कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट के चलते 20 जुलाई को सेंट्रल दिल्ली यानी जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट बंद कि जाने की बात सामने आई थी. उस इलाके में मौजूद कई सारे यूजर्स को इंटरनेट बंद होने का मैसेज भी मिला था. लेकिन अब पता चला है कि प्रदर्शनकारी ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करके आपस में मैसेज साझा कर रहे थे (CJP protesters messaging apps without internet). मतलब ऐसी तकनीक जिसमें मोबाइल नेटवर्क, डेटा या वाईफाई नहीं चाहिए होता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक दिल्ली पुलिस अब इस तरीके कr जांच भी कर रही है.
इंटरनेट बंद था तो कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट में मैसेज कैसे भेजे गए?
स्मार्टफोन में नेटवर्क की डंडी से लेकर, इंटरनेट और वाईफाई के अलावा भी कनेक्टिविटी के लिए एक और जबरदस्त जुगाड़ होता है. ब्लूटूथ कहते हैं इसको. इसी ब्लूटूथ तकनीक का इस्तेमाल करके एक डियाविस से दूसरे डिवाइस में मैसेज भी भेजा (CJP protesters are using some specialised apps to send messages without internet) जा सकता है वो भी कानूनी तरीके से.


स्मार्टफोन में नेटवर्क की डंडी से लेकर, इंटरनेट और वाईफाई के अलावा भी कनेक्टिविटी के लिए एक और जबरदस्त जुगाड़ होता है. ब्लूटूथ कहते हैं इसको. वैसे तो हम इसका इस्तेमाल अपने हेडफोन्स और ईयरफोन्स को कनेक्ट करने के लिए ज्यादा करते हैं. कभी-कभार फ़ाइल ट्रांसफर के लिए भी इसकी मदद ली जाती है. लेकिन इसी ब्लूटूथ तकनीक का इस्तेमाल करके एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में मैसेज भी भेजा जा सकता है वो भी कानूनी तरीके से.
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WhatsApp, Signal और Telegram मैसेजिंग के लिए मोबाइल डेटा या Wi-Fi पर निर्भर रहते हैं,वहीं ऑफ़लाइन मैसेजिंग ऐप्स Bluetooth Low Energy (BLE) का इस्तेमाल करते हैं. यह एक वायरलेस टेक्नोलॉजी है जो लगभग हर मॉडर्न स्मार्टफोन में होती है. इसके सहारे स्मार्टफोन्स का एक मेश नेटवर्क बनता है जो एसएमएस को मोबाइल टॉवर या सर्वर पर भेजने के बजाय पास के अन्य स्मार्टफोन तक पहुंचा देता है. एसएमएस एक फोन से दूसरे फोन पर एन्क्रिप्टेड रूप में तब तक चलता है जब तक वो सही आदमी के पास पहुंच नहीं जाता. ऐप का इस्तेमाल जितने अधिक लोग करते हैं, मेश नेटवर्क उतना ही बड़ा और प्रभावी होता जाता है. चलिए तकनीक बता दी, अब ऐप बता देते हैं.
डॉर्सी का BitChatबिना इंटरनेट के इंस्टेंट मैसेजिंग करने का सबसे बढ़िया उदाहरण ट्विटर के सहसंस्थापक जैक डॉर्सी (Jack Dorsey) का है. टेक की दुनिया में इनको बाबा डॉर्सी भी कहा जाता है. कई लोग इनको ‘कैप्टन जैक स्पैरो’ भी कहते हैं. जैक साल 2025 में Bitchat ऐप लेकर आए थे. इसका कोई सेंट्रल सर्वर नहीं है. मतलब जैसे वॉट्सऐप या दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म में संदेशों का आदान-प्रदान एक सर्वर के जरिए होता है, वैसा बिटचैट में नहीं है. Bitchat डिसेंट्रलाइज्ड पीयर-टू-पीयर नेटवर्क टेक्नोलॉजी का यूज करता है.
इसके लिए बिटचैट अपने आस-पास के ब्लूटूथ इनेबल डिवाइस के बीच एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन बिठाकर काम करता है. इसका मतलब यह है कि आप अपने आस-पास वाले ऐसे डिवाइस को ऐप के जरिए मैसेज कर सकते हैं, जिनका ब्लूटूथ ऑन है. बिटचैट सीधे एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस को मैसेज भेजता है. यही प्रक्रिया आगे चलती जाती है. Dorsey का दावा है कि 300 मीटर तक की रेंज में उपलब्ध डिवाइस के बीच इस ऐप के जरिए मैसेज किए जा सकते हैं.
प्ले स्टोर पर ऐसे और भी ऐप उपलब्ध हैं. संभव है कॉकरोच जनता पार्टी वाले ऐसे ही किसी ऐप की मदद से बिना इंटरनेट के भी मैसेज भेज रहे हों.
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