अपने एंड्रॉयड फोन में इन 10 सेटिंग्स को तुरंत करें बंद
सेटिंग्स में बदलाव करने की वजह भी जान लें.
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स्मार्टफोन से बेहतर परफॉर्मेंस के लिए ऐसा करें(Image:Giphy)
"मै आपको अच्छे से जानता हूं", आम बोलचाल में ऐसा हमसे किसी ने या हमने किसी को अक्सर कहा होता है. वजह सकारात्मक हो या नकारात्मक, वो अलग बात है. आपको ये जानकार आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए कि आपका स्मार्टफोन भी आपको बहुत अच्छे से जानता है. कई बार तो इतना ज्यादा जानता है जो उसके लिए जरूरी भी नहीं है. घबराइए नहीं आपका मोबाइल आपकी जासूसी नहीं कर रहा, लेकिन कुछ सेटिंग्स है जिनके इनेबल होने से आपका और स्मार्टफोन दोनों का नुकसान है. ऐसी ही कुछ सेटिंग्स आपको तत्काल प्रभाव से बंद कर देनी चाहिए. हम आपको ऐसी ही कुछ सेटिंग्स बंद करने के बारे में बताएंगे, लेकिन उसके पहले एक जादू भी देख लीजिए. क्या आपको पता है आपके स्मार्टफोन (Android Smartphone) में एक छिपा हुआ मेन्यू होता है. हां जी, इस मेन्यू को ओपन करते ही आपके सामने तमाम सेटिंग्स और कंट्रोल का पिटारा खुल जाता है. इस मेन्यू का नाम है "डेवलपर ऑप्शन" जिसको आपको खुद से इनेबल करना होगा. एंड्रॉयड फोन की सेटिंग्स में "अबाउट फोन "(About Phone) में "बिल्ड नंबर" (Build Number) का ऑप्शन दिखेगा. आपको बिल्ड नंबर पर सात बार टैप करना है. इसके बाद आपके फोन के पिन या पासवर्ड को डालिए और जादू का पिटारा खुल जाएगा. और एक चेतावनी "डेवलपर ऑप्शन" में आपको फोकट में कोई छेड़खानी नहीं करनी है. काम की बात ये है कि "डेवलपर ऑप्शन" आपको अपने स्मार्टफोन पर और कंट्रोल देता है. यहां से कई सेटिंग्स बदली जा सकती है.
ब्लूटूथ और वाई-फाई स्कैनिंग
ब्लूटूथ और वाई-फ़ाई बंद नहीं करना है बल्कि स्कैनिंग बंद करनी है. आपका स्मार्टफोन बैकग्राउंड में नए ब्लूटूथ डिवाइस और वाई-फ़ाई कनेक्शन को लगातार तलाशता रहता है. ऐसा होने से फोन की बैटरी पर असर तो पड़ता ही है, सुरक्षा के लिए भी ये ठीक नहीं. आमतौर पर आपके वाई-फ़ाई और ब्लूटूथ डिवाइस स्मार्टफोन से कनेक्ट होते हैं तो फिर बिना वजह और क्यों तलाशना. फोन की सेटिंग्स में लोकेशन में आपको दोनों सेटिंग्स को डिसेबल करने का ऑप्शन मिल जाएगा. ऐसा करने से आपके ब्लूटूथ और वाई-फ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा. आपको जब भी कोई नया डिवाइस या वाई-फाई एड करना है तो आप सेटिंग्स में जाकर आराम से कर सकते हैं.
