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टॉयलेट सीट से ज्यादा आपके स्मार्टफोन पर हैं बैक्टीरिया? सच टेक एक्सपर्ट से जान लीजिए

बाथरूम में फोन लेकर जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिए (Which is dirtier smartphone or toilet seat). जितने फोन उतनी बातें. शायद इस बहस पर अब लगाम लग सकती है क्योंकि इसकी जांच हुई और जो पता चला वो वाकई आंखे खोलने वाला है. किटाणु का किटाणु और फोन का फोन हो गया.

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फोन गंदा या टॉयलेट सीट

स्मार्टफोन में टॉयलेट सीट से ज्यादा किटाणु (Which is dirtier smartphone or toilet seat) होते हैं. अब ऐसा होता है या नहीं उसमें बाद में जाएंगे मगर पहले टॉयलेट और स्मार्टफोन के कॉम्बो पर बात कर लेते हैं. ये बहुत ही बेकार गठजोड़ है क्योंकि फोन के चक्कर में टॉयलेट में कुछ ज्यादा ही टाइम लग जाता है. वो काम करने में नहीं जो करने गए थे बल्कि रील-रील खेलने में. इसलिए फोन टॉयलेट में लेकर नहीं जाएं तो ही अच्छा. अब किटाणु के अणु पर बात करते हैं. अक्सर ऐसा कहा जाता है कि फोन में टॉयलेट सीट से ज्यादा जर्म होते हैं. बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं.

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बाथरूम में फोन लेकर जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिए वगैरा-वगैरा. शायद इस बहस पर अब लगाम लग सकती है क्योंकि इसकी जांच हुई और जो पता चला वो वाकई आंखें खोलने वाला है. किटाणु का किटाणु और फोन का फोन हो गया.

कौन ज्यादा गंदा है

एक बड़े टेक एक्सपर्ट हैं Arun Maini जिन्होंने बाथरूम में घुसकर ये पता किया की कौन ज्यादा गंदा है. शायद इस नाम से अंदाजा नहीं लगे तो इनके डिजिटल नाम से आगे बढ़ते हैं. चैनल का नाम mrwhosetheboss जिनके आज की तारीख में यूट्यूब पर 2 करोड़ से ज्यादा सब्स्क्राइबर हैं. अरुण अपना iPhone लेकर टॉयलेट में घुसे.

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यहां उन्होंने पहले अपने आईफोन कवर से सैंपल लिए और फिर टॉयलेट सीट से. वीडियो हम लगा रहे हैं मगर पहले बता देते हैं. देखने में घिनापन लगेगा. कुछ दिनों के बाद लैब रिपोर्ट आई वो थोड़ा चौकाने वाली है.

टॉयलेट सीट किटाणु, जर्म, बैक्टीरिया से भरी हुई है जो स्वाभाविक है. मगर आईफोन भी कोई साफ सुथरा नहीं है. हालांकि टॉयलेट सीट के मुकाबले में तो साफ कह सकते हैं मगर सेहत के मुकाबले में तो कतई नहीं. भले कम गंदा है मगर है तो सही. यही किटाणु पेट में जाते हैं और फिर क्या गुल खिलाते हैं वो सभी को पता है. वैसे जरूरी नहीं कि हर बार फोन कम गंदा हो. अब कोई फोन सालों से साफ नहीं किया गया या फिर उसका कवर कभी साफ नहीं किया गया तो रिजल्ट और गंदा होगा. 

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इसलिए सौ की सीधी एक बात. बेहतर होगा कि टॉयलेट और स्मार्टफोन को अलग-अलग रखा जाए. वैसे भी टॉयलेट सीट के ऊपर बैठकर फोकस फोन पर नहीं बल्कि पेट को हल्के करने पर होना चाहिए. क्योंकि पॉटी का रंग और आकार बहुत कुछ कहता है. जो पॉटी हुई अच्छी तो साल के डेढ़ करोड़ कमाने का जुगाड़ है. पढ़ लीजिए.  

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