बंगाल के मौसम में जितनी गर्मी नहीं है, उससे कहीं ज्यादा तपिश वहां की सियासत में है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) दो-फाड़ हो गई है. पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 बागी विधायकों ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. बुधवार, 3 जून को इन विधायकों ने ऋतब्रत को विधायक दल का नेता भी चुन लिया. यह पूरा खेल शुरू हुआ उस मीटिंग से, जहां मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और ऋतब्रत बनर्जी की ‘इत्तेफाकन’ मुलाकात हुई थी.
13 दिन में TMC दो-फाड़, शुभेंदु-ऋतब्रत की मुलाकात में कैसे हो गया 'खेला'? जानें इनसाइड स्टोरी
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 58 बागी विधायकों ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इन विधायकों ने Ritabrata Banerjee को विधायक दल का नेता चुन लिया. यह पूरा खेल शुरू हुआ उस मीटिंग से, जहां मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari और ऋतब्रत बनर्जी की मुलाकात हुई थी.


पश्चिम बंगाल में मिली करारी हार के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उल्टी गिनती शुरू हो गई. पार्टी के सीनियर नेता खुलकर असंतोष जताने लगे. बड़ी संख्या में पार्षदों का पलायन होने लगा. विधायकों और सांसदों ने भी पार्टी से किनारा करना शुरू कर दिया. बगावत के सुर तेज होने लगे. इस बगावत का पूरा खेल 22 मई को दिल्ली के बंग भवन में एक मीटिंग से शुरू हुआ.
बंग भवन में मुलाकात के बाद हो गया खेलआजतक डिजिटल के एडिटर (नई दिल्ली) केशवानंद धर दुबे के मुताबिक, शपथ ग्रहण के बाद बतौर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 22 मई को दिल्ली का पहला दौरा किया. पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात से पहले वो बंग भवन गए. ‘बंग भवन’, राजधानी दिल्ली में पश्चिम बंगाल सरकार का ऑफिशियल स्टेट गेस्ट हाउस है. यहां सरकारी अधिकारी, मंत्री और राजनीतिक हस्तियां आकर रुकते हैं. यहां शुभेंदु अधिकारी की मुलाकात टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी से हुई. इस एक मुलाकात ने सिर्फ 13 दिनों में पार्टी को दो हिस्सों में बांट दिया.
बंग भवन में सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात का पूरी जानकारी खुद ऋतब्रत बनर्जी ने ही दी. उन्होंने बताया,
“मैं जब वहां था तो अचानक देखता हूं कि पीछे से आवाज आती है. क्या विधायक साहब, बंग भवन में रुके हैं? जब मैंने देखा तो पाया कि वहां बंगाल के मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने मुझे नमस्कार किया. मैंने भी इसका उत्तर दिया. इसके बाद मैंने कहा कि नहीं दादा, मैं अपना बंगला खाली करने आया हूं, जो संसद की बाकी प्रक्रिया है पूरी करने आया हूं. फिर सीएम शुभेंदु ने कहा कि मैं प्रशासनिक बैठकों में सभी विरोधी विधायकों को भी बुला रहा हूं, आप भी बैठक में आइएगा. फिर मैंने भी कहा कि सूचना मिलने पर जरूर आऊंगा.”
ऋतब्रत बनर्जी ने मुलाकात पर कहा था, ‘सामान्य बातचीत थी’ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि सीएम शुभेंदु से उनकी लगभग 40 सेकंड की बातचीत हुई. उन्होंने आगे कहा, "लोग कह रहे हैं कि मैं दिल्ली सीएम से मुलाकात करने आया हूं. पर ऐसा नहीं है. वो सीएम के तौर पर सदन के नेता हैं, वो नमस्कार करते हैं तो मैं मुंह फेर कर नहीं जा सकता."
दिल्ली में इस मुलाकात के बाद से ही कयास लगने लगे कि ऋतब्रत बनर्जी बीजेपी के पाले में जा सकते हैं. हालांकि, उन्होंने तब इससे इनकार कर दिया था. लेकिन अब वे बंगाल में नेता प्रतिपक्ष है. उन्हें विधानसभा में नेता विपक्ष का रूम भी अलॉट कर दिया गया है.
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ऋतब्रत बनर्जी का राज्यसभा सदस्य (MP) के रूप में दूसरा कार्यकाल 2 अप्रैल 2026 को आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया था. नियमों के मुताबिक, संसद सदस्यता खत्म होने के बाद एक निश्चित अवधि के भीतर दिल्ली का सरकारी आवास खाली करना अनिवार्य होता है. अप्रैल 2026 में राज्यसभा से हटने के बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा का चुनाव लड़ा और मई 2026 में उलुबेरिया पुरबा सीट से विधायक चुने गए. चूंकि अब वे सांसद नहीं हैं बल्कि बंगाल में विधायक हैं, इसलिए उनका राजनीतिक कार्यक्षेत्र कोलकाता (बंगाल विधानसभा) हो गया है.
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