सीमित बैकग्राउंड प्रोसेस
यदि आपके पास थोड़ा पुराना फोन है जिसमें रैम कम है तो ये आपके लिए रामबाण हो सकता है. वैसे आपके फोन में पर्याप्त रैंडम एक्सेस मेमोरी (RAM) भी है, तब भी बैकग्राउंड प्रोसेस बंद ही रखिए. जैसा नाम से जाहिर है, इस प्रोसेस में बैकग्राउंड में ऐप्स रन होते रहते हैं. अब फोन आपका पुराना हो या नया, ऐप्स तो उसमें सैकड़ों होते हैं तो सोचिए आपके फोन पर कितना असर पड़ता होगा. "डेवलपर ऑप्शन" में जाकर आप इस प्रोसेस को बंद कर सकते हैं या फिर 1 से 4 के स्केल पर भी सेट कर सकते हैं. ऐसा करने से आपको पहले दिन शायद कुछ फर्क ना दिखे लेकिन कुछ दिनों के बाद आपको महसूस होगा कि फोन की परफ़ॉर्मेंस बेहतर हुई है.
लोकेशन हिस्ट्री
आपने देखा होगा कि अक्सर आपके फोन पर आपकी लोकेशन के हिसाब से सुझाव आते रहते हैं. पास वाला होटल या कोई दर्शनीय स्थल का सुझाव आपको गूगल से मिलता रहता है. आप ऐसे सुझावों से खुश हैं तो कोई बात नहीं. लेकिन आपको इनसे कोफ्त होती है तो इसको बंद कर सकते हैं. फोन की सेटिंग्स में लोकेशन में जाइए, यहां आपको गूगल लोकेशन हिस्ट्री का ऑप्शन दिखेगा. अपने गूगल अकाउंट से लॉगइन कीजिए और लोकेशन को हमेशा के लिए बंद कर दीजिए. आपको ऐसा नहीं करना है तो आप "ऑटो डिलीट" का ऑप्शन भी चुन सकते हैं. आपकी लोकेशन हिस्ट्री 3 महीने लेकर 36 महीने में अपने आप डिलीट हो जाएगी. "ऑटो डिलीट" का ऑप्शन आपको लोकेशन हिस्ट्री में नीचे मिल जाएगा. फायदा बताने की जरूरत नहीं है फिर भी बता देते हैं. ऐसा करने से बैटरी, डेटा और प्राइवेसी तीनों पर लगाम लगेगी .
सारे सेंसर्स डिसेबल कर दीजिए
फोन में अचानक से कैमरा खुल जाना कोई नई बात नहीं है. ऐसा फोन में लगे हार्डवेयर सेंसर की वजह से होता है. आप जब फोन यूज कर रहे हो तो आप तुरंत उसको बंद कर सकते हैं, लेकिन सोचिए आपका फोन आपके पॉकेट में पड़ा हो तब क्या होगा. आप इन सेंसर्स को बंद कर सकते हैं. आपको "डेवलपर ऑप्शन" में जाना होगा. यहां आपको क्विक सेटिंग्स का ऑप्शन दिख जाएगा. बहुत से ऑप्शन सामने दिख जाएंगे. आपको सेंसर्स ऑफ को एक्टिव कर देना है. एक बार इनेबल करने के बाद आपके फोन में टॉप पर जो सेटिंग का मेन्यू होता है, वहां पर भी इसका टैब मिल जाएगा. सेंसर्स ऑफ होने से माइक्रोफोन, जीपीएस, कंपास अचानक से ऑपरेट नहीं होंगे.
ऐड्स पर्सनलाइजेशन को करें ऑफ
ऐसा हो सकता है कि आपने अपने एंड्रॉयड फोन से गूगल अकाउंट पर साइन इन नहीं किया हो (संभावना कम है) तो भी आपको विज्ञापन दिखाई देते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि लाखों वेबसाइट गूगल का यूज करती हैं आपको पर्सनल ऐड दिखाने के लिए. आपकी सर्च के आधार पर आपको ऐड दिखते हैं. इनको बंद किया जा सकता है. सबसे पहले अपने फोन की सेटिंग्स में गूगल पर जाइए. मैनेज योर गूगल अकाउंट में दाखिल होने पर आपको "डेटा और प्राइवेसी" का ऑप्शन दिखेगा जिसमें आपको नीचे ऐड सेटिंग नजर आएगा. आप Ads Personliation को ऑफ कर दीजिए. ऐसा करने से आपको कम से कम सर्च या नेट सर्फिंग के आधार पर ऐड दिखना बंद हो जाएंगे. हालांकि, गूगल पर आने वाले नॉर्मल ऐड से छुटकारा मिलना असंभव है. पापी पेट का सवाल है भाई (गूगल की कमाई का).
