज़ चैनलों के सामने आने वाली तकनीकी दिक्कतों या संचालन संबंधी दिक्कतों को भी अड्रेस करती है, और क़ानूनी तरीक़े से उनका निदान करने की भी कोशिश करती है.

अब वॉट्सऐप चैट के मामले पर आते हैं

सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों से रिपब्लिक टीवी के न्यूज़ एंकर अर्नब गोस्वामी और BARC के पूर्व प्रमुख पार्थो दासगुप्ता के बीच की कथित वॉट्सऐप चैट वायरल हो रही हैं. इन चैट्स में बहुत सारी बातें हैं.

Arnab Leaked Chat
कथित चैट का एक हिस्सा, जहां बालाकोट के बारे में क़यास लगाए गए हैं.

मसलन चैट में कुछ मौक़ों पर कथित तौर पर अर्नब गोस्वामी की तरफ़ से कहा गया है कि पाकिस्तान में भारत सरकार कुछ बड़ा करने जा रही है. इस बार कुछ बड़ा होगा. साथ ही ये भी कि ये आम स्ट्राइक से बड़ी स्ट्राइक होगी. और इसके अलावा कश्मीर में भी कुछ बड़ा होने वाला है. वायरल हो रही चैट के हवाले से बात करें तो इसके बाद अर्नब के नाम से लिखा गया कि पाकिस्तान में ऐसा हमला होगा कि लोग उत्तेजित हो जायेंगे. चैट के मुताबिक़, ‘ठीक इन्हीं शब्दों में’ अर्नब के सूत्रों ने ये बात उनसे साझा की थी.

अपनी चैट में जिस हमले की जानकारी कथित रूप से अर्नब गोस्वामी साझा करते नज़र आ रहे हैं, उसे सोशल मीडिया पर बालाकोट स्ट्राइक से जोड़कर देखा जा रहा है. साथ ही चैट में कश्मीर से जुड़े दावे को धारा 370 में संशोधन से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके जरिए सरकार ने कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था.

चैट कहां से सामने आयी?

मुंबई पुलिस की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में से. किस केस की चार्जशीट? रिपब्लिक टीवी नेटवर्क पर TRP को मैनिपुलेट करने के आरोप हैं. साल 2020 में मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी और BARC के पूर्व प्रमुख पार्थो दासगुप्ता के खिलाफ़ TRP रेटिंग्स में हेराफेरी करने का केस दर्ज कर रखा है. इस केस में अर्नब समेत रिपब्लिक टीवी के दूसरे बड़े अफसरों से पूछताछ भी हो चुकी है. चैनल के कुछ पदाधिकारियों को हिरासत में भी लिया गया था. पार्थो दासगुप्ता और रिपब्लिक के CEO विकास खानचंदानी अब तक कस्टडी में हैं.

सोशल मीडिया का एक धड़ा मुंबई पुलिस पर किसी ख़ास मक़सद से चैट को लीक करने के आरोप लगा रहा है. पार्थो दासगुप्ता के वक़ील अर्जुन सिंह ठाकुर ने भी कहा है कि दो लोग जो एकदूसरे को क़रीब से जानते थे, उनकी चैट लीक करने के पीछे मोटिवेटेड इंट्रेस्ट है. उन्होंने दावा किया कि इन चैट्स में कोई भी ऐसी बात नहीं है, जिससे दोष सिद्ध होते हों. ये सारी बातें प्रोफ़ेशनल लेवल की हैं.

और किस आशय की बातचीत है?

इन वॉट्सऐप चैट में एक तो बालाकोट स्ट्राइक और कश्मीर को लेकर संविधान संशोधन की बातचीत है. इसके अलावा भी कई बातें हैं. जैसे एक चैट में दासगुप्ता कथित तौर पर अर्नब गोस्वामी से कहते हैं कि दूसरे चैनल वाले अर्नब के चैनल की सफलता से जलते हैं. इसके जवाब में अर्नब गोस्वामी के हवाले से लिखा है कि सारे मंत्री हमारे साथ हैं.

