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पुलिस की एक कॉल पर बैंक अकाउंट फ्रीज करना गलत, ये नियम नहीं माना तो बैंक पर होगा क्रिमिनल केस

Allahabad High Court ने फैसला दिया है कि पुलिस बस यूं ही कोई अकाउंट ब्लॉक नहीं करवा सकती है. साइबर फ्रॉड से कथित तौर पर जुड़े किसी भी केस में अब पुलिस को यह साबित करना होगा कि वाकई इस अकाउंट से फ्रॉड हुआ है.

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साइबर फ्रॉड में बैंक अकाउंट फ्रीज करना गैरकानूनी

साइबर क्राइम की वजह से अगर आपका बैंक अकाउंट फ्रीज है तो आपके लिए राहत भरी खबर (freezing entire bank account is illegal) है. कौन सा साइबर क्राइम, मैंने तो कुछ किया ही नहीं तो कैसे बैंक अकाउंट फ्रीज हो सकता है. सब बताते हैं, लेकिन पहले जरा राहत भरी खबर बताते हैं. Allahabad High Court ने एक ऐसे ही केस में सुनवाई करते हुए फैसला दिया है कि साइबर फ्रॉड कि वजह से अकाउंट को होल्ड करना गैर कानूनी है. बैंक सिर्फ पुलिस के कहने से अकाउंट को होल्ड नहीं कर सकती है. कोर्ट ने इसके लिए बाकायदा नई व्यवस्था भी तय की है.

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Justice Shekhar B. Saraf और  Justice Manjive Shukla की बेंच ने पुलिस को 5 पॉइंट का प्रोटोकॉल बनाने और साथ ही मजिस्ट्रेट को 24 घंटे के अंदर सूचित करने का भी आदेश दिया है. अब बताते हैं क्या है पूरा मामला.

क्या है बैंक अकाउंट फ्रीज?

एक दिन आप सुबह सोकर उठें और आपको पता चले कि आपका बैंक अकाउंट ब्लॉक हो गया है तो आप क्या करेंगे. बताने की जरूरत नहीं कि आप अपने बैंक में फोन करेंगे या नजदीकी ब्रांच में जाएंगे. यहां आपको पता चले कि आपका अकाउंट बैंक ने नहीं बल्कि साइबर पुलिस ने ब्लॉक करवाया है तो आप क्या करेंगे. अब आप कुछ नहीं करेंगे बल्कि यह सोचेंगे कि आपने क्या किया क्योंकि बैंक के पास आपको बताने के लिए कुछ नहीं होगा. वो सिर्फ आपके अकाउंट को ब्लॉक करेगा जिसे बैंकिंग की भाषा में lien कहते हैं.

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क्यों होता है बैंक अकाउंट फ्रीज

साइबर पुलिस जब किसी भी ऑनलाइन अपराध की जांच कर रही होती है तो वो मनी ट्रेल पर कड़ी नजर रखती है. मनी ट्रेल मतलब पैसा किस अकाउंट से किस अकाउंट में गया. उस पैसे से किसे भुगतान किया गया. अब इस सबके बीच अगर ऐसे किसी भी पैसे से कोई पैसा आपके अकाउंट में आया और वो लेनदेन पुलिस के हाथ लगा तो बस फिर. साइबर पुलिस आपका भी अकाउंट ब्लॉक करवा देगी. ब्लॉक मतलब एकदम ब्लॉक. आप किसी भी प्रकार का लेनदेन कर ही नहीं पाएंगे.

कोर्ट ने राहत दिलाई

लाइव लॉ के मुताबिक कोर्ट ने KHALSA MEDICAL STORE VS RBI के केस में सुनवाई करते हुए फैसला दिया कि पुलिस बस यूं ही कोई अकाउंट ब्लॉक नहीं करवा सकती है. कोर्ट ने कहा कि बैंक अकाउंट को फ्रीज करना तो समझ आता है मगर जमापूंजी से लेकर लेनदेन बंद करने का कोई तुक नहीं है. ऐसे किसी भी केस में अब पुलिस को यह साबित करना होगा कि वाकई में फ्रॉड हुआ है. अकाउंट वाकई फ्रॉड से जुड़ा हुआ है.

ऐसे केस में FIR होना अनिवार्य है. पुलिस बैंक को कॉल करके अकाउंट होल्ड नहीं कर सकती है. पुलिस को FIR की कॉपी के साथ में कौन से लेनदेन से फ्रॉड हुआ है, वो सब बैंक को देना ही होगा.

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पुलिस बैंक से सिर्फ उसी अमाउन्ट को ब्लॉक करने के लिए कह सकती है जो फ्रॉड कि चेन का हिस्सा है. इतना सब होने के बाद 24 घंटे के भीतर पुलिस को संबंधित कोर्ट और  मजिस्ट्रेट को सूचित भी करना होगा.

कोर्ट ने पुलिस के साथ बैंक को निर्देश दिया है कि अगर उसने बिना प्रोसेस को फॉलो किए अकाउंट फ्रीज किया तो उसके ऊपर सिविल और क्रिमिनल केस चलेगा.

सीधी बात यह है कि अकाउंट फ्रीज करने के लिए अब कॉल या नॉर्मल इनफॉर्मेशन से काम नहीं चलेगा. इसलिए अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो तो बैंक जाइए और उसे कोर्ट के फैसले के बारे में बता दीजिए.

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