उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) बनकर तैयार है. 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज को जोड़ेगा. लगभग 36 हजार करोड़ की लागत से इसे तैयार किया गया है. यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों और 519 गांवों से होकर गुजरेगा. इससे दिल्ली-मेरठ से प्रयागराज तक का सफर 6-8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा. पहले ये दूरी तय करने में कम से कम 10 घंटे लग जाते थे.
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Ganga Expressway News: गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ उत्तर प्रदेश के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. यूपी के दो छोर को जोड़ने के साथ ही इस एक्सप्रेसवे की कई और खासियत भी हैं. इस पर एक इमरजेंसी लैंडिग स्ट्रिप भी बनाई गई है.


इस एक्सप्रेसवे का मेन उद्देश्य पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़ना है. गंगा एक्सप्रेसवे पर कुल 21 इंटरचेंज, 2 मेन टोल प्लाजा, 2 एक्सट्रा मेन टोल और 19 रैंप वाले टोल प्लाजा प्रस्तावित हैं. ये एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज पहुंचेगा. अगर दिल्ली के लोगों को गंगा एक्सप्रेसवे पर जाना है, तो उन्हें मेरठ के बिजौली गांव तक पहुंचना होगा. दिल्ली से बिजौली की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है.
यूपी सरकार इस एक्सप्रेसवे को सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रखना चाहती. सरकार का प्लान है कि इस एक्सप्रेसवे के पास इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, एग्रो प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग जोन बनाए जाएं. इसके लिए सरकार प्लानिंग कर रही है. साथ ही, शाहजहांपुर में इस एक्सप्रेसवे पर एक इमरजेंसी लैंडिग स्ट्रिप भी बनाई गई है. इससे किसी युद्ध या इमरजेंसी की स्थिति में एयरफोर्स के जहाज उतर सकेंगें. एनडीटीवी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार इस एक्सप्रेसवे को यूपी में मौजूद दूसरे एक्सप्रेसवे जैसे यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा. प्लान ये भी है कि भविष्य में इसे मेरठ से बढ़ा कर हरिद्वार तक जोड़ा जा सकता है. इससे पूर्वी यूपी से डायरेक्ट उत्तराखंड तक कनेक्टिविटी मिलेगी.

ऐतिहासिक रूप से देखें तो पश्चिमी यूपी पहले से ही उद्योगों के कारण पूर्वी यूपी की तुलना में काफी समृद्ध रहा है. पूर्वी यूपी की निर्भरता आज भी खेती पर ज्यादा रही है. मेरठ को प्रयागराज से जोड़कर, गंगा एक्सप्रेसवे, दो अलग-अलग आर्थिक प्रोफाइल वाले क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा. हालांकि, हर बड़े एक्सप्रेसवे के साथ महत्वपूर्ण बदलावों और रोजगार अवसरों की बात की जाती है, लेकिन नतीजे हमेशा उम्मीद के मुताबिक नहीं होते हैं. गंगा एक्सप्रेसवे को जो बात सबसे अलग बनाती है, वह है सड़क इंफ़्रास्ट्रक्चर को औद्योगिक केंद्रों, लॉजिस्टिक्स हब, हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी, वेयरहाउसिंग और शहरी विकास के साथ जोड़ने की कोशिश.

अगर पूरी योजना में प्रस्तावित 47,000 करोड़ रुपये की औद्योगिक योजनाएं जमीन पर उतर आती हैं, तो यह प्रोजेक्ट सिर्फ यात्रा के समय को ही नहीं, बल्कि उससे कहीं अधिक चीजों को नया रूप दे सकता है. इसके अलावा, यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस लिहाज से भी यह एक्सप्रेसवे अहम है क्योंकि जिन जिलों या गांवों से ये निकल रहा है, वहां के वोटों पर इसका असर देखने को मिलेगा.
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