रेलवे ट्रैक पर हाथियों का आना ट्रेनों की टक्कर से मारा जाना सरकारों से लेकर तमाम वन एक्सपर्ट और एक्टिविस्ट के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. दिसंबर 2025 में असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौत हो गई थी. हर तरह के समाधान आजमा लिए गए हैं लेकिन ये हादसे रुक नहीं रहे हैं. रेलवे और फॉरेस्ट विभाग, दोनों ही हाथियों को ट्रेन की पटरी से दूर रखने के कई प्लान बनाते हैं. लेकिन गाहे-बगाहे हाथी और ट्रेन की टक्कर की खबर आ ही जाती है. हालांकि अब जाकर एक कारगर योजना जानकारी में आई है. जहां बड़ी बातों और बड़े प्लान से काम नहीं बना वहां Plan Bee ने काम बना दिया है.
रेलवे ने मधुमक्खी की 'भिन-भिन' और AI की मदद से 255 हाथियों की जान बचा ली
नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने ट्रेन और हाथियों की टक्कर को रोकने के लिए AI-आधारित ‘प्लान बी’ सिस्टम का इस्तेमाल किया है. ‘प्लान बी’ की मदद से अलर्ट भेजकर, स्पीड पर रोक लगाकर और बेहतर पेट्रोलिंग करके जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 255 हाथियों की जान बचाई गई है.

नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने ट्रेन और हाथियों की टक्कर को रोकने के लिए AI-आधारित ‘प्लान बी’ सिस्टम का इस्तेमाल किया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ‘प्लान बी’ की मदद से अलर्ट भेजकर, स्पीड पर रोक लगाकर और बेहतर पेट्रोलिंग करके जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 255 हाथियों की जान बचाई गई है.
NFR के चीफ पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर कपिंजल किशोर शर्मा के अनुसार, वन विभाग के साथ तालमेल और समय पर की गई कार्रवाई से अलीपुरद्वार, रंगिया, लुमडिंग और तिनसुकिया इन चार डिवीज़नों में हाथियों को बचाया गया. इसके लिए NFR ने AI-आधारित Intrusion Detection System (IDS) और डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम (DAS) तकनीक का इस्तेमाल किया है. क्या है ये तकनीक वो बताने से पहले आपके मन में भिनभिना रहे सवाल का जवाब देते हैं.
एकदम, विशालकाय हाथी को छोटी सी मधुमक्खियों की आवाज़ और उनकी भनभनाहट से बहुत डर लगता है. हाथियों की चमड़ी वैसे तो काफी मोटी होती है, लेकिन उनकी आंखों के आसपास, कान के पीछे और सूंड के अंदर का हिस्सा बेहद संवेदनशील होता है. जब मधुमक्खियां झुंड में हमला करती हैं और इन संवेदनशील जगहों पर डंक मारती हैं, तो हाथियों को काफी दर्द होता है. इसी वजह से हाथियों में मधुमक्खियों के प्रति एक स्वाभाविक डर विकसित हो गया है. अगर हाथी मधुमक्खियों की भनभनाहट की आवाज दूर से भी सुन लेते हैं, तो वे तुरंत उस जगह से दूर भागने लगते हैं और अपनी सूंड से धूल उड़ाकर अपना बचाव करने की कोशिश करते हैं.
अब अपना NFR कैसे इस डर का फायदा उठा रहा वो बताने से पहले आपको ये बताते हैं कि ये Plan Bee आया कहां से.
ये भी पढ़ें: अस्पताल में एडमिट हुए तो 10% पैसा देना ही होगा... बीमा कंपनियों का नया प्लान पता लगा
दरअसल हाथियों को मधुमक्खियों की आवाज़ से डराने का तरीका ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और 'सेव द एलीफेंट्स' (Save the Elephants) संस्था से आया है. इन्होंने कुछ साल पहले "Beehive Fencing" (मधुमक्खियों के छत्तों की बाड़) तकनीक विकसित की. इसमें किसान अपने खेतों के चारों ओर मधुमक्खियों के डिब्बे लगा देते हैं. जब हाथी खेत में घुसने की कोशिश करते हैं, तो रस्सियों के खिंचाव से मधुमक्खियां बाहर निकलती हैं और उनकी आवाज़ व मौजूदगी से डरकर हाथी फसलों को नुकसान पहुंचाए बिना वापस जंगल चले जाते हैं. इसी तकनीक का इस्तेमाल करके अफ्रीकन हाथियों से फसलों को बचाया गया. ऑक्सफोर्ड की स्टडी के मुताबिक इस तकनीक की वजह से इंसान और हाथी के बीच टकराव 86.3 फीसदी तक कम हुआ है.
NFR ने एआई वाली मधुमक्खियों को काम पर लगायाजमाना एआई का है तो फिर असली वाली मधुमक्खियों को क्यों डिब्बे में बंद करना. रेलवे ने इसके लिए Distributed Acoustic System (DAS) का इस्तेमाल किया. इस तकनीक में फाइबर केबल को जमीन में बिछाया जाता है जिसमें हजारों माइक्रोफोन या सेंसर लगे होते हैं. यह तकनीक फाइबर के आसपास होने वाली किसी भी आवाज, कंपन या प्रेशर को रियल-टाइम में उसकी लोकेशन के साथ पहचान सकती है. तेल और गैस पाइपलाइन की सेफ्टी के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है. भारतीय रेलवे ने जंगलों और हाथी गलियारों के पास Gajraj System के तहत DAS तकनीक लागू की है. जब हाथी ट्रैक के पास आता है, तो उसकी आहट से फाइबर में उत्पन्न कंपन को पहचानकर ट्रेन लोको पायलट को समय रहते अलर्ट भेज दिया जाता है. इसके साथ ही ट्रैक पर मधुमक्खियों की आवाज निकालने वाले सिस्टम भी लगे हैं. अलर्ट मिलते ही सिस्टम जोर-जोर से भिनभिनाने लगते हैं और हाथी ट्रैक से दूर हो जाते हैं.
वीडियो: कैप्टन स्मित से नेतन्याहू ने कॉल पर की बात, इजरायल आने का न्योता भी दिया












