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स्मार्टफोन में जंक क्लीनिंग, परफॉर्मेंस बूस्टर वाले ऐप्स का सच जान बाल खींच लेंगे

करोड़ों लोग इन ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं. उन्हें नहीं पता कितनी बड़ी गलती कर रहे हैं.

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परफॉर्मेंस बूस्टर ऐप्स से दूरी अच्छी. (सांकेतिक तस्वीरें: Unsplash.com)

रामगोपाल वर्मा की 'सरकार' में अमिताभ बच्चन फरमाते हैं- नजदीकी फायदा देखने से पहले दूर का नुकसान सोचना चाहिए. बात बिल्कुल ठीक है. छोटे फायदे का लालच कई बार बड़ा नुकसान करा सकता है, खासतौर पर अगर बात स्मार्टफोन के बारे में कही जाए तो. हम बात कर रहे हैं स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले परफॉर्मेंस बूस्टर ऐप्स की. ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल आज भी लाखों करोड़ों लोग कर रहे हैं. ऊपर से देखने में लगता है कि वाकई में स्मार्टफोन को फायदा हो रहा है, लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग है. बैटरी, रैम और एंटीवायरस के नाम पर कैसे चूना लगाया जा रहा है, ये जानना बेहद जरूरी है.

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जंक क्लीनिंग के नाम पर फोन को जंग लगाने वाले ऐप्स

फोन क्लीनर, बैटरी सेवर, एंटीवायरस या फिर परफॉर्मेंस बूस्टर. कुछ भी नाम हो सकता है ऐसे ऐप्स का. दावा फोन की मेमोरी से लेकर बैटरी मैनेजमेंट का. आमतौर पर हम ऐसे ऐप्स को बिना सोचे समझे और जांचे बिना अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लेते हैं. कारण चाहे फोन का स्लो हो जाना हो या फिर बार-बार हैंग होने की समस्या. इन ऐप्स की एक और खास बात. इनका नाम अक्सर किसी असली एंटीवायरस या फ़ाइल मैनेजर ऐप से मिलता जुलता होता है. ऐसे ऐप्स फोन में कांड बाद में करते हैं लेकिन सबसे पहले आपके डेटा पर डाका पहले डालते हैं. 

जैसे ही आपने ऐप इंस्टॉल किया तो पता नहीं कितनी सारी परमिशन ये आपसे ले लेते हैं, जिनकी इन्हें कोई जरूरत ही नहीं होती. अरे भई बैटरी ऐप को कॉन्टैक्ट और एसएमएस से क्या लेना-देना है. हालांकि, लेना-देना तो यहीं से है. आपके डेटा से. बाकी सब तो इनकी नौटंकी है जिसका शिकार हम हो रहे होते हैं.

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क्या गुल खिलाते हैं ऐसे ऐप?

घड़ी-घड़ी आपको स्क्रीन पर ऐप का Cache क्लियर करने, स्टोरेज खाली करने का पॉपअप दिखाते हैं. रैम मैनेज करने का नोटिफिकेशन भेजते हैं. हम भी बिना कुछ सोचे बस बटन दबाते जाते हैं. कुछ 100-150 MB डेटा क्लीन करके हमको लगता है जैसे जंग जीत ली. जनाब ये भ्रम है. ना हमने कोई जंग जीती, ना जंक साफ हुआ. बस इस बहाने जंक और भर जाता है स्मार्टफोन में.

आजकल के स्मार्टफोन सच में स्मार्ट हो चले हैं. रैम से लेकर ऐप मैनेजमेंट तक अपने आप हो जाता है. ऐसे ऐप्स के चक्कर में जब हम ऐप्स को बार-बार रीसेट करते हैं तो उल्टा फोन के CPU पर असर पड़ता है. बैटरी और डेटा की एक्स्ट्रा खपत होती से सो अलग.

स्मार्टफोन बड़े स्मार्टली ऐप्स के इस्तेमाल में नहीं होने पर उनको हाइबरनेशन में डाल देते हैं. ऐसा करने से ऐप वहीं से स्टार्ट होता है जहां से आपने लास्ट टाइम बंद किया था. इसके अलावा भी तकरीबन हर स्मार्टफोन में रैम क्लियर करने और बैटरी को ऑप्टिमाइज करने का बढ़िया इंतजाम मौजूद होता है. उतने भर से काम चल जाता है या कहें दौड़ जाता है.

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इसलिए ऐसे किसी भी ऐप से दूर रहिए. फोन अगर बहुत ज्यादा स्लो हो रहा है तो ऐप मैनेजमेंट में जाकर चेक कीजिए कि कौन सा ऐप बैटरी खा रहा है या फिर स्टोरेज पर कब्जा जमाए है. जरूरत नहीं हो तो डिलीट मार दीजिए. फोन रीसेट करने में भी कोई बुराई नहीं है. जो अगर सेफ़्टी की चिंता सता रही तो कोई असली एंटीवायरस इस्तेमाल करें वो भी फ्री वाला. इससे ज्यादा कुछ नहीं.  

वीडियो: क्या 'बैटरी सेविंग मोड' सच में काम आता है या फोन का बैंड बजा देता है?

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