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Spotify का नशा जेब पर भारी लेकिन दिल पर नहीं, बेसिक फीचर्स के लिए भी पैसा लुटा रहे यूजर्स

Spotify ने भारत के मार्केट में कमाल कर दिया है. कंपनी ने वित वर्ष 24-25 में सब्सक्रिप्शन मॉडल से 74 करोड़ का मुनाफा कमाया है जबकि पिछले वित वर्ष तक उसका घाटा 143 करोड़ था. आखिर कैसे कंपनी संगीत प्रेमियों की जेब से पैसा निकालने में कामयाब रही?

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Spotify ने सब्सक्रिप्शन मॉडल से बाजा फाड़ दिया है

अक्टूबर 2023 की बात है. म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप Spotify ने इंडिया में अपने यूजर्स से कुछ कंट्रोल छीन लिए थे. कंपनी ने shuffle, repeat, skip forward जैसे बेसिक फीचर्स के लिए भी सब्सक्रिप्शन मॉडल अनिवार्य कर दिया था. कंपनी के इस कदम की जमकर आलोचना हुई. सोशल मीडिया पर अमेरिकन कंपनी की खूब छीछालेदर हुई क्योंकि मार्केट में ज्यादातर ऐप्स मुफ़्त में स्ट्रीमिंग सर्विस दे रहे थे. ज्यादा से ज्यादा गाने के बीच में विज्ञापन देखना पड़ता था. लेकिन फीचर्स के कंट्रोल किसी ने नहीं रोके. कंपनी को खूब खरी खोटी सुनाई गई. लेकिन वो साल दूसरा था और ये साल दूसरा है.

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Spotify ने भारत के मार्केट में कमाल कर दिया है. कंपनी ने वित वर्ष 24-25 में सब्सक्रिप्शन मॉडल से 74 करोड़ का मुनाफा कमाया है जबकि पिछले वित वर्ष तक उसका घाटा 143 करोड़ था. आखिर कैसे कंपनी संगीत प्रेमियों की जेब से पैसा निकालने में कामयाब रही?

Spotify ने वाकई बाजा फाड़ दिया

Spotify ने साल 2025 में इंडिया से 514 करोड़ का रेवेन्यू जनरेट किया. सब्सक्रिप्शन से 317 करोड़ की आय हुई और विज्ञापनों से 187 करोड़. कमाई रही 74 करोड़. 74 करोड़ वैसे तो कोई बड़ी रकम नहीं, मगर भारत जैसे देश के मद्देनजर ये बड़ी बात है. क्योंकि यहां यूजर्स को ऐप्स पर मुफ़्त का चंदन घिसने की आदत लगी है. वे 200 रुपये महीना का खर्च करके गाना क्यों सुनेंगे? लेकिन स्पॉटिफाई पर सुन रहे हैं.

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ऐसा भी नहीं है कि मार्केट में दूसरे ऐप्स नहीं. ऐप्पल म्यूजिक से लेकर यूट्यूब म्यूजिक, जियो सावन, अमेजन म्यूजिक जैसे कितने ही ऐप हैं जो मुफ़्त हैं. इनका बेसिक वर्जन फ्री मिलता है तो प्रीमियम भी कई ऑफर्स में नत्थी हो रखा. ब्रॉडबैन्ड से लेकर प्रीपेड और पोस्ट पेड मोबाइल के साथ ऐप्स के सब्सक्रिप्शन मिलते हैं. फिर कानों को Spotify क्यों चाहिए?

लाइब्रेरी और क्वॉलिटी का कॉम्बो

Spotify म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विस तो है लेकिन गानों की सबसे बड़ी लाइब्रेरी भी इनके पास है. फिल्मों और गानों से इतर इन्होंने आर्टिस्ट और पॉडकास्ट बनाने वालों से भी कॉन्ट्रेक्ट किया हुआ है. कई बड़े आर्टिस्ट सिर्फ Spotify प्लेटफॉर्म के लिए म्यूजिक बनाते हैं. इसके इतर, कंपनी ने ऑडियो फीचर्स और म्यूजिक क्वॉलिटी को एकदम प्रीमियम बना रखा है. High Definition स्ट्रीमिंग, Spatial Audio जैसे फीचर्स यूजर्स को इधर ही मिलेंगे. माने गाना जैसा रिकॉर्ड हुआ उसी क्वॉलिटी में प्ले होता है. दूसरे ऐप्स इस मामले में बहुत पीछे हैं. कई ऐप्स में तो गाने की क्वॉलिटी एकदम ही गिर जाती है. ऐसे में अगर कभी यूजर ने Spotify का इस्तेमाल कर लिया तो फिर उसके कान खड़े हो जाते हैं.

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इसलिए Spotify ने तमाम विरोधों के बाद भी अपने सब्सक्रिप्शन मॉडल को जारी रखा. अब जब कंपनी इंडिया में नोट छाप रही तो दूसरे सब्सक्रिप्शन ऐप्स को भी उम्मीद का गाना सुनाई दे रहा है. वैसे भी अच्छी क्वॉलिटी के लिए पैसे खर्च कर लेने चाहिए. विश्वास नहीं तो एक बार यूट्यूब प्रीमियम चलाइए. बिना विज्ञापन के वीडियो देखने का अलग ही सुख है.

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