बनारस: वो शहर जो आधा है, आधा नहीं है.
कवि केदारनाथ की कविता.
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इस शहर में वसंत
अचानक आता है
और जब आता है तो मैंने देखा है
लहरतारा या मडुवाडीह की तरफ़ से
उठता है धूल का एक बवंडर
और इस महान पुराने शहर की जीभ
किरकिराने लगती है.
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