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7000mAh बैटरी से लेकर टेलीस्कोपिक कैमरा तक, चीनी स्मार्टफोन के ये फीचर काम आते भी हैं क्या?

Chinese smartphone top features: नई डिजाइन से लेकर तगड़े फीचर्स और बड़ी बैटरी फिट करने में चीनी स्मार्टफोन सबसे आगे हैं. फोन जब हाथ में आता है तो लगेगा जैसे Christopher Nolan की फिल्म का कोई डिवाइस हाथ में आ गया हो. लेकिन क्या यह सारे फीचर्स वाकई में काम आते हैं.

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चीनी स्मार्टफोन के फीचर्स रोज कितने काम के

स्मार्टफोन की दुनिया में इन दिनों चीनी कंपनियां ऐसी दौड़ लगा रही हैं कि अमेरिकी और साउथ कोरियन दिग्गज पीछे छूटते नजर आते हैं. Apple के चाहने वालों और Samsung के समर्थकों को यह बात चुभ सकती है, लेकिन बाजार के आंकड़े कुछ ऐसा ही इशारा करते हैं. नई डिजाइन, दमदार फीचर्स और बड़ी बैटरी के मामले में चीनी फोन अक्सर बाजी मार लेते हैं.

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लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है. क्या ये चमकदार फीचर्स रोजमर्रा की जिंदगी में उतने ही काम के साबित होते हैं, जितना विज्ञापनों में दिखाया जाता है? भारी स्पेसिफिकेशन और आक्रामक मार्केटिंग से फोन तो बिक जाते हैं, मगर क्या शुरुआती उत्साह खत्म होने के बाद भी उनका प्रदर्शन वैसा ही रहता है? यानी पहली नजर के प्यार के बाद भी रिश्ता उतना ही मजबूत रहता है या नहीं. चलिए, इसकी पड़ताल करते हैं.

कागज पर कहानी अलग

चीनी स्मार्टफोन के साथ आने वाले कुछ फीचर्स पर जरा नजर डालिए. कैमरे में Telescopic zoom. फोन को ठंडा रखने के लिए Active cooling fan और ब्लोअर. 7000-8000-9000mAh की बैटरी और 100-120W की चार्जिंग. सच बात है कि ऐसे फीचर आईफोन, सैमसंग और गूगल में मिलना मुश्किल है. अगर कुछ मिलेंगे भी तो उस वाले डिवाइस का दाम लाख रुपये के ऊपर होगा. वहीं चीनी स्मार्टफोन महज कुछ हजार में मिल जाएगा. फोन जब हाथ में आएगा तो लगेगा जैसे Christopher Nolan की फिल्म का कोई डिवाइस हाथ में आ गया हो. पहला पखवाड़ा फोन के साथ शानदार बीतेगा. महीना भी अच्छा गुजरेगा और तिमाही भी ठीक कटेगी. लेकिन उसके बाद क्या? चलिए कागज की कहानी को यथार्थ के धरातल पर लाते हैं.

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# Telescopic zoom का क्या किया आपने. कितने बार आप चांद के पार गए या फिर कितनी बार पड़ोस की बिल्डिंग में झाँका. याद भी नहीं क्योंकि वाकई कुछ दिन के बाद कोई इनका इस्तेमाल नहीं करता है.

# 10 हजारी हो चली बैटरी का क्या इस्तेमाल हुआ. आम दिनों में एकदम नहीं क्योंकि दिनभर काम करके तो आप घर आ ही गए. अब घर आ गए तो फिर बैटरी 50 फीसदी बचे या 10. क्या फर्क पड़ेगा क्योंकि चार्जिंग का जुगाड़ तो है ही सही.

# 120W की चार्जिंग से आपने कितने मिनट बचा लिए. आम दिनों के हिसाब से देखें तो दिनचर्या वही है. आपके पास फोन चार्ज करने के लिए पर्याप्त समय है. कुछ मिनट की जगह बैटरी अगर कुछ घंटे में भी चार्ज हुई तो कुछ बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा. इसकी वजह से शायद आप उतने देर फोन से दूर रहेंगे, वो अलग फायदा.

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# ठंडा इज नॉट कूल- गेम खेलते समय फोन गरम नहीं हो इसके लिए सच्ची में पंखा लगा है. काम भी करता है मगर आप कितनी देर गेम खेलते हो. याद कर लो. आगे कछु कहने की जरूरत नहीं.

गेमिंग फोन-सांकेतिक तस्वीर
गेमिंग फोन-सांकेतिक तस्वीर  

चलिए फीचर्स को एक तरफ रख भी दीजिए तो आगे क्या होता, वो भी बता देते हैं. आपके फोन का कैमरा वैसा नहीं रहा जैसा पहले दिन था. यूजर इंटरफ़ेस में गड़बड़ हो रही है. सॉफ्टवेयर अपडेट का कुछ पता नहीं. अगर आ भी गया तो कहीं फोन स्क्रीन ग्रीन तो नहीं हो रही. इन सबसे इतर फोन की रीसेल वैल्यू का क्या? सभी को पता है कि दाम का दम कुछ महीने में निकल जाता है.

कथा-सार यह नहीं है कि चीनी स्मार्टफोन बेकार हैं. कैमरा क्वालिटी में वो आईफोन और सैमसंग से बहुत आगे हैं. बैटरी के मामले में उनको पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है लेकिन क्या वो आपके काम के हैं. शायद नहीं क्योंकि सेल्स के आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं. दुनिया भर में बिकने वाले फोन्स की लिस्ट में टॉप 10 पर आईफोन और सैमसंग है.

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ऐसा पिछले चार सालों से लगातार हो रहा है. अब फैसला कीजिए कि आपको जमाझम फीचर्स चाहिए या एक सालों चलने वाला रिलायबल फोन जिसमें सब मक्खन जैसा चलता है. दो-चार बाद जब उसको सेल किया जाता है तो नए फोन का डाउनपेमेंट भी देकर जाता है. इसलिए आंखे चुँधियाने वाले विज्ञापन के भरोसे फोन मत लीजिए.

आपकी जरूरत और आपकी जेब को जो सही लगे. वही कीजिए. वैसे आईफोन लवर्स, एक बात सच्ची बताना. पहली लाइन पढ़कर बुरा लगा था ना. लेकिन यह क्या हुई. एकदम से हमने जज़्बात बदल दिए क्या.

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