गृह मंत्री अमित शाह. (Photo: PTI)
कहा जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह का नाम भी कई मौक़ों पर चैट में आया है (Photo: PTI)

कई मौक़ों पर अर्नब और दासगुप्ता के नाम से भेजे गए मैसेज में किसी व्यक्ति के लिए AS शब्द लिखा गया है. कहा जा रहा है कि BARC के खिलाफ़ की गयी शिकायतों को लेकर अर्नब AS से मिलें. सोशल मीडिया पर AS का मतलब अमित शाह से निकाला जा रहा है. सचाई क्या है, ये अभी तक सामने नहीं आया है.

ख़बरों के मुताबिक़, अर्नब और पार्थो की इस कथित बातचीत में कई जगहों पर सचिवों की नियुक्ति और कैबिनेट में फेरबदल का भी जिक्र है. वायरल चैट में दासगुप्ता ने कई मौक़ों पर अर्नब गोस्वामी से कुछ मंत्रियों के साथ BARC से जुड़े कुछ मुद्दे उठाने को भी कहा है.

NBA की क्या आपत्ति है?

NBA ने अपने बयान में दावा किया कि इन मैसेज से साफ़ होता है कि BARC और रिपब्लिक टीवी ने मिलकर महीने दर महीने टीआरपी रेटिंग्स के नम्बरों के साथ छेड़छाड़ की, दूसरे चैनलों की रेटिंग घटायी गयी ताकि रिपब्लिक चैनल की रेटिंग बढ़ाकर दिखायी जा सके.

NBA ने कहा है,

“इन मैसेजों से बस रेटिंग का हेरफेर ही पता नहीं चलता, बल्कि ये भी पता चलता है कि ताक़त को लेकर कितना बड़ा खेल हो रहा है. इन मैसेजेज़ में कैबिनेट में फेरबदल, सचिवों की नियुक्ति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच की बातें हैं. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की कार्यप्रणाली के बारे में भी लिखा गया है. इन सब बातों से NBA के पिछले 4 सालों में लगाए गए उन आरोपों की पुष्टि होती है, जिसमें कहा गया था कि NBA से बाहरी सदस्यों द्वारा BARC से मेलजोल करके रेटिंग्स के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.”

रिपब्लिक को IBF से बाहर करने के अलावा NBA ने ये मांग भी की है कि इस चैनल की रेटिंग कुछ समय तक के लिए सस्पेंड कर दी जाएं, क्योंकि NBA के आरोप हैं कि रिपब्लिक की हरकतों की वजह से ब्रॉड्कास्ट इंडस्ट्री की छवि को नुक़सान पहुंचा है.

Nba
NBA ने इस मामले में BARC से कई बिंदुओं पर सफ़ाई मांगी है.

NBA ने BARC से ये भी कहा है कि BARC एक सब-कमिटी बनाए, जिसमें NBA के सदस्य हों. अगर न्यूज़ चैनलों की रेटिंग्स में कोई बड़ा परिवर्तन हो, तो उसे अमल में लाने के पहले इस सब-कमिटी की राय ली जाए. साथ ही जो चैनल रेटिंग्स में हेरफेर करने में शामिल रहते हैं, उनके खिलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने के क्या प्रावधान हैं, इसके बारे में भी BARC सूचित करे.

इसके अलावा NBA ने ये भी कहा कि हर महीने छेड़छाड़ करके तैयार किए गए आंकड़े पेश करने से सिर्फ़ ब्रॉड्कास्ट इंडस्ट्री की इमेज ही खराब नहीं हुई है, बल्कि कई सारी कम्पनियों को आर्थिक नुक़सान भी उठाने पड़े हैं. ऐसे में BARC की ज़िम्मेदारी है कि वो इस पूरे मसले पर सफ़ाई पेश करे.

