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क्या होता है परिसीमन , जो अब जम्मू-कश्मीर में होने वाला है?

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5 अगस्त, 2019. गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में दो बिल और दो संकल्प पत्र पेश किए. और इसका मज़मून ये था कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के दो हिस्से हटाए जा रहे हैं. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का फैसला लिया गया है. मतलब ये कि अब जम्मू-कश्मीर एक राज्य न होकर दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा. एक राज्य होगा जम्मू-कश्मीर, जो केंद्रशासित तो होगा, लेकिन उसमें विधानसभा होगी. और दूसरा राज्य होगा लद्दाख, जो पूरी तरह से केंद्रशासित प्रदेश होगा. अब जब राज्य का पुनर्गठन हुआ है, तो वहां पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को भी नए सिरे से तय किया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया को परिसीमन कहते हैं. परिसीमन करने का काम केंद्र की एक संस्था करती है, जिसे कहते हैं भारतीय परिसीमन आयोग. इसका समय-समय पर गठन होते रहता है और भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त की देखरेख में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस इसके अध्यक्ष नियुक्त किए जाते हैं.

कैसे काम करता है परिसीमन आयोग?

मुख्य चुनाव आयुक्त ही परिसीमन आयोग के अध्यक्ष होते हैं.

परिसीमन आयोग का गठन 1952 में किया गया था. इसका एक और नाम भारतीय सीमा आयोग भी है. इसका काम है राज्य की विधानसभाओं और केंद्र की लोकसभा सीटों की राजनीतिक सीमाओं का रेखांकन करना. परिसीमन आयोग सीटों की संख्या में तब्दीली नहीं कर सकता है. परिसीमन आयोग काम बस इतना करता है कि वो जनगणना के हिसाब से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों की संख्या आरक्षित करता है. परिसीमन आयोग के अध्यक्ष होते हैं, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस. परिसीमन आयोग अपनी सिफारिशों को लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में भेजता है, जहां उन सिफारिशों को मंजूरी मिल जाती है.

कैसे और कब होता है परिसीमन?

संविधान के अनुच्छेद 82 में परिसीमन आयोग की शक्तियां और उसके काम बताए गए हैं.
संविधान के अनुच्छेद 82 में परिसीमन आयोग की शक्तियां और उसके काम बताए गए हैं.

परिसीमन आयोग के काम को संविधान के अनुच्छेद 82 में परिभाषित किया गया है. संविधान के अनुच्छेद 82 के 10 साल में जब एक बार जनगणना होगी, तो उसके बाद परिसीमन किया जाएगा. संविधान के 84वें संशोधन के मुताबिक 2026 के बाद जब पहली जनगणना होगी और उसके आंकड़े प्रकाशित हो जाएंगे, तो उसके बाद ही लोकसभा का परिसीमन किया जाएगा. और जब तक ऐसा नहीं होता है लोकसभा का परिसीमन 1971 की जनगणना के मुताबिक ही होगा. वहीं राज्यों की विधानसभाओं का परिसीमन 2001 की जनगणना के मुताबिक होगा.

आखिरी परिसीमन कब हुआ था?

Pratibha - Feature
देश में आखिरी परिसीमन 2008 में हुआ था. तब देश की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इस परिसीमन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दी थी.

भारत में सबसे पहले 1952 में परिसीमन आयोग गठित किया गया था. इस आयोग ने केंद्र के लिए लोकसभा और राज्यों के लिए विधानसभा सीटों की सीमाएं तय की थीं. इसके बाद 1963 और 1973 में भी परिसीमन आयोग का गठन किया गया था. आखिरी परिसीमन आयोग का गठन 12 जुलाई, 2002 को किया गया था. दिसंबर, 2007 में परिसीमन आयोग ने अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप दीं. लेकिन परिसीमन नहीं हुआ. मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और फिर कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि परिसीमन आयोग की सिफारिशें क्यों नहीं लागू की गईं? 4 जनवरी, 2008 को कैबिनेट कमिटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स ने परिसीमन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी. उस वक्त देश की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 19 फरवरी, 2008 को परिसीमन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी और फिर देश के कई राज्यों में परिसीमन हुआ. कर्नाटक पहला राज्य था, जिसमें परिसीमन आयोग, 2002 की सिफारिशों के आधार पर विधानसभा चुनाव हुए थे.

जम्मू-कश्मीर में क्या है विधानसभा सीटों की स्थिति?

तस्वीर 9 अगस्त की है. जब लोग नमाज पढ़ने के लिए अपने घरों से निकल रहे थे, अर्धसैनिक बल सड़कों पर तैनात थे.
तस्वीर 9 अगस्त की है. जब लोग नमाज पढ़ने के लिए अपने घरों से निकल रहे थे, अर्धसैनिक बल सड़कों पर तैनात थे.

