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रोहित बस ये सीख लें तो इंडिया भी कई वर्ल्ड कप जीत सकता है!

अब 'कैप्टन मॉर्गन' ही दिला सकते हैं वर्ल्ड कप?

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रोहित शर्मा-जॉस बटलर (फोटो - AP)

इंग्लैंड वर्ल्ड चैंपियन बन गया है. अपने अंदाज में क्रिकेट खेलते हुए इस देश ने एक और वर्ल्ड कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली है. 2019 का वनडे वर्ल्ड कप चैंपियन इंग्लैंड अब 2022 का T20 वर्ल्ड कप चैंपियन भी बन गया. इंग्लैंड की इस जीत के कई हीरोज हो सकते हैं. आप चाहें सैम करन की बात करें, या एलेक्स हेल्स, जॉस बटलर या फिर बेन स्टोक्स की.

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इंग्लिश प्लेयर्स ने बेहतरीन क्रिकेट खेलते हुए ये जीत दर्ज की. लेकिन इस जीत का सफर साल 2015 में शुरू हुआ था. वनडे वर्ल्ड कप खेला जा रहा था. इंग्लैंड की टीम बांग्लादेश से 15 रन से हार गई. और फिर शुरू हुआ बदलाव का सिलसिला. कैप्टन ऑयन मॉर्गन ने एक नई क्रांति शुरू की. उन्होंने इंग्लैंड के सफेद गेंद से क्रिकेट खेलने के अंदाज को बदल डाला. आज सिली पॉइंट में चर्चा मॉर्गन और उनसे सीखी जा सकने वाली क्वॉलिटीज की.

हाल ही में रिटायर हुए मॉर्गन को इंग्लैंड में कभी उतनी रेस्पेक्ट नहीं मिली. अंग्रेजी अख़बारों की मानें तो मॉर्गन को अंग्रेज झूठा, धोखेबाज और एक बाहरी हैं. उन लोगों के मुताबिक यह मॉर्गन की तीन सबसे बड़ी क्वॉलिटीज हैं. और साल 2019 के वनडे वर्ल्ड कप से पहले तक मॉर्गन को टीम पर ऑलमोस्ट बोझ ही माना जाता था.

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भले वह अपने करियर की शुरुआत में ही इंग्लैंड के लिए कई मैचविनिंग पारियां खेल चुके हों. लेकिन मॉर्गन को इन सबसे फ़र्क नहीं पड़ता. उन्होंने साल 2015 के बाद हर प्लेयर को खुद को व्यक्त करने का मौका दिया. भरोसा दिलाया कि वह अपने मन से खेल सकते हैं. जैसे चाहें वैसे शॉट खेलें, बिना किसी चिंता के. हालांकि, शुरुआत में इस तरीके की खूब आलोचना हुई. 

साल 2015 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ हुई वनडे सीरीज़ के एक मैच में इंग्लैंड की टीम 45.2 ओवर्स में 302 पर ऑलआउट हो गई. जिसके बाद लोगों ने इस टीम पर बहुत बातें की, उन्हें बहुत कुछ सुनाया. जिसके जवाब में मॉर्गन ने कहा,

'हमने 300 रन बनाए. हमारा लक्ष्य इससे भी ऊपर का था. और ये महत्वपूर्ण बात है. जब तक कि हम अपना स्टैंडर्ड इतना ऊंचा रखते हैं, हम हारने से ज्यादा मैच जीतेंगे.'

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मॉर्गन के बारे में एक चीज और बहुत महत्वपूर्ण है. उन्हें जानने वाले, उनके साथ खेले लोग उन्हें 'सबसे अच्छा झूठा व्यक्ति' करार देते हैं. और ये इसलिए क्योंकि मॉर्गन सभी को बेहतरीन तरीके से कॉन्फिडेंट महसूस कराने के लिए प्रसिद्ध हैं. वह अपनी टीम का मोराल उठाने के लिए कोई भी झूठ बोल देते थे. और इसी का नतीजा है कि इंग्लैंड वनडे और T20 वर्ल्ड कप एकसाथ जीतने वाली पहली टीम बन गई.

ये तो हुई कैप्टन मॉर्गन की तारीफ. अब बात थोड़ी अपनी इंडियन टीम की कर लेते हैं. क्योंकि वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में हारी ये टीम एक बार फिर से तैयार है. अपनी अगली द्विपक्षीय सीरीज़ के लिए. जहां हम न्यूज़ीलैंड का सामना करेंगे. लेकिन जाहिर सी बात है कि ऐसी सीरीज़ जीतना ही आपका लक्ष्य नहीं हो सकता. आपका लक्ष्य होता है वर्ल्ड कप जैसे बड़े इवेंट्स जीतना.

और इस लक्ष्य को पाने के लिए आपको अपनाना पड़ता है मॉर्गन जैसा ऑल आउट अप्रोच. और हम अपना मौजूदा स्टाइल देखेंगे तो इसमें बस आउट ही आउट है, ऑल तो कहीं है ही नहीं. क्योंकि मैच के बाद हमारे कप्तान साब सीधे कहते हैं कि हम किसी को प्रेशर हैंडल करना नहीं सिखा सकते. हमारे बोलर्स विकेट नहीं ले पाए. और भी जाने क्या-क्या.

यानी एक ओर मॉर्गन जैसे कप्तान हैं जो झूठ बोलकर अपनी टीम का मोराल हाई करते हैं. वहीं दूसरी ओर बल्ले से बुरी तरह नाकाम चल रहे हमारे कप्तान  साब ना तो अपनी और ना ही अपने डिप्टी की नाकामी पर कुछ बोलते हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में आकर हार का ठीकरा बाकी टीम पर फोड़, निकल लेते हैं. और इतना ही नहीं. मॉर्गन ने इस वर्ल्ड कप से पहले स्वेच्छा से T20I टीम छोड़ दी थी. क्योंकि क्रिकेट के इस फॉर्मेट में उनकी फॉर्म लगातार खराब थी.

जबकि हमारे यहां ना तो सेलेक्टर्स सीनियर्स को बिठाने की कॉल लेते हैं. और ना ही सीनियर्स टीम हित में ऐसे कोई फैसले ले पाते हैं. क्योंकि हमारे यहां क्रिकेट सिर्फ एक खेल से कहीं बढ़कर है. और यह खेल से बढ़कर हुई शय लोगों को लालची, बहुत लालची बना दे रही है. और जैसा कि कहावत है- लालच बुरी बला. और ये बुरी बला हमारी क्रिकेट को अभी और कमजोर करेगी. ऐसा मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है.

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