एक पैरोडी अकाउंट ने कुछ ट्वीट किया, और हमारे मशहूर खेल पत्रकारों ने इसे हाथों-हाथ लपकते हुए इस पर ख़बर बना दी. यहां तक कि पाकिस्तानी पत्रकार भी इसे लेकर श्योर नहीं थे. वो भी ख़बर नकारने की जगह इन फोटोज और वीडियोज को शेयर ना करने की अपील ही कर रहे थे. यानी भारत और पाकिस्तान दोनों ओर की खेल पत्रकारिता ऐसे ही चल रही है.
बाबर आज़म को बदनाम करने के पीछे किसने रची साजिश?
ये चल क्या रहा है?
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यानी भारत और पाकिस्तान छोड़िए, बड़े-बड़े स्वनामधन्य विदेशी मीडिया हाउस भी इस चक्कर में फंस गए. और क्यों फंसे, क्योंकि उन्होंने हमारे तरफ के खेल पत्रकारों पर भरोसा कर लिया. जो कि उन्हें नहीं करना चाहिए था. क्योंकि हमारे यहां तो खेल पत्रकारिता पार्टटाइम में होती है. फुलटाइम में तो ये लोग जाने कौन से गीत गाते हैं.लेकिन इन सबके बीच बाबर आज़म ने आपा नहीं खोया. वह शांति से अपना काम करते रहे. यहां तक कि उन्होंने इस पूरे मामले पर कोई कमेंट भी नहीं किया. और हम बाबर जैसे बड़े नाम वाले प्लेयर से इसी की की उम्मीद करते हैं. ब्रावो बाबर!
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