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सिर्फ ऑरिजनल चार्जर से स्मार्टफोन चार्ज करने वाली सलाह माननी चाहिए?

स्मार्टफोन चार्जिंग को लेकर मिलते हैं कई किस्म के सलाह.

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मोबाइल के साथ आया चार्जर या मार्केट से खरीदा हुआ?
चाहे आप कितने भी समझदार हो. कितने ही सिस्टम में ढले हो या फिर आपको हर काम को व्यवस्थित ढंग से करने की आदत ही क्यों न हो. लेकिन कभी न कभी आपके साथ ऐसा हुआ होगा कि आप मोबाइल का चार्जर भूल गए. फिर आपको किसी और चार्जर से अपना मोबाइल चार्ज करना पड़ा होगा. चार्ज करते वक्त आपके दिमाग में ये ख्याल जरूर आया होगा कि ये नहीं करना था, मतलब अपने मोबाइल के चार्जर से ही चार्ज करना था. आपको शायद ख्याल ना भी आया हो तो किसी न किसी ने ये ज्ञान आप पर जरूर थोप दिया होगा कि ये गलत है. मोबाइल खराब हो जाएगा यदि दूसरे चार्जर से चार्ज करोगे तो. आमतौर पर ये सलाह हमें अपने आसपास से और Google से भी मिलती है. लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है? पूरी सच है या फिर सफेद झूठ. ऐसे में सबसे ज़रूरी है Smartphone Charging का गणित समझना. हमारे मोबाइल फोन के साथ आने वाले चार्जर की ताकत का पता चलता है वॉट्स (Watts) से. वॉट्स से मतलब है...चार्जर कितनी ऊर्जा आपके फोन को दे सकता है. चार्जर पर इसकी जानकारी होती है. आपका स्मार्टफोन ज़ीरो से 100 फीसदी तक कितनी जल्दी पहुंच जाएगा वो इस बात पर निर्भर करता है कि चार्जर कितनी ऊर्जा आपके फोन को देगा और उसी टाइम आपका मोबाइल कितनी ऊर्जा लेगा. उदाहरण के तौर पर किसी भी हैंडसेट को ले लीजिए. अगर वो 20 वॉट तक की चार्जिंग को सपोर्ट करता है तो वो 20 वॉट तक की ऊर्जा ले सकता है. अगर आपने पुराने 5 वॉट वाले चार्जर से उस फोन को चार्ज किया तो फिर बीरबल की खिचड़ी बनना तय है. मतलब बहुत टाइम लगेगा. अब आप 65 वॉट वाले चार्जर से चार्ज करेंगे तो भी वो 20 वॉट ही लेगा. मतलब चार्जर की ताकत बहुत ज्यादा होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. क्योंकि फोन में वो क्षमता है ही नहीं. अब बात करते हैं फास्ट चार्जिंग की. फास्ट चार्जिंग अब आम बात हो गई है, लेकिन हर कंपनी में फास्ट चार्जिंग की तकनीक एक जैसी हो वो जरूरी नहीं है. OnePlus के कुछ स्मार्टफोन 65 वॉट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करते हैं. Xiaomi के कुछ हैंडसेट तो 120 वॉट तक सपोर्ट करते हैं. OnePlus का फास्ट चार्जर बैटरी को आतंरिक रूप से दो भागों में बांटकर एक साथ चार्ज करता है. वही, शाओमी अपने फोन में बटरफ्लाई डुअल सीरियल बैटरी तकनीक इस्तेमाल होती है. तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो सबसे बढ़िया परिणाम के लिए आपको फोन के साथ मिलने वाले चार्जर के साथ ही जाना पड़ेगा. मोबाइल चार्जिंग के सबसे बढ़िया परिणाम के लिए फोन के चार्जर के साथ जाना होगा, ये एक बेसिक बात है. लेकिन हम इस बात को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते कि तमाम कंपनियां फोन चार्जर भी बनाती हैं. चार्जर बनाने वाली कंपनियों में Samsung और Anker जैसी नामी गिरामी कंपनियां भी हैं जो तय प्रोसेस के अनुसार प्रोडक्ट बनाती हैं और बकायदा बताती हैं कि उनका चार्जर फलां कंपनी के फोन के लिए मुफीद है. कुछ दिन पहले ही सैमसंग ने अपना 35 वॉट का चार्जर बाजार में उतारा और साफ-साफ कहा कि ये एंड्रॉयड और आईफोन दोनों को चार्ज कर सकता है. अब सबसे अहम बात. फोन की चार्जिंग क्षमता और चार्जर की क्षमता को ध्यान में रखकर आप कोई सा भी चार्जर यूज कर सकते हैं. लेकिन इस प्रोसेस में कुछ किंतु और परंतु भी हैं. घटिया और सस्ते. बिना ब्रांड वाले या फिर घर में धूल खा रहे चार्जर से अपना मोबाइल चार्ज बिल्कुल नहीं करना है. चार्जर और केबल किसी अच्छी कंपनी का हो और वो आपके मोबाइल की चार्जिंग क्षमता के लिए उपयुक्त हो, ये थंब रूल है. ऐसा भी जरूरी नहीं है कि हर बाहरी चार्जर खराब होगा. लेकिन नया चार्जर लेना है तो किसी नामी और भरोसेमंद ब्रांड का लें. चाहे कीमत ज़्यादा ही क्यों न हो. बॉटम लाइन ये है कि आजकल के मोबाइल भी समझदार हो गए हैं. वे अपनी क्षमता के साथ काम करते हैं. किसी भी अच्छी कंपनी के चार्जर के साथ दिक्कत नहीं होती. पर ये जरूरी नहीं है कि आपको वैसी ही चार्जिंग स्पीड मिले जो उस कंपनी के चार्जर के साथ मिलेगी. थोड़ा बहुत ऊपर नीचे हो सकता है, लेकिन कोई खतरा नहीं है. एक बात ये भी सच है कि फास्ट चार्जिंग वाले मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियां अपनी एक विशेष तकनीक इस्तेमाल करती है तो जितना मुमकिन हो उतना अपने मोबाइल के चार्जर से चार्ज कीजिए. ऐसा भी हो सकता है कि आधिकारिक काम या व्यापार के सिलसिले में आप आमतौर पर बाहर रहते हैं तो किसी ब्रांडेड कंपनी का चार्जर इस्तेमाल कीजिए. किसी किस्म का समझौता घाटे का सौदा होगा.

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