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इंडिया में कारोबार बढ़ाएगा Apple, 38 अरब डॉलर के लिए बदली रणनीति

ऐप्पल अपने इंडिया के ऐप बिजनेस का हर बिल (Apple agrees to submit India financials) भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के सामने रखने के लिए मजबूरी में तैयार हुआ है. इसके पीछे 38 अरब डॉलर के जुर्माने का भी कनेक्शन है.

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Apple, इंडिया में अपने ऐप बिजनेस का हर बिल CCI के सामने रखेगा

इंडिया में अपने कारोबार के सारे पत्ते खोलने के लिए Apple तैयार (Apple agrees to submit India financials) हो गया है. दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी ने पिछले महीने इंडिया में Competition Commission of India (CCI) के सामने भारत में उसके ऐप कारोबार की कुंडली खोलने के लिए हामी भरी है. माने अब पता चलेगा कि सच्ची में उसने ऐप स्टोर (iOS) से कितना पैसा छापा. कितना तगड़ा मुनाफा कमाया. घाटे का तो कोई सवाल ही नहीं है. लेकिन ये सवाल जरूर है कि ऐप्पल को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी.

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3 लाख 80 हजार करोड़ बचाने के लिए

ऐप्पल अपने इंडिया के ऐप बिजनेस का हर बिल भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के सामने रखने के लिए मजबूरी में तैयार हुआ है. रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 मई को हुई सुनवाई में कंपनी ने कागज-पत्री जमा करने के लिए 25 जून तक का समय मांगा है. CCI इसके लिए मान भी गया है. दरअसल ये पूरा मामला साल 2021 का है, जब टिंडर की मालिक कंपनी मैच ग्रुप और भारतीय स्टार्टअप का प्रतिनिधित्व करने वाले डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के गठबंधन सहित शिकायतकर्ताओं के एक समूह ने ऐप स्टोर की नीतियों के संबंध में शिकायत दर्ज की थी.

थर्ड पार्टी पेमेंट से जुड़ा मामला

सीसीआई ने 2024 में अपनी जांच पूरी करते हुए पाया कि ऐप्पल ने आईफोन ऐप के बाजार में अपनी पोजिशन का दुरुपयोग किया था. iOS ऐप स्टोर डेवलपर्स के सारे लेनदेन के लिए एकमात्र पार्टनर था और उसने ऐप्स की खरीदारी के लिए थर्ड पार्टी पेमेंट सर्विस के इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी. आसान भाषा में कहें तो ऐप स्टोर पर जब भी आप कोई ऐप खरीदते थे तो पेमेंट ऐप्पल के पास जाता था. इसके बाद वो अपनी कमीशन काट कर डेवलपर्स को भुगतान करता था. जांच के बाद सीसीआई ने ऐप्पल से इंडिया ऐप कारोबार के डिटेल मांगे थे.

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ऐप्पल अपना ज्ञान दे रहा था

जांच के बाद भी ऐप्पल ने नियामक को वित्तीय जानकारी देने से इनकार कर दिया था. कंपनी का तर्क था कि इस मामले को रोक दिया जाना चाहिए, जबकि वह भारत के संशोधित एंटीट्रस्ट पेनाल्टी कानून को अलग से चुनौती दे रही है. ये कानून किसी कंपनी के स्थानीय लाभ के बजाय ग्लोबल राजस्व पर जुर्माना लगाने की अनुमति देता है. अगर इस कानून के हिसाब से देखें तो ऐप्पल पर 38 अरब डॉलर तक का जुर्माना लग सकता है.

कंपनी को दिल्ली हाई कोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिली जहां उसने केस होल्ड करने के लिए याचिका लगाई थी. इसलिए अब कंपनी अपने इंडिया ऐप कारोबार की कुंडली सीसीआई के सामने रखेगी. इंडिया के स्मार्टफोन मार्केट में कंपनी ने सिर्फ पांच साल में अपनी हिस्सेदारी को 2 से 9 फीसदी पहुंचा दिया है. ऐसे में वो कोई रिस्क क्यों ही लेगा. 

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