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तेल कंपनी इंडियन ऑयल अब आपको पानी बेचेगी, Bisleri से टक्कर लेने का प्लान भी तैयार

Indian Oil बोतल बंद पानी के बाजार (Indian Oil brings packaged water to the pump) में उतर रही है. लेकिन बोतल बंद पानी के बाजार में क्यों. माने अगर इंडियन ऑयल के बिजनेस के हिसाब से देखें तो पानी का बिजनेस समुद्र में एक बूंद जितना भी नहीं है.

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इंडियन ऑइल को बोतल बंद पानी के छोटे से कारोबार में उतरने की क्या जरूरत आन पड़ी (तस्वीर: एआई)

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  • इंडियन ऑयल कंपनी ने अब देशभर में अपने 43 हजार से अधिक आउटलेट्स पर बोतल बंद पानी बेचने का कारोबार शुरू करने का निर्णय लिया है।
  • बोतल बंद पानी के बाजार में बिसलेरी जैसा बड़ा खिलाड़ी मौजूद है, जबकि इंडियन ऑयल के पास पेट्रोल पंप नेटवर्क और रोजाना 3.2 करोड़ विज़िटर्स का फायदा है।
  • इंडियन ऑयल पानी की पैकेजिंग, निर्माण, पैकेजिंग और वितरण के लिए थर्ड पार्टी सेवाओं का उपयोग करेगा और इस नए व्यवसाय में दीर्घकालिक रणनीति अपनाएगा।

तेल कंपनी इंडियन ऑयल अब आपको पानी पिलाएगी. अरे-अरे उधर मत सोचिए, हम सच्ची वाले पानी की बात कर रहे हैं. पेट्रोलियम कंपनी अब बोतल बंद पानी के कारोबार में उतर रही है (Indian Oil in packaged water business). जल्दी ही आपको कंपनी के देशभर में फैले आउटलेट पर इंडियन ऑयल का पानी नजर आएगा. 

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इसमें क्या, कंपनियों का काम है नए प्रोडक्ट बनाना, नए बाजार में तैरना. लेकिन बोतल बंद पानी के बाजार में क्यों? माने अगर इंडियन ऑयल के बिजनेस के हिसाब से देखें तो पानी का बिजनेस समुद्र में एक बूंद जितना भी नहीं है.

इंडियन ऑयल कारोपोरेशन का वित्त वर्ष 2025-26 में नेट प्रॉफ़िट ₹36,802 करोड़ रहा है. 36 हजार करोड़ का शुद्ध मुनाफा. कंपनी की नेटवर्थ है ₹8.86 लाख करोड़. तेल से पानी की तरफ लुढ़क जाएं तो इस बाजार की सबसे बड़ी कंपनी है Bisleri International जिसके पास बाजार की 35 से 40 फीसदी हिस्सेदारी है. बिसलेरी का 2025-26 का कुल नेट रेवेन्यू है 2,814 करोड़, और मुनाफा है 316 करोड़ रुपये. अगर मुनाफे के हिसाब से देखें तो इंडियन ऑयल का मुनाफा बिसलेरी से 116 गुणा ज्यादा है. अगर रेवेन्यू के हिसाब से भी देख लें तो 13 गुणा हो गया. नेटवर्थ से तो तुलना करना ही बेकार है.

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बिसलेरी पानी के बाजार की तगड़ी खिलाड़ी है. विदेशी Kinley (कोका-कोला) से लेकर Aquafina (पेप्सिको) और देसी Bailley (पारले एग्रो) उसका मुकाबला नहीं कर पाए हैं. टाटा ने बिसलेरी को गटकने के लिए बहुत दम दिखाया, मगर डील डन नहीं हुई. माने इस बाजार में इंडिया ऑयल को कड़ा मुकाबला मिलेगा. एक तो इत्तू सा बाजार ऊपर से एक बड़ा खिलाड़ी. इंडियन ऑयल को क्या सूझी?

नेटवर्क 'वर्क' करेगा?

इंडियन ऑयल के पास है देशभर में 43 हजार से ज्यादा आउटलेट का बड़ा नेटवर्क. अरे पता है हमें आप क्या कहोगे. नेटवर्क तो टाटा, पेप्सी और कोका-कोला के पास भी है. अरे भईया उनके आउटलेट पर लोग रुकते नहीं. दूर से बोलते आते हैं एक पेप्सी या कोक देना. जबकि पेट्रोल पंप पर लोग रुकते हैं. पेट्रोल पंप का इस्तेमाल पेट्रोल भरवाने के साथ बाथरूम जाने और थोड़ी देर रुकने के लिए भी होता है. The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के आउटलेट पर 3.2 करोड़ लोग रोज विजिट करते हैं. ऐसे में वहां पानी की बोतल रखना है तो अच्छा बिजनेस फैसला.

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इंडियन ऑयल पानी नहीं भरने वाला

नेटवर्क से इतर एक बात और गौर करने लायक है. इंडियन ऑयल के लिए Manufacturing, Packaging, Warehousing, Transportation, Inventory का काम थर्ड पार्टी करने वाली हैं. माने बोतल पर होगा इंडियन ऑयल का ठप्पा और उसका रिटेल आउटलेट. बिजनेस तो है, भले छोटा सा है. आपको ये सब क्यों बताया. अरे भईया बिजनेस के लिए हमेशा जीरो से स्टार्ट करने की जरूरत नहीं.

कई बार बने-बनाए बिजनेस में भी बढ़िया स्ट्रैटजी लगाकर काम किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, यूपीआई पेमेंट में देख लीजिए. बाजार बनाया Paytm ने लेकिन असली मलाई PhonePe और Google Pay ने खाई. देखते हैं इंडियन ऑयल क्या करेगी.

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