बैकग्राउंड्स डेटा ऑफ
आज की तारीख में भारत में अनलिमिटेड इंटरनेट मिलना कोई बड़ी बात नहीं है. अनलिमिटेड इंटरनेट मतलब बिना किसी चिंता के मजे लिए जाओ. आपको शायद पता ना हो कि यही मजा आपके फोन के लिए ठीक नहीं है. ऐप्स बैकग्राउंड में डेटा को चूसते रहते हैं और ऐसे में बैटरी पर असर पड़ता है. यदि आपके पास सीमित इंटरनेट वाला प्लान है तो फिर चिंता और बड़ी है. आप बैकग्राउंड डेटा को स्थाई तौर पर बंद कर सकते हैं या फिर ऐप्स के हिसाब से भी. कई सारे ऐप होंगे जो आप शायद महीने में एक बार यूज करते हो लेकिन डेटा वो आपसे पूरा लेते हैं. फोन की सेटिंग्स में ऐप्स पर क्लिक कीजिए जहां आपको गूगल प्ले स्टोर दिखेगा. इसके अंदर मोबाइल डेटा और वाई-फ़ाई का ऑप्शन मिलेगा. यहीं से आप बैकग्राउंड डेटा को ऑफ कर सकते हैं. आपको यदि ऐप्स के हिसाब से ऐसा करना है तो सेटिंग्स में ऐप्स के अंदर ऐप्स मैनेजमेंट का ऑप्शन मिलेगा. आप जिस भी ऐप का डेटा बंद करना चाहते हैं वो कर सकते हैं. दोनों ही तरीकों में अब आप जब उस ऐप को यूज करेंगे तब ही डेटा की खपत होगी.
यूसेज एंड डायग्नोस्टिक्स
कोई मेडिकल की टर्म नहीं है, बल्कि एंड्रॉयड की प्रॉपर्टी है. आपके फोन में जब कभी कोई ऐप क्रेश हो जाता है या सही तरीके से काम नहीं करता तो उसकी रिपोर्ट गूगल को और संबंधित डेवलपर को भेजी जाती है. ऐसा उस ऐप को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है. आमतौर पर ये एक सामान्य जानकारी होती है, जैसे कि फोन का बैटरी लेवल या सिस्टम एक्टिविटी का ब्योरा. इस रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को बंद किया जा सकता है. आपको लगेगा कि ऐसा करने से आपका ऐप कैसे ठीक होगा तो एक बात जान लीजिए कि करोड़ों लॉग एंड्रॉयड यूज करते हैं तो गूगल को तो पता चलना ही है. अब यदि ऐप में कुछ भी बड़ी दिक्कत आई होगी तो खुद गूगल बताता है ब्लॉग पर या सोशल मीडिया पर. आपके अकेले के फोन से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. कारण जान लिया अब फोन की सेटिंग्स में गूगल पर जाइए और ऊपर दायीं तरफ तीन डॉटस पर क्लिक कीजिए. Usage & Diagnostics को ऑफ कर दीजिए.