राजनीतिक दलों की क्या मांग है?

जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी यानी JPC द्वारा इस पूरे मामले की जांच की मांग. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने इस चैट लीक कांड के बाद सभी आरोपों की JPC द्वारा जांच की मांग की है. इन राजनीतिक दलों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संविधान में संशोधन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों की जानकारी का पहले ही बाहर आना एक गम्भीर मुद्दा है, जिसकी फ़ौरी तौर पर जांच होनी चाहिए.

Rahul Gandhi
प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी ने कई गम्भीर आरोप लगाए हैं, (फ़ाइल फोटो: PTI)

19 जनवरी को प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस नेता और वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने कहा है,

“बालाकोट स्ट्राइक की जानकारी बस 4 या 5 लोगों को थी. प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वायुसेना प्रमुख. और इनमें से ही किसी ने अर्नब गोस्वामी को जानकारी दी है. ये एक आपराधिक कृत्य है. जिसने जानकारी दी और जिस व्यक्ति के पास जानकारी आयी, दोनों पर ही केस किया जाना चाहिए. जांच की जानी चाहिए लेकिन ये जांच कभी शुरू ही नहीं होगी. मैं बताता हूँ क्यों? क्योंकि ये जानकारी प्रधानमंत्री ने ही दी होगी.”

कांग्रेस के अलावा महाराष्ट्र में गठबंधन सहयोगी NCP का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे का TRP के लिए इस्तेमाल किया गया है, NCP के प्रवक्ता महेश तापसे ने मीडिया से बातचीत में कहा,

“ये बहुत चौंकाने और परेशान करने वाली बात है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को कैसे TRP बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया है. ये भी सवाल उठता है कि अर्नब गोस्वामी को इस तरह की संवेदनशील जानकारी कहां से मिली? गृह मंत्रालय को तुरंत इस बारे में पता करना चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए.”

NCP ने नरेंद्र मोदी सरकार और भाजपा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अर्नब गोस्वामी पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली है. वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा,

“राष्ट्रीय सुरक्षा और संविधान में संशोधन से लेकर राजनीतिक नियुक्तियों तक की संवेदनशील जानकारियां किसने मुहैया करायीं? केंद्र सरकार को तुरंत एक जांच बैठानी चाहिए. साथ ही रक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर बनी संसद की स्थायी समिति को भी इस मामले में तुरंत दख़ल देना चाहिए.”

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भी मीडिया से बातचीत में कहा है कि वायरल चैट के पूरे मामले में केंद्र सरकार को संज्ञान लेना चाहिए और मामले की जांच करनी चाहिए. देशमुख से मिले कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने एक ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें देशमुख से अर्नब गोस्वामी के खिलाफ़ ऑफ़िशियल सीक्रेट्स एक्ट – 1923 के तहत केस दर्ज करने की मांग की गयी है.

आरोपियों का क्या कहना है?

इस मामले में जब मीडिया संस्थानों ने BARC से पक्ष जानने की कोशिश की, तो BARC ने कहा कि चूंकि मामला न्यायालय में लम्बित है और जांच जारी है, लिहाज़ा इस बारे में वो कुछ नहीं कहना चाहते हैं. वहीं दूसरी ओर रिपब्लिक टीवी नेट्वर्क ने एक बयान जारी करके कहा है कि रिपब्लिक के खिलाफ़ जो केस दर्ज किया गया है, वो राजनीतिक द्वेष की भावना से किया है. कहा है,

“ये रिपब्लिक को कुचलने का कुछ चैनलों का मिलाजुला प्रयास है. हम सरकार और इस देश के लोगों से अपील करते हैं कि ये अन्याय मत होने दीजिए.”


लल्लनटॉप वीडियो : एंकर की कथित पर्सनल चैट लीक हुई और ट्विटर पर बवाल मच गया

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