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ED ने अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप के परिसरों की तलाशी ली, क्या है पूरा मामला?

ईडी की यह कार्रवाई वेदांता के दिल्ली और राजस्थान के कार्यालयों के अलावा कुछ अन्य जगहों पर की गई है.

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वेदांता समूह ने 400 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के इलेक्टोरल बांड खरीदे थे (फोटो क्रेडिट: Business Today)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता समूह (Vedanta Group) के परिसरों पर तलाशी अभियान चला रहा है. बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में समाचार एजेंसी पीटीआई हवाले से बताया गया है कि यह तलाशी अभियान सोमवार 1 जून से जारी है.  इस छापेमारी के बारे में ज्यादा जानकारी अभी आनी बाकी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक यह तलाशी अभियान फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ा है.

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दिल्ली और राजस्थान समेत कई जगहों पर तलाशी अभियान 

अधिकारियों के मुताबिक ये कार्रवाई दिल्ली और राजस्थान में वेदांता के कार्यालयों के अलावा कुछ अन्य जगहों पर की गई है. ईडी के अधिकारियों का कहना है कि ईडी ने FEMA के तहत वेदांता के खिलाफ जांच शुरू की है. इसी सिलसिले में ये तलाशी अभियान शुरू किए गए. रिपोर्ट में बताया गया है कि वेदांता समूह पर यह जांच ऐसे समय में हो रही है, जब करीब महीनेभर पहले ही कंपनी को अपने लोन देने वाले संस्थानों से एक डिमर्जर को लेकर हरी झंडी दी गई है.  

डिमर्जर के जरिये कंपनी को 6 अलग-अलग स्वतंत्र कंपनियों में बांटने की योजना बनाई गई है. डिमर्जर के जरिये एक  बड़ी कंपनी को अलग अलग कंपनियां बनाकर कारोबार को बांट दिया जाता है. मान लीजिए कोई कंपनियां कपड़े, साबुन, तेल या शैंपू बनाती है और इन कपड़ों को देश -विदेश में बेचती है लेकिन अभी ये सभी धंधे एक पैरेंट कंपनी के बैनर तले चल रहे हैं लेकिन इन कारोबारों को अलग-अलग करने के लिए 4-5 कंपनियां बना दी जाए तो इसे डिमर्जर कहेंगे.  

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वेदांता ने दी सफाई ?

वहीं, सीएनबीसी टीवी18 की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि तलाशी अभियान वेदांता द्वारा अपनी पैरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को किए गए रॉयल्टी भुगतान से संबंधित है. इस बारे में वेदांता समूह के प्रवक्ता ने कहा, "हम अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और मांगी गई सभी जानकारी मुहैया करा रहे हैं. 

कंपनी सभी नियम कायदों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है. चूंकि मामला फिलहाल नियामक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए हम इस मामले पर अभी इससे ज्यादा टिप्पणी नहीं कर सकते."

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FEMA के तहत कब कार्रवाई होती है?

फेमा की कार्रवाईविदेशी मुद्रा लेनदेन में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर होता है . इस लेनदेन में जब किसी व्यक्ति या कंपनी की तरफ उल्लंघन का संदेह होने पर ईडी (इकोनॉमिक डिवीजन) FEMA के तहत कार्रवाई करता है. इसमें ज्यादातर ऐसे मामले शामिल होते हैं जैसे अवैध रूप से विदेश में पैसे भेजना, विदेश में अवैध रूप से प्रॉपर्टी बनाना या विदेशी निवेश से संबंधित नियमों का पालन न करना वगैरा.  

क्या वेदांता ने इलेक्टोरल बांड खरीदे थे?

जी हां, वेदांता समूह ने 400 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के इलेक्टोरल बांड खरीदे थे. इसमें से भाजपा को सबसे ज्यादा फायदा हुआ क्योंकि भाजपा को करीब 230 करोड़ रुपये मिले. वेदांता ने कांग्रेस  को लगभग 125 करोड़ रुपये, नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल को 40 करोड़ रुपये और झारखंड मुक्ति मोर्चा को 5 करोड़ रुपये से ज्यादा मिले. इसी तरह से तृणमूल कांग्रेस को लगभग 20 लाख रुपये का दान दिया.

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