WhatsApp अपने एंड्रॉयड बीटा यूजर्स को यूपीआई से पैसे भेजने पर कैशबैक ऑफर दे रहा है.
WhatsApp पिछले कई महीनों से अपनी पेमेंट सर्विस की टेस्टिंग कर रहा है. जो वॉट्सऐप के एंड्रॉयड ऐप का बीटा वर्ज़न इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए UPI आधारित यह पेमेंट सर्विस कई दिनों से लाइव भी है. अच्छी खबर ये है कि इस त्योहारी सीज़न में वॉट्सऐप ने अपने पेमेंट प्लेटफॉर्म से लोगों को जोड़ने के लिए कैशबैक देना शुरू किया है. लोगों के पास वॉट्सऐप पेमेंट के ज़रिए हर ट्रांसफर पर पूरे 51 रुपये कमाने का मौका है. लेकिन इसकी कुछ लिमिट है, कुछ जुगाड़ भी लगाना पड़ेगा. क्या है ये जुगाड़ और कैसे आप वॉट्सऐप से पैसे कमा सकते हैं, आइए बताते हैं.
पैसे भेजकर ऐसे कमाएं पैसे
वॉट्सऐप से किसी को पैसा भेजने या पाने के लिए पहले आपको अपने वॉट्सऐप यूपीआई प्रोफाइल एक्टिव करना होगा. मतलब आपको अपना बैंक खाता लिंक करना होगा. ये कैसे करना है? अपने मोबाइल में वॉट्सऐप पर जहां मैसेज टाइप करते हैं, वहां एक रूपये (₹) का एक सिंबल दिखेगा. इस पर क्लिक करके प्रोसीजर फॉलो करते हुए आप यूपीआई प्रोफाइल बना सकते हैं. ये प्रक्रिया बाक़ी सारे पेमेंट ऐप की तरह होती है.

ये काम होने के बाद आप किसी यूजर को पैसे भेजने के लिए तैयार हैं. लेकिन पैसे उसे ही भेजे जा सकते हैं, जिसने खुद वॉट्सऐप यूपीआई प्रोफाइल बनाकर अपने बैंक से लिंक कर रखा होगा. ये हो जाए तो बस यूजर चुनिए, कितने पैसे भेजने हैं, ये बताइए और सेंड कर दीजिए. इधर पैसे गए, उधर से आपके अकाउंट में 51 रुपये का रिफंड आ जाएगा.

मज़ेदार बात ये है कि कैशबैक पाने के लिए ट्रांसफर राशि की कोई सीमा नहीं है. यदि आप 1 रुपये भी भेजते हैं. जी हां, सिर्फ 1 रुपये भी तो झट से 51 रुपये कैशबैक आएगा. लेकिन इसके कुछ नियम शर्तें भी हैं. कैशबैक ज्यादा से ज्यादा पांच बार मिल सकता है. यानी आपके अकाउंट में अधिकतम 255 रुपये ही वापस कैशबैक के तौर पर आएंगे. और इसके लिए कम से कम 1-1 रुपये पांच बार ट्रांसफर करने होंगे. प्रभावी तौर पर कुल कमाई 250 रुपये की.

ध्यान रखिएगा कि ये एक UPI आधारित सुविधा है जिसका मतलब पैसे का आदान प्रदान आपके खाते से होगा, ये कोई वॉलेट नहीं है. एक बार आप अपना अकाउंट लिंक कर लेंगे तो आपको पेमेंट करने का विकल्प मिल जाएगा. आप पैसा मोबाइल नम्बर पर भेज सकते हैं, तो नम्बर अकाउंट से लिंक होना चाहिए. एक QR कोड भी आपको मिलेगा जिसको स्कैन करके भी आप पैसा ले सकते हैं.
WhatsApp Beta वर्जन क्या होता है?
51 रुपये पाने का ये ऑफ़र अभी सिर्फ़ वॉट्सऐप के Android Beta यूज़र्स के लिए है. वॉट्सऐप एंड्रॉयड मतलब आपके एंड्रॉयड फोन पर जो वॉट्सऐप चलता है. और किसी भी ऐप के बीटा वर्जन से मतलब एक तरह के कच्चे माल से है. समझिए जैसे गुंथा हुआ आटा. जैसे आटे से रोटियाँ बनकर आती हैं वो है फ़िनिश्ड प्रोडक्ट. बीटा वर्जन में ऐप की सर्विसेज को टेस्ट किया जाता है, कुछ यूजर्स को जारी करके. इस दौरान जो बग (कमियां) मिलती हैं उन्हें दूर किया जाता है. ये सभी यूजर्स के लिए ये रोलआउट नहीं होता. एक बार जब टेस्टिंग फेज पूरा हो जाता है, तब कंपनी उसका ऑफिशली अपडेट जारी करती है. और आपके पास आता है एकदम मक्खन ऐप्लिकेशन.
जुगाड़ से ही चलेगा बीटा वर्जन
अफसोस की एक बात ये है कि वॉट्सऐप के बीटा टेस्टिंग के लिए साइनअप करना तो आसान है, लेकिन अभी आपको अपने फोन पर बीटा वर्ज़न तुरंत नहीं मिल पाएगा. वॉट्सऐप के इस प्रोग्राम के लिए साइनअप करने वाले यूज़र्स की संख्या फिलहाल अधिकतम सीमा तक पहुंच गई है. जब आप गूगल के प्ले स्टोर से बीटा टेस्ट वर्जन डाउनलोड करने जाएंगे तो आपको ये मैसेज दिखाई देगा.

मतलब आप इसे ऐसे यूज नहीं कर पाएंगे. तो कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं? इसके लिए आपके पास APK फाइल मोबाइल में डाउनलोड करने का विकल्प है. लेकिन APK फाइल को अपने डिवाइस पर इंस्टॉल करने का सिक्योरिटी रिस्क होता है. वैसे लल्लनटॉप टीम के कई लोगों ने ऐसा करके कैशबैक का फायदा उठाया है. लेकिन हम आपको APK फाइल सीधे डाउनलोड करने की सलाह नहीं देंगे. अगर आप रिस्क के लिए तैयार हैं तो मर्जी आपकी. इंटरनेट पर लेटेस्ट APK फाइल आपको मिल जाएंगी. उसे डाउनलोड करें और स्टेप बाई स्टेप चलते हुए इंस्टॉल कर लें.
क्या आम यूजर्स के लिए भी ये ऑप्शन आएगा?
जैसा कि ऊपर बताया कि अभी ये ऑफ़र सिर्फ़ वॉट्सऐप के Android Beta यूज़र्स के लिए है. लेकिन निराश होने की ज़रूरत नहीं है. अगर यह फीचर बीटा यूज़र्स के लिए आया है तो आने वाले दिनों में वॉट्सऐप के आम यूज़र्स की भी बल्ले-बल्ले होगी. बताते चलें कि WhatsApp की यूपीआई सर्विस की सीधी टक्कर Google Pay और Phonepe से है. इन दोनों प्लेटफॉर्म ने भी कस्टमर्स के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कैशबैक ट्रांसफर रास्ता अपनाया था. कई कंपनियां यूपीआई बेस्ड पेमेंट सर्विस पर लॉगइन करने पर कई तरह से डिस्काउंट देती हैं. अब वॉट्सऐप पर भी कुछ ऐसा ही किया जा रहा है.