साल 1967-68 का क्रिकेट सीज़न. नवाब पटौदी की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार उपमहाद्वीप के बाहर टेस्ट सीरीज़ जीती. हारने वाली टीम, न्यूज़ीलैंड. अगले ही बरस भारत दौरे पर आई. ब्रेबोर्न स्टेडियम में भारत ने पहला टेस्ट 60 रन से जीता. और नागपुर में अगला मैच 167 रन से हारे. अब बारी थी हैदराबाद टेस्ट की. दोनों टीम्स हैदराबाद पहुंचीं. न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीता और पहले बैटिंग चुन ली. बुधवार 15 अक्टूबर को शुरू हुए इस मैच के पहले दिन न्यूज़ीलैंड ने नौ विकेट खोकर 181 रन बनाए. अगला पूरा दिन बारिश से धुल गया. और शुक्रवार को इस टेस्ट का रेस्ट डे था. जैसा कि उन दिनों रवायत थी, पांच दिन के टेस्ट के लिए छह दिन का शेड्यूल बनता था. और इसमें तीसरा दिन रेस्ट डे होता था.
Ind vs NZ मैच में न्यूज़ीलैंड ने टीम इंडिया से ये कैसा खतरनाक बदला लिया!
गलती ग्राउंड्समैन की, सजा भारत को.
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रेस्ट डे के बाद जब दोनों टीम्स 18 अक्टूबर को मैदान में लौटीं, तो नज़ारे अजब थे. पिच पर मस्त घास जमी हुई थी. कायदे से इस घास को पहले ही काट दिया जाना चाहिए था. लेकिन कायदा मानता कौन है इस देश में? तो कायदे नहीं माने गए और पिच पर घास के साथ दो बड़े पैच भी नमूदार हुए. अंपायर्स ने ये हाल देखा तो घास काटने का आदेश सुना दिया. लेकिन कीवी कप्तान अड़ गए. बोले, ये पहले होना था. नहीं हुआ. तो अब ना होने देंगे.
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