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लक्ष्य सेन ने सेट किया स्टेज, इंडिया ने जीता थॉमस कप इतिहास का पहला गोल्ड!

इंडिया के इतिहास में पहले बार देश के पास ऐसा रोस्टर है, जो एक टीम की तरह किसी भी देश को मात देने की क्षमता रखता है. और थॉमस कप के फाइनल में यही देखने को मिला. 14-बार की चैंपियन इंडोनेशिया को हराकर इंडिया ने पहली बार थॉमस कप गोल्ड अपने नाम किया.

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इंडिया ने जीता पहला थॉमस कप गोल्ड (Courtesy: Twitter)

प्रकाश नाथ. नंदू नाटेकर. प्रकाश पादुकोण. पुलेला गोपीचंद. इंडिया को बैडमिंटन में ऐसे प्लेयर्स लगातार मिलते रहे हैं, जिन्होंने बड़े से बड़े स्टेज पर भारत का झंडा लहराया. इंग्लैंड ओपन से लेकर वर्ल्ड चैंपियनशिप्स, सबमे इंडिया ने कभी ना कभी मेडल जीता है. वर्ल्ड चैंपियनशिप के मेंस सिंगल्स में अब तक गोल्ड नहीं आया हैं. हालांकि पीवी सिंधू ने 2019 में विमिंस सिंगल्स का गोल्ड अपने नाम किया था.

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इंडिया के इतिहास में पहले बार देश के पास ऐसा रोस्टर है, जो एक टीम की तरह किसी भी देश को मात देने की क्षमता रखता है. और थॉमस कप के फाइनल में यही देखने को मिला. 14-बार की चैंपियन इंडोनेशिया को हराकर इंडिया ने पहली बार थॉमस कप गोल्ड अपने नाम किया.

# Thomas Cup Final
पहले मैच में लक्ष्य सेन ने अपनी खराब फॉर्म को पीछे छोड़ते हुए टोक्यो ओलंपिक्स के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट एंथोनी गिंटिंग को 21-8, 17-21, 16-21 से हराया. लक्ष्य को क्वॉर्टर और सेमी फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था, पर फाइनल में उनका डिफेंसिव गेम वापस फुल-फ्लो में दिखा. बैंकॉक में खेले जा रहे फाइनल के अगले मुकाबले में सात्विकसाइराज रैंकिरेड्डी-चिराग शेट्टी के सामने मोहम्मद अहसान और संजया सुकामुल्यो थे. अहसान आम तौर पर हेंड्रा सेतियावन के साथ खेलते हैं, पर मार्कस गीडीयन को हुई इंजरी की वजह से अहसान का साथ सुकामुल्यो दे रहे थें.

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पहला सेट इंडोनेशियन पेयर ने अपने नाम किया. दूसरा सेट भी उसी तरफ जाता नजर आ रहा है. अहसान-सुकामुल्यो ने 20-17 की लीड ले ली थी. लेकिन इसके बाद सात्विक-चिराग ने कमाल की वापसी की और दूसरा सेट 23-21 से अपने नाम किया. तीसरे सेट तक मोमेंटम बदल चुका था. 21-19 से तीसरा सेट जीतकर इंडिया के नंबर 1 डबल्स पेयर ने भारत को 2-0 की बढ़त दिलाई. 

इसके बाद इंडिया की जीत लगभग तय मानी जा रही थी. इसकी वजह? किदांबी श्रीकांत की फॉर्म. अब तक थॉमस कप में अपना हर मैच जीतने के बाद श्रीकांत आज भी हारने के मूड में नही थे. मगर उनके सामने थे जॉनथन क्रिस्टी. क्रिस्टी इस सीजन दो बार श्रीकांत को हरा चुके हैं. बहरहाल, श्रीकांत ने एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट क्रिस्टी की एक न चलने दी और सीधे सेट्स में ही मैच जीत लिया.

ग्रुप स्टेज में भारतीय टीम चाइनीज ताइपे के बाद दूसरे नंबर पर आई. जर्मनी और कनाडा को 5-0 हराने के बाद इंडिया को चाइनीज ताइपे ने 3-2 से हराया. इसके बाद क्वॉर्टर-फाइनल में इंडिया ने मलेशिया को 3-2 से हराया. सात्विक-चिराग, एचएस प्रणय, और किदांबी श्रीकांत ने अपने मैच जीत कर इंडिया के लिए इतिहास रचा. क्वॉर्टर-फाइनल जीतने के बाद इंडिया ने 43 साल बाद थॉमस कप में अपना पहला मेडल सुनिश्चित किया.

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इसके बाद इंडियन टीम का सामना डेनमार्क से था. जी हां, वही डेनमार्क जहां से वर्ल्ड नंबर 1 विक्टर एक्सेसन आते है. अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप विक्टर ने लक्ष्य को हरा भी दिया. पर किदांबी श्रीकांत, सात्विक-चिराग और प्रणय ने एक बार फिर कमाल किया और टीम को 3-2 से जीत दिलाई. इसमें श्रीकांत का अलग से ज़िक्र करना जरूरी है, क्योंकि उन्होंने एंडर्स एंटोनसेन को हराया. एंटोनसेन फिलहाल वर्ल्ड रैकिंग्स में तीसरे पायदान पर बैठे हैं. प्रणय ने अपने मैच में एंकल इंजरी से लड़ते हुए इंडिया को जीत दिलाई. उनकी तारीफ किए बिना ये कहानी अधूरी रहेगी.

अब थोड़ी चर्चा अपनी टीम की कर लें तो इस टीम में किदांबी श्रीकांत जैसे प्लेयर्स हैं, जो 2018 में वर्ल्ड नंबर 1 रह चुके हैं. प्रणय की बात करें तो वो प्रतिभा से भरे हुए हैं. सात्विक-चिराग ने तो टोक्यो 2021 के पहले से ही फै़न्स का दिल जीत रखा है. टीम का हिस्सा कृष्णा प्रसाद और विष्णु वर्धन भी हैं, जो डबल्स की दूसरी टीम हैं.

इसके बाद आते हैं टीम के लीडर लक्ष्य सेन, जिनके पास किदांबी और प्रणय से बहुत कम अनुभव है. लक्ष्य सिर्फ 20 साल की उम्र में ही वर्ल्ड चैंपियनशिप्स के सेमीफाइनल और इंग्लैंड ओपन के फाइनल तक का सफर तय कर चुके हैं. उनकी अगुवाई में ये टीम और भी बहुत कुछ कर सकती है. फिलहाल, हमारी तरफ से इस टीम को ढेर सारी बधाई.

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