रनमशीन विराट कोहली. चेज मास्टर विराट कोहली. किंग कोहली. ऐसा बैटर, जो जब चला तो इसके लिए तमाम विशेषण कम पड़ गए. देखते ही देखते विराट ने इंटरनेशनल क्रिकेट में 70 शतक ठोक दिए. लगा कि आजादी के अमृत महोत्सव तक उनसे आगे सिर्फ तेंडुलकर रह जाएंगे. हां, ठीक है तब अमृत महोत्सव का ज़िक्र नहीं था.
विराट कोहली अपनी फॉर्म पर चाहे जो कहें, स्टैट्स के मुताबिक कहानी में झोल तो है!
आखिर कब 71वीं सेंचुरी मारेंगे किंग कोहली?


लेकिन आजादी के 75 साल तो साल 2022 में ही पूरे होने वाले थे ना? और कोहली 2019 तक 70 शतक मार ही चुके थे. उनके और सचिन के बीच में तब सिर्फ रिकी पॉन्टिंग बचे थे. और ये भाईसाब अभी भी वहीं हैं. मानो दुनिया ही रुक गई है. ईडन गार्डन्स में आए आखिरी शतक के बाद भी विराट हजारों रन बना चुके हैं. लेकिन.... अंतर बरक़रार है. क्योंकि इन रन्स में सेंचुरी नहीं आई ना मित्र.
उनकी फॉर्म पर दुनियाभर चर्चा कर रही है. हाल ही में इस बारे में ब्रायन लारा ने कहा था,
'मैं एक प्लेयर के रूप में विराट की रिस्पेक्ट करता हूं, आप देखिएगा वो इस फेज से और बेहतर प्लेयर बनकर निकलेंगे. अभी इस वक्त में वह बहुत सारी चीजें सीख रहे होंगे. आप उन्हें चुका हुआ नहीं मान सकते.'
लारा जैसे तमाम लोग कोहली के समर्थन में हैं. उन्हें यकीन है कि किंग कोहली फिर से फॉर्म में लौटेंगे. और पहले की तरह रन बरसाएंगे. लेकिन तमाम लोग ऐसे भी हैं जिन्हें अब कोहली पर भरोसा नहीं रहा. ऐसे लोगों में विरेंदर सहवाग, वेंकटेश प्रसाद, कपिल देव, अजय जडेजा और माइकल वॉन जैसे दिग्गज शामिल हैं. लोग अधीर हो चुके हैं. इनका मानना है कि अब कोहली उस लय में वापस नहीं लौट पाएंगे.
# Virat Kohli Form
कोहली पर इतनी बातें हुईं कि फ़ैन्स और एक्सपर्ट्स की सुनते-सुनते खुद कोहली को भी इस मसले पर कमेंट करना पड़ा. कोहली ने एशिया कप से पहले स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए अपनी फॉर्म पर कहा,
'मैं जानता हूं कि मेरा खेल किस लेवल पर है. लेकिन अगर आपमें विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करने की क्षमता नहीं हो, तो आपका इंटरनेशनल करियर इतना लंबा नहीं चल सकता है. मैं जल्द से जल्द फॉर्म में लौटना चाहता हूं और इसके लिए मेहनत कर रहा हूं. हालांकि इसे लेकर खुद पर कोई प्रेशर नहीं बना रहा हूं.'
यानी कोहली ने भी मान लिया है कि उनकी फॉर्म डाउन है. उनसे रन नहीं आ रहे. लेकिन क्या ये पूरा सच है? कहीं ऐसा तो नहीं कि कोहली अपनी ही सफलता के बोझ तले दबे जा रहे हैं. अपने आखिरी शतक के बाद विराट ने कुल 23 ODI इनिंग्स खेली हैं. इन इनिंग्स में उनके नाम 10 पचासे हैं. जिनमें से चार लगातार मैच में आए. इतना ही नहीं. 10 पचास प्लस स्कोर्स में से चार ऐसे हैं, जिनमें वह बेहद क़रीबी अंतर से शतक से चूक गए.
जबकि T20I मैच की बात करें तो उन्होंने कुल 24 पारियों में बैटिंग की. इन पारियों में कोहली के नाम आठ पचासे हैं. और इनमें 94, 80, 77, 73 रन की नाबाद पारियां भी शामिल हैं. जबकि एक बार वह 85 रन बनाकर आउट हुए. अब मुझे नाम लेने की जरूरत नहीं है. लेकिन आप इतिहास देखेंगे तो कई ऐसे लोगों को दिग्गज माना जाता है जो पूरे करियर में सात-आठ-नौ-दस मैच में कहीं एक बार पचास का आंकड़ा पा कर पाते थे.
जबकि कोहली अपने सबसे खराब वक्त में भी दो से तीन मैच में एक बार फिफ्टी मार ही रहे हैं. इसके बाद भी उनकी लगातार आलोचना ही हो रही है. यहां तक कि उन्होंने खुद भी स्वीकार लिया कि वह खराब दौर से गुजर रहे हैं. अब यहां हमने सिर्फ लिमिटेड ओवर्स का ज़िक्र किया है. तो अभी कुछ लोग कूदकर आएंगे और कहेंगे कि टेस्ट के आंकड़े कहां हैं?
# Virat Recent Matches
तो उन लोगों के लिए बस ये कह रहे हैं कि भाया, अभी सर पर एशिया कप और T20 वर्ल्ड कप है. इसके बाद अगले साल वनडे वर्ल्ड कप होगा. इसलिए हम लिमिटेड ओवर्स की बात कर रहे हैं. लेकिन आपका मन नहीं मान रहा तो जान लीजिए, पिछले शतक के बाद खेली गईं टेस्ट की 32 पारियों में कोहली के नाम छह पचासे हैं. इनमें से कई पारियां ऐसे वक्त में आईं जब टीम इंडिया बुरे हाल में थी.
इस दौर के बाकी टॉप इंडियन बैटर्स देखेंगे तो T20I की पिछली 24 पारियों में रोहित के नाम छह पचासे हैं. जबकि इतनी ही पारियों में राहुल के नाम दस T20I पचासे हैं. जबकि सूर्यकुमार ने अभी तक सिर्फ 21 पारियां ही खेली हैं. और इन पारियों में उनके नाम पांच पचासे और एक शतक हैं. और दीपक हूडा का इंटरनेशनल करियर अभी बस शुरू हुआ है.
लेकिन यार, जैसा कि आप लोग जानते ही हैं. और मेरे ऊपर आरोप भी लगते हैं, कि मैं कोहली फैन हूं. इसलिए उनके पक्ष में ही बात करता हूं. इसलिए फैसला आप ही करिए. क्योंकि कोहली के पिछले सात लिमिटेड ओवर्स गेम देखें, तो वह बुरी तरह से नाकाम रहे हैं. वह इन सातों पारियों में कैच आउट हुए हैं.
और उनके आउट होने का तरीका लगभग हर बार ही फ़ैन्स के साथ उन्हें भी फ्रस्ट्रेट कर गया. और इन तमाम आंकड़ों, रनों, पचासों और बातों के बाद भी. कहीं ना कहीं कुछ तो गड़बड़ है. अगर गड़बड़ नहीं होती, तो कोहली पुराने दिनों की तरह Let the Bat Speak करते. ना कि किसी इंटरव्यू में बैठकर ऐसे सवालों के जवाब देते.
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