इंस्टेंट ऐप्स
आप कहोगे कि इंस्टेंट नूडल तो सुना था लेकिन ये इंस्टेंट ऐप्स क्या बला है? पहले ये जान लीजिए कि एंड्रॉयड में इंस्टेंट ऐप्स 2016 से मौजूद हैं. किसी भी ऐप को डाउनलोड करके उसको यूज करने से पहले ट्राइ करने का ऑप्शन इंस्टेंट ऐप्स है. उदाहरण के लिए, आप इंटरनेट पर कुछ देख रहे थे और आपको उसको खरीदने का मन हुआ तो आप इंस्टेंट ऐप का यूज कर सकते हैं बिना अपनी पूरी जानकारी दिए. ऐप डेवलपर्स आपकी गतिविधियों पर नजर ना रख पाए. गूगल ने ये सोचकर ये सुविधा दी थी लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं है. इंस्टेंट ऐप्स को बंद करने के लिए आपको सेटिंग्स में ऐप्स पर जाना होगा. ऐप्स के अंदर डिफॉल्ट ऐप मिलेगा और उसके अंदर होता है- "ओपनिंग लिंक". यहीं पर आपको इंस्टेंट ऐप्स दिख जाएगा. ऑफ कर दीजिए.
सटीक लोकेशन ऑफ
लोकेशन की ट्रेसिंग पर आपकी अपनी राय हो सकती है. मतलब आपके फोन की लोकेशन पर नजर रखी जाए या नहीं, वो आप पर निर्भर करता है. आपको बेहतर डायरेक्शन मिलता है और लोकल जानकारी भी. लेकिन इसके साथ आपकी निजता भी चली जाती है. हो सकता है कि आप लोकेशन सर्विस चालू रखना पसंद करते हों लेकिन आपके घर का सटीक पता कतई नहीं बताना चाहेगे. सोशल मीडिया या मौसम की जानकारी वाले ऐप का आपके घर के पते से भला क्या काम होगा? आप अपने एंड्रॉयड फोन में इस फीचर को बंद कर सकते हैं. सेटिंग्स में लोकेशन पर जाइए और उसके अंदर लोकेशन सर्विस दिख जाएगा. जिस भी ऐप को सेलेक्ट करेंगे, उसमें लोकेशन से जुड़े कई ऑप्शन आपको मिल जाएंगे. Precise Location को ऑफ कर दीजिए. यदि आपके गूगल के लेटेस्ट वर्जन मतलब एंड्रॉयड 12 वाला फोन है तो आपको ऐप इंस्टॉल करने पर या ओपन करने पर Precise या Approximate लोकेशन का पॉप अप भी मिल जाएगा.
सेंसिटिव नोटिफिकेशन्स ऑफ
आपके स्मार्टफोन में लॉक करने के कई ऑप्शन हैं, जैसे कि पिन, पैटर्न, पासवर्ड, फिंगर या फेस अनलॉक. बिना इनके इस्तेमाल के आपका फोन अनलॉक नहीं होगा. फोन भले अनलॉक ना हो लेकिन आपकी निजी जानकारी पर नजर जरूर रखी जा सकती है. ऐसा किसी ट्रिक या हैकिंग से नहीं, बल्कि नोटिफिकेशन पैनल की सेटिंग्स से हो सकता है. आपका फोन भले लॉक हो लेकिन कोई नोटिफिकेशन आएगा और यदि उस पर टैप किया जाए तो कुछ जानकारी दिखने लगती है. स्मार्टफोन की भाषा में इसको प्रिव्यू कहते हैं और ये कई बार घातक हो सकता है. अपने एंड्रॉयड फोन में इसको बंद किया जा सकता है. नोटिफिकेशन सेटिंग में जाकर Sensitive Notifications को बंद कर दीजिए. कई फोन में इस फीचर का नाम "Hide Content on lockscreen" भी होता है. ऑफ करने के बाद आपको सिर्फ उस ऐप का पॉप अप दिखेगा जैसे मैसेज या ईमेल. उसके अंदर की जानकारी फोन को अनलॉक करने पर ही दिखेगी. ऊपर बताई सेटिंग्स को ऑफ करके आप बैटरी बचा सकते हैं. डेटा की खपत कम कर सकते हैं और स्मार्टफोन से बेहतर परफॉर्मेंस की उम्मीद कर सकते हैं.
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