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कानपुर पुलिस ने 'साधु' से पूछा 'फेसबुक चलाते हो?', हां बोलते ही गिरफ्तार कर लिया

बरेली के एक आश्रम से जिस आरोपी रामप्रकाश उर्फ ‘पागल बाबा’ को गिरफ्तार (kanpur police arrest pagal baba ram prakash) किया है, कानपुर पुलिस उसे करीब 40 साल से तलाश कर रही थी. चार दशक तक पुलिस से बचने के लिए उसने अपनी पहचान ही बदल डाली.

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कानपुर पुलिस करीब 40 साल रामप्रकाश उर्फ ‘पागल बाबा’ को तलाश रही थी (तस्वीर: सोशल मीडिया)

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  • कानपुर पुलिस ने एक आरोपी राम प्रकाश उर्फ पागल बाबा को, जो 40 साल से फरार था, बरेली स्थित उसके आश्रम से गिरफ्तार किया।
  • राम प्रकाश ने 1986 में चोरी के मामले में जमानत मिलने के बाद अपनी पहचान बदलकर बरेली में साधु का रूप धारण कर लिया था।
  • फेसबुक अकाउंट की जानकारी और डिजिटल जांच से आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर उसे गिरफ्तार किया गया तथा उसकी गतिविधियों की जांच शुरू की गई है।

पुलिस: 'बाबा जी आप फेसबुक चलाते हैं?
साधु बाबा: 'हां'  
पकड़ लो इसे और हथकड़ी पहनाओ. ये किसी फिल्म का सीन नहीं बल्कि हकीकत है. उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार (kanpur police arrest pagal baba ram prakash) किया है, जो पिछले 40 साल से पुलिस को चकमा दे रहा था. साल 1986 में चोरी के एक मामले में जमानत मिलने के बाद फरार हुआ आरोपी राम प्रकाश पहचान छिपाकर बरेली में 'पागल बाबा' के नाम से अपना आश्रम चला रहा था. उसेलगा होगा कि अब कौन ही पकड़ पाएगा, लेकिन बाबा की फेसबुक आईडी ने खेल कर दिया.

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जेल से निकलकर बन गया पागल बाबा

कानपुर के फजलगंज थाना की पुलिस ने बरेली के एक आश्रम से जिस आरोपी रामप्रकाश उर्फ ‘पागल बाबा’ को गिरफ्तार किया है, उसकी करीब 40 साल से तलाश की जा रही थी. मामला साल 1986 का है. कानपुर के फजलगंज थाना क्षेत्र में चोरी के आरोप में कन्नौज निवासी राम प्रकाश को पुलिस ने पकड़ा था. जेल जाने के कुछ समय बाद उसे कोर्ट से जमानत मिल गई.

जमानत पर बाहर आया राम प्रकाश फिर कभी जेल वापस नहीं गया. चार दशक तक पुलिस से बचने के लिए उसने अपनी पहचान ही बदल डाली. बरेली पहुंचा और साधु का रूप धारण कर ‘पागल बाबा’ और ‘पागल दास बाबा’ के नाम से रहने लगा. मामला पुराना होने और पुलिस द्वारा आरोपी को न ढूंढ पाने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कानपुर के डीसीपी सेंट्रल को तलब कर लिया.

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फेसबुक ने ‘बुक’ करवा दिया

चार दशक बाद पुलिस ने पुराने मुकदमे और आरोपी के मूल गांव कन्नौज से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की. इसी दौरान पुलिस के हाथ रामप्रकाश से जुड़ा एक फेसबुक अकाउंट लगा. डिजिटल जांच के दौरान पुलिस को कन्नौज के रहने वाले रामप्रकाश नाम का एक ऐसा फेसबुक अकाउंट मिला, जो बरेली से ऑपरेट हो रहा था. चौंकाने वाली बात यह थी कि इस फेसबुक अकाउंट की फ्रेंड लिस्ट में कन्नौज के उसके गांव के कई लोग जुड़े हुए थे. सोशल मीडिया प्रोफाइल और सर्विलांस के जरिए पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रेस की. लोकेशन बरेली के गजनेरा गांव के पास एक आश्रम की मिली.

पुलिस टीम ने जब आश्रम पहुंचकर जांच की तो वहां साधु के भेष में रह रहा शख्स कोई और नहीं बल्कि 40 साल से फरार रामप्रकाश निकला. कानपुर के फजलगंज पुलिस स्टेशन की टीम ने बरेली स्थित आश्रम में साधु बने बैठे आरोपी से बस इतना पूछा-"बाबा, क्या आप फेसबुक चलाते हैं?" बाबा के 'हां' कहते ही पुलिस ने उसकी पूरी कुंडली मिलाई और उसे तुरंत हिरासत में ले लिया. फजलगंज पुलिस अब आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और फरारी के दौरान उसकी गतिविधियों की भी जांच कर रही है.

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