जब ढह रही हों आस्थाएं जब भटक रहे हों रास्ता तो इस संसार में एक स्त्री पर कीजिएविश्वास.
Home|Sports|Ek Kavita Roz Poem by Kumar Ambujकुमार अंबुज की एक कविता 'एक स्त्री पर कीजिए विश्वास'क्योंकि औरत आखिरी शरणस्थली है.Advertisement निवेदिता 28 मई 2018 (अपडेटेड: 28 मई 2018, 01:33 PM IST)Subscribe to Notificationsजब ढह रही हों आस्थाएं जब भटक रहे हों रास्ता तो इस संसार में एक स्त्री पर कीजिए विश्वास.Add Lallantop as a Trusted SourceAdvertisementलल्लनटॉप का चैनलJOINकरेंसम्बंधित ख़बरेंनेपाल के बाद इटली ने इंग्लैंड को चौंकाया, एक बड़ा रिकॉर्ड भी बना दियाभारत की बैटिंग आसमान जैसी और ये... मोईन अली की ये बात बाबर-आगा को अंदर तक चुभेगीऑस्ट्रेलिया सुपर 8 से लगभग बाहर हो चुकी है, खराब परफॉरमेंस पर पूर्व खिलाड़ी ने क्या कह दिया?'इमरान का तुरंत इलाज करो', सुनील गावस्कर, कपिल देव की पाकिस्तान सरकार से सीधी मांगAdvertisement