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राजनीति तैयार हो जाओ, परिवारवाद के एक और युवराज विक्रमादित्य आ रहे हैं

83 साल के वीरभद्र ने अपने 28 साल के बेटे के लिए अपनी सीट छोड़ दी है.

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विक्रमादित्य शिमला ग्रामीण से लड़ेंगे चुनाव.
83 साल की उम्र वाले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपना राजनीतिक उतराधिकारी चुन दिया है. ये कोई और नहीं, उनके अपने इकलौते बेटे विक्रमादित्य सिंह हैं. इनके लिए राजा साहेब के नाम से पुकारे जाने वाले वीरभद्र सिंह ने अपनी खानदानी सीट शिमला ग्रामीण यानी शिमला रूरल छोड़ दी है. अब पिता की जमी-जमाई सीट पर जीत की जलेबी खाने की उम्मीद है 28 साल के विक्रमादित्य सिंह बुशहर को. उन्होंने अपने नाम के पीछे बुशहर लगाना शुरू कर दिया है क्योंकि वो इसी रियासत से आते हैं.

कौन हैं विक्रमादित्य सिंह

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विक्रमादित्य सोशल मीडिया और शिमला में पिछले कुछ समय से एक्टिव हो गए हैं.

वीरभद्र की पहली शादी राजकुमारी रत्तन कुमारी से हुई, जिनसे चार बेटियां हैं. 1983 में पत्नी की मौत हुई, तो 1985 में प्रतिभा सिंह से शादी की. उनसे बेटा हुआ विक्रमादित्य और बेटी अपराजिता. प्रतिभा सिंह मंडी से लोकसभा सांसद रह चुकी हैं. अपराजिता की शादी पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के पोते से हुई है. विक्रमादित्य ने शिमला के मशहूर बिशप कॉटन स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद 2007 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से हिस्ट्री ऑनर्स में बीए किया. हिमाचल प्रदेश स्पोर्ट्स, कल्चर और एनवायर्नमेंट एसोसिएशन (HPSCEA) नाम से एक एनजीओ भी चलाते हैं.
यूथ कांग्रेस के चुनाव में आचार संहिता तोड़ी!
सीएम के बेटे ने पहली बार 2011 में हिमाचल यूथ कांग्रेस प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ा, जिसमें वो जीते भी. उस समय 22 साल के विक्रमादित्य इस पोस्ट पर बैठने वाले सबसे युवा प्रेसिडेंट थे. खास बात ये कि इस चुनाव में इनका मुकाबला कांगड़ा से मशहूर कांग्रेसी नेता और वीरभद्र के विरोधी माने जाने वाले जी. एस. बाली के बेटे रघुबीर सिंह से था. हालांकि विक्रमादित्य ये चुनाव जीत गए थे मगर बाद में इस चुनाव को रद्द घोषित कर दिया गया. कहा गया कि विक्रम ने चुनाव के दौरान आचार संहिता तोड़ी थी और उनके चुनाव लड़ने पर एक साल का बैन लग गया. 2013 में विक्रमादित्य ने फिर ये चुनाव जीता. विक्रम ने शूटिंग में हिमाचल की तरफ से नेशनल लेवल पर गेम में हिस्सा लिया है. 2007 में ट्रैप शूटिंग इवेंट में कांस्य पदक भी जीता था.

विक्रमादित्य का विकल्प


वीरभद्र के पास विक्रमादित्य के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

अपने 50 साल के राजनीतिक करियर में वीरभद्र ने इतने हमले कभी नहीं झेले होंगे, जितने इन दिनों हो रहे हैं. भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई और ईडी के निशाने पर हैं वीरभद्र और प्रतिभा. कांग्रेस के भीतर से वीरभद्र का विरोध करने वालों की भी कमी नहीं है. विरोधियों में सबसे ऊपर हैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखबीर सिंह सुक्खू. इन्हीं से परेशान होकर पिछले दिनों वीरभद्र ने सोनिया गांधी को लेटर लिखकर कहा था कि अगर सुक्खू को नहीं हटाया गया तो वो चुनाव नहीं लड़ेंगे. सुक्खू के अलावा जीएस बाली, कौल सिंह ठाकुर और आनंद शर्मा भी वीरभद्र के विरोधी माने जाते हैं.
बीजेपी में प्रेमकुमार धूमल ने अपने बेटे अनुराग को अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित कर लिया है. मगर वीरभद्र इस मामले में काफी पीछे हैं. इसलिए वीरभद्र के पास बेटे विक्रमादित्य को लॉन्च करने के अलावा कोई चारा नहीं है. पत्नी प्रतिभा सिंह भी सीबीआई जांच के लिए तलब होती रहती हैं. इसलिए उस सीट से विक्रमादित्य को विधानसभा में उतारने की सोची है, जहां वीरभद्र को जीत का पूरा भरोसा है.

हिमाचल और परिवारवाद

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प्रेमकुमार धूमल और वीरभद्र के बीच हर चीज में कॉम्पिटीशन है.

हिमाचल में अब तक पांच मुख्यमंत्री हुए हैं. 1952 में पहली बार यशवंत सिंह परमार मुख्यमंत्री बने और फिर 1963 से 1977 तक भी इस पद पर रहे. 18 साल के मुख्यमंत्री काल में यशवंत परमार ने राजनीति से परिवार को दूर रखा. दूसरी शादी पहले से राजनीति में सक्रिय सत्यावती दांग से की, जो बाद में प्रदेश कांग्रेस चीफ बनीं और राज्यसभा सांसद भी रहीं. इसके अलावा वाईएस जब तक जिंदा रहे उनके 4 बेटों और 4 बेटियों में किसी ने भी राजनीति में एंट्री नहीं मारी. 1981 में यशवंत परमार के निधन के 2 साल बाद बेटे कुश परमार ने विधायकी का चुनाव लड़ा.
दूसरे मुख्यमंत्री ठाकुर राम लाल के बेटे जगदीश ठाकुर की भी सीधे तौर पर राजनीति में एंट्री नहीं हुई. बेटी की शादी कुश परमार से हुई. मगर जगदीश के बेटे यानी ठाकुर राम लाल के पोते रोहित ठाकुर शिमला की जुब्बल-कोटखाई सीट से विधायक हैं.
परिवारवाद के मामले में शांता कुमार पाक-साफ रहे हैं. शांता लंबे समय तक कांगड़ा की सुलह सीट से विधायक बनकर दो बार मुख्यमंत्री बने और फिर कांगड़ा लोकसभा से सांसद हैं. शांता के एक बेटा और तीन बेटियां हैं और कोई भी राजनीति में नहीं हैं. वहीं बीजेपी से मुख्यमंत्री रहे प्रेमकुमार धूमल के दो बेटे हैं. अनुराग ठाकुर और अरुण ठाकुर. अनुराग हमीरपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं, बीजेपी की यूथ विंग के प्रेसिडेंट हैं, भारत के क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई के मुखिया रहे और हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के भी प्रेसिडेंट हैं. अरुण लोकल लेवल पर भाजपा का काम देखते हैं और HPCA से भी जुड़े हुए हैं.


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