मेटा ने मौत के बाद भी अकाउंट चालू रखने वाले फीचर को बंद करने का फैसला किया है. अरे यह कब हुआ. क्या था यह फीचर. सब बताते. फर्ज कीजिए किसी ने इंस्टाग्राम और फेसबुक से लंबा ब्रेक ले रखा है या फिर किसी की मौत हो चुकी है. फिर भी उसका अकाउंट पहले (Meta want to make our social media accounts immortal की तरह चलता रहे तो कैसा लगेगा. आप अपने अकाउंट से एकदम दूर हैं मगर फिर भी पोस्ट होती रहे, कमेन्ट के जवाब जाते रहें और लाइव भी चलता रहे तो कैसा लगेगा. कैसा लगेगा यह तो आप ही बता सकते हैं मगर यह कैसे होगा या होता, वो हम बता देते हैं.
आपका इंस्टाग्राम अकाउंट रहेगा अमर, Meta लेकर आया नया जुगाड़
Biz-Tech, Edu-Tech, Health-Tech के बाद Grief Tech जिसका संबंध आपकी सोशल लाइफ (Meta want to make our social media accounts immortal) से है. जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी वाला मामला. इस तकनीक का एक पेटेंट Meta के पास है. समझते हैं क्या माजरा है.


पेश है Grief Tech. Biz-Tech, Edu-Tech, Health-Tech के बाद Grief Tech जिसका संबंध आपकी सोशल लाइफ से है. जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी वाला मामला. इस तकनीक का एक पेटेंट Meta के पास है. समझते हैं क्या माजरा है.
मौत के बाद भी पोस्ट डलती रहेगीइंस्टाग्राम और फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा के पास एक ऐसी तकनीक का पेटेंट है जो एक LLM ( large language model) का उपयोग करके किसी व्यक्ति की अनुपस्थिति में, यहां तक कि उसकी मौत होने पर भी, उसके सोशल अकाउंट को चालू रख सकता है. LLM (large language model) से आपने अंदाजा लगा ही लिया होगा कि बात AI की होने वाली है. मेटा ने साल 2023 में इस तकनीक के पेटेंट के लिए आवेदन दिया था. मेटा का यह मॉडल यूजर के व्यवहार को समझकर उसके लिए पोस्ट कर सकता है और कमेन्ट के जवाब भी दे सकता है.
LLM को आसान तरीके से समझें तो मेटा का यह मॉडल आपके सोशल अकाउंट की हिस्ट्री, आपके पोस्ट करने का तरीका, आपकी दिलचस्पी, कमेन्ट, लाइक को स्टडी करेगा और फिर उसके हिसाब से नई पोस्ट करेगा. मॉडल आपके अकाउंट से वीडियो और ऑडियो कॉल भी कर सकता है. फोन के “always-on” जैसा यह मॉडल पढ़ने में तो वाकई जोरदार लग रहा है. क्रिएटर और दूसरे प्लेटफॉर्म के लिए तो अमर होने का जुगाड़ हो गया. लेकिन अफसोस मेटा ने इस मॉडल को खुद ही बंद कर दिया है.
“always-on” को ऑफ दियामेटा का यह मॉडल अभी लॉन्च भी नहीं हुआ, उसके पहले इसको लेकर कई सवाल खड़े हो गए. किसी व्यक्ति के बजाय कोई मॉडल अकाउंट ऑपरेट करेगा, यह जानकार ही विज्ञापन देने वालों, एजेंसियों और प्लेटफार्मों ने ब्रांड सेफ़्टी को लेकर चिंता जता दी. ऐसी पोस्ट की प्रामाणिकता को लेकर भी कोई सहज नहीं था. बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक University of Birmingham में डिजिटल राइट्स और पोस्टमॉर्टम प्राइवेसी की प्रोफेसर Edina Harbinja ने भी इस मॉडल के लीगल और सामाजिक प्रभाव को लेकर सवाल किए थे.
वर्जीनिया विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफेसर जोसेफ डेविस ने बिजनेस इनसाइडर को बताया कि वह इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इस प्रकार के मॉडल शोक की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, उनका तर्क है कि शोक में नुकसान का सामना करना शामिल है न कि उसे धुंधला करना.
देसी भाषा में कहें तो मेटा के साथ सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ने वाला काम हो गया. कंपनी ने साफ किया कि उसके पास पेटेंट तो है मगर वो इसका प्रोडक्ट नहीं बना रही. मगर इसका मतलब यह नहीं है कि Grief Tech पर काम बंद हो गया है. कई स्टार्टअप इसके ऊपर काम कर रहे हैं. माइक्रोसॉफ्ट के पास भी एक ऐसे चैट बॉट का पेटेंट है जो मरने के बाद आपकी हूबहू नकल कर सकता है. जल्द ही “death bots” और “ghost bots” जैसे टेक को इस्तेमाल करने के लिए तैयार रहिए.
वैसे अगर आप चाहते हैं कि आपकी मौत के बाद भी आपके अकाउंट का एक्सेस किसी के पास रहे तो आप "legacy contact" फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं.
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