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आपके स्मार्टफोन की बैटरी पर 'ताला' लगा है, कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं?

स्मार्टफोन कंपनियों ने बैटरी की पूरी क्षमता पर 'ताला' लगाया हुआ है. कई निर्माता बैटरी की फ़िज़िकल क्षमता का एक हिस्सा बफ़र के तौर पर सुरक्षित रखते हैं. माने जो बैटरी है तो 7000mAh की है, तो उसका कुछ हिस्सा यानी 500-1000mAh इस्तेमाल में नहीं लिया जाता है.

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चीनी कंपनियों ने स्मार्टफोन बैटरी पर ताला लगाया है

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  • स्मार्टफोन कंपनियों ने बैटरी की वास्तविक क्षमता का एक हिस्सा सुरक्षित रखा है जिससे बैटरी की दीर्घकालिक स्थिरता बनी रहे और समय के साथ क्षमता में गिरावट कम हो।
  • चीनी कंपनियों के स्मार्टफोन बड़ी बैटरियों के साथ आते हैं, लेकिन बैटरी लॉकिंग के कारण वे अपेक्षित बैकअप समय नहीं दे पाते, जबकि अमेरिकी और कोरियाई कंपनियां कम क्षमता वाली बैटरियां उपयोग करती हैं।
  • बैटरी लॉकिंग से स्मार्टफोन की बैटरी की उम्र बढ़ती है और कंपनियां इसे धीरे-धीरे सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से खोलती हैं, जिससे भविष्य में बैटरी प्रदर्शन बेहतर हो सकता है।

स्मार्टफोन अब 6000-7000-8000mAh की बड़ी बैटरी के साथ आने लगे हैं. कुछेक फोन की बैटरी तो 10 हजार हो चली है. हम आईफोन, सैमसंग, गूगल की बात नहीं कर रहे हैं. वहां तो मामला 5000mAh तक भी बड़ी मुश्किल से पहुंच रहा है. हम तो बात कर रहे हैं चीनी कंपनियों के स्मार्टफोन की, जिन्होंने बैटरी के मामले में बाजा फाड़ रखा है. लेकिन इत्ती बड़ी बैटरी के बाद भी ज्यादातर स्मार्टफोन दिन ढलते तक दम तोड़ देते हैं. कुछ डिनर टाइम तक भी चल जाते हैं, मगर डेढ़ या दो दिन का साथ शायद ही कोई देता हो. ऐसा क्यों?

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बैटरी पर लगा है 'ताला'

बड़ी बैटरी के बावजूद भी स्मार्टफोन उतना नहीं चलते जितना उनको चलना चाहिए. माने जब बैटरी 5000mAh थी तो शाम ढलने से पहले चार्जर तलाशना पड़ता था. डबल बैटरी आने से मामला देर रात या अल-सुबह तक जाना चाहिए था, मगर डिनर टाइम से आगे जाता नहीं. हालांकि बैटरी के 'फुर्र' होने के कई कारण होते हैं. मसलन प्रोसेसर से लेकर ज्यादा गर्मी और ठंडी वाला मौसम. लेकिन एक कारण और भी है.

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स्मार्टफोन कंपनियों ने बैटरी की पूरी क्षमता पर ताला लगाया हुआ है. कई निर्माता बैटरी की फ़िज़िकल क्षमता का एक हिस्सा बफ़र के तौर पर सुरक्षित रखते हैं. माने जो बैटरी 7000mAh की है उसका कुछ हिस्सा यानी 500-1000mAh इस्तेमाल में नहीं लिया जाता है. इस हिस्से का कोई फार्मूला नहीं है. माने कौन सी बैटरी का कितना हिस्सा सेफ हाउस में रखा गया है वो स्मार्टफोन कंपनी पर डिपेंड करता है.

Battery Lock
Battery Lock तस्वीर साभार: Tech Home
बैटरी पर ताला लगा क्यों है?

बैटरी क्षमता को लॉक करने का मकसद बैटरी की सेहत को लंबे समय तक बनाए रखना और समय के साथ उसकी क्षमता में होने वाली गिरावट को कम करना है. अब ये कोई बताने वाली बात तो है नहीं कि इस्तेमाल के साथ बैटरी का दमखम कम ही होता है. इसलिए पहले-पहल पूरी क्षमता को ऑफ रखा जाता है तो फिर समय के साथ सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए उसे ओपन किया जाता है.

औसतन लगभग 6 फीसदी और अधिकतम 13 फीसदी तक ताला मारा जाता है. वैसे ज्यादातर डिवाइस में इसकी रेंज 4-7 फीसदी के बीच में होती है. एक ही कंपनी के दो डिवाइस जिसमें एक जैसी बैटरी लगी है उसमें भी अलग-अलग लॉक लगे होते हैं. इसलिए कई बार एक जैसी बैटरी के बाद भी बैकअप अलग मिलता है.

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कुल जमा बात ये कि बैटरी लॉक करके स्मार्टफोन कंपनियां काम तो अच्छा कर रही हैं मगर इसके बारे में बताती नहीं. हालांकि अगर बता देंगी तो कुछ गलत नहीं होगा. लो जी, यहां भी चीनी कंपनियां तकनीक में अमेरिकी और कोरियन कंपनियों से आगे निकल गईं. तेरा खून कब खौलेगा रे ऐप्पल, सैमसंग.  

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