फिलहाल जम्मू-कश्मीर राज्य के हिस्से में कुल 111 विधानसभाएं हैं. इनमें से 83 सीटें जम्मू-कश्मीर की हैं, जबकि चार सीटें लद्दाख की हैं. इसके अलावा 24 और सीटें पाक अधिकृत कश्मीर की हैं. अकेले जम्मू में 37 और कश्मीर में 46 विधानसभा की सीटें हैं. जब भी जम्मू-कश्मीर में चुनाव होता है, तो सिर्फ 87 सीटों पर ही चुनाव होता है, पाक अधिकृत कश्मीर की सीटों पर चुनाव नहीं होता है. और जम्मू-कश्मीर में किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 56 सीटें चाहिए होती हैं.

परिसीमन होने पर क्या बदलाव होंगे?

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परिसीमन में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या को बढ़ाने का प्रस्ताव है.

इस पूरे परिसीमन की चर्चा जिस एक आधार पर हो रही है, वो है Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019. यानी कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019. इस विधेयक में ये प्रस्ताव है कि जब लद्दाख जम्मू-कश्मीर से अलग हो जाएगा, तो उसकी चार सीटें कम हो जाएंगी. अकेले जम्मू-कश्मीर में कुल 107 सीटें रह जाएंगी. और जब पुनर्गठन होगा तो सीटों की संख्या को 107 से बढ़ाकर 114 कर दिया जाएगा. ये परिसीमन 2011 की जनगणना के हिसाब से होगा और 2026 तक ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी. और जब ऐसा होगा, तो जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी को 58 सीटें चाहिए होंगी.

और इस पूरे परिसीमन की राजनीति क्या है?

2011 की जनगणना के मुताबिक जम्मू-कश्मीर राज्य की जनसंख्या 12,541,302 है. यानी कि करीब 1.25 करोड़. अब अगर लद्दाख को छोड़ दें तो जम्मू-कश्मीर राज्य को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है. जम्मू और कश्मीर.

# जम्मू की आबादी है 5,378,538. यानी कि कुल आबादी का करीब 42.89 फीसदी. और यहां विधानसभा सीटों की संख्या है 37. जम्मू का क्षेत्रफल है 26200 वर्ग किलोमीटर. यानी कि जम्मू क्षेत्र में 710 वर्ग किलोमीटर पर एक विधायक चुना जाता है.

# कश्मीर की आबादी है 6,888,475 यानी कि कुल आबादी का करीब 54.93 फीसदी. और यहां विधानसभा सीटों की संख्या है 46. कश्मीर क्षेत्र का क्षेत्रफल है 15900 वर्ग किलोमीटर. यानी कि कश्मीर क्षेत्र में 349 वर्गकिलोमीटर पर ही एक विधायक चुना जाता है.

अमित शाह ने राज्यसभा में कश्मीर पर बड़ा फैसला सुनाया.
अमित शाह ने राज्यसभा में कश्मीर लिए गए फैसलों का जिक्र किया था, जिसमें जम्मू-कश्मीर के परिसीमन की बात थी.

अब परिसीमन आयोग को इस पूरे समीकरण को नए सिरे से स्थापित करना होगा. यानी कि जम्मू-कश्मीर की जनसंख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से एक औसत निकालना होगा और फिर नए सिरे से विधानसभाओं की सीमा तय करनी होगी. इसकी एक और जो सियासी वजह है, वो ये है कि जम्मू में करीब 62.6 फीसदी हिंदू और 33.5 फीसदी मुस्लिम हैं. वहीं कश्मीर क्षेत्र मुस्लिम बहुल है. अब नए सिरे से परिसीमन होने पर जम्मू क्षेत्र में सीटों की संख्या में इजाफा हो जाएगा, क्योंकि वहां की आबादी भी ज्यादा है और क्षेत्रफल भी. और बीजेपी लंबे समय से जम्मू क्षेत्र में विधानसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रही है.

क्या कह रहा है चुनाव आयोग?

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जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के लिए 13 अगस्त को चुनाव आयोग की बैठक हुई थी.

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों ने 13 अगस्त को एक बैठक की. इस बैठक में ये तय हुआ कि जब तक गृह मंत्रालय की ओर से चुनाव आयोग को परिसीमन का पत्र नहीं आता है, प्रक्रिया शुरू नहीं होगी. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में जो विधानसभा चुनाव होगा, वो नए परिसीमन के आधार पर ही होगा. अभी 31 अक्टूबर, 2019 वो तारीख तय की गई है, जब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील हो जाएंगे. ये तारीख इसलिए तय की गई है, क्योंकि 31 अक्टूबर को देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्मदिन होता है.


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