साल 2004 से 2006 का दौर. ये वो समय था जिसे सचिन के करियर के सबसे खराब दौर में गिना जाता है. टेनिस एल्बो की चोट से उबरकर आए सचिन के बल्ले से रन नहीं आ रहे थे. कहा जाने लगा कि सचिन पहले जैसे नहीं रहे. कुछ बड़बोलों ने तो उन्हें रिटायर होने की सलाह तक दे डाली. एक अखबार ने कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘Endulkar’ तक कह दिया. इस मुश्किल वक्त में सचिन की मदद के लिए सुनील गावस्कर. गावस्कर ने खेल से लेकर इमोश्नल लेवल तक सचिन को संबल दिया, आत्मविश्वास जगाया. नतीजा सचिन ने न सिर्फ फॉर्म वापस पाई, धमाकेदार कमबैक किया.
कोहली से सैमसन तक, जिसे सचिन ने 'राह' दिखाई उसने धुंआ उड़ा दिया
टी20 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट खिताब जीतने वाले Sanju Samson ने पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में खुलासा किया कि वर्ल्ड कप से पहले उन्होंने Sachin Tendulkar से बल्लेबाजी को लेकर सलाह ली थी. फाइनल मुकाबले के पहले भी सचिन ने फोन करके सैमसन का हौसला बढ़ाया था. इस वाकये ने भारतीय क्रिकेट की एक समृद्ध परंपरा की याद दिला दी.


कट टू 2026. इस बार गावस्कर के रोल में खुद सचिन थे और भारत को लगातार दूसरी बार टी20 विश्वकप जिताने के लिए जिस संजू सैमसन की जरूरत थी, उसके पीछे भरोसे के साथ खड़े थे सचिन तेंडुलकर. वर्ल्डकप जिताने के बाद जब संजू ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का अवॉर्ड लेने पहुंचे तो पहली बार ये कहानी दुनिया के सामने आई. हालांकि, ये पहली बार नहीं था जब सचिन किसी खिलाड़ी की मदद के लिए आगे आए हों. इस फेहरिस्त में युवराज सिंह, सुरेश रैना, विराट कोहली, हरमनप्रीत कौर जैसे कई नाम शामिल हैं.
टी20 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट खिताब जीतने वाले संजू सैमसन ने पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में खुलासा किया कि वर्ल्ड कप से पहले उन्होंने सचिन तेंडुलकर से बल्लेबाजी को लेकर सलाह ली थी. फाइनल मुकाबले के पहले भी सचिन ने फोन करके सैमसन का हौसला बढ़ाया था. इस वाकये ने भारतीय क्रिकेट की एक समृद्ध परंपरा की याद दिला दी. सचिन गावस्कर ने अपने मुश्किल दिनों में सुनील गावस्कर से सलाह ली और फिर उन्होंने इस परंपरा को एक नया मकाम दिया.
पुरुष से लेकर महिला क्रिकेटर्स तक, जिसने भी अपने मुश्किल दिनों में सचिन को याद किया उन्होंने आगे बढ़कर उनकी मदद की. सचिन के अपार अनुभव और खेल की समझ ने कई खिलाड़ियों को आत्मविश्वास और लय हासिल करने में मदद की है. विराट कोहली और युवराज समेत कई खिलाड़ियों ने इस बात को स्वीकार भी किया है.
सचिन की सलाह का असर संजू सैमसन पर भी दिखा. वर्ल्ड कप से पहले न्यूजीलैंड के साथ खेले गए द्विपक्षीय सीरीज में ‘ऑफ कलर’ रहे संजू ने इस टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया. उन्होंने तीन सबसे जरूरी मैचों में अर्धशतक बनाकर टीम को खिताब दिलाने में मदद की और ‘प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट’ का खिताब जीता. संजू से पहले भी उन खिलाड़ियों की एक लंबी फेहरिस्त रही है, जिन्होंने अपने करियर के मुश्किल दौर में सचिन को याद किया और उनकी सलाह उनके काम आई. ऐसे ही कुछ खिलाड़ियों की कहानी जानते हैं.
विराट कोहली: साल 2014 का इंग्लैंड टूर विराट कोहली के लिए किसी बुरे सपने की तरह साबित हुआ. 5 टेस्ट मैचों की 10 पारी में कोहली केवल 134 रन बना सके. इस दौरान उनका औसत 13.40 का रहा. वहीं हाईएस्ट स्कोर रहा 39 रन. स्विंग करती गेंदों पर कोहली असहाय नजर आए, वो ज्यादातर बार ऑफ स्टंप के बाहर स्विंग होती गेंद पर स्लिप में या विकेट के पीछे आउट हुए. इस दौरे के बाद अपने खेल में सुधार के लिए कोहली सचिन तेंडुलकर से संपर्क किया. कोहली बताते हैं कि सचिन ने उनको टेक्निकल एडजस्टमेंट करने के बजाय अपने खुद के मेथड पर भरोसा करने को कहा. उन्होंने बताया,
“मैं मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉप्लेक्स में अपनी बैटिंग पर काम कर रहा था. इस दौरान मैंने उनसे (सचिन) साथ आने का अनुरोध किया क्योंकि मैं अपनी बैटिंग के बारे में उनसे बात करना चाहता था. साथ ही ये भी समझना चाहता था कि वे खुद कैसे अपने मुश्किल समय से निपटे.”
विराट कोहली ने ‘द क्रिकेट मंथली’ से बात करते हुए बताया कि उनके लिए तकनीकी चीजों से ज्यादा जरूरी ये जानना था कि अपने टफ फेज में सचिन चीजों को कैसे संभालते थे. पूर्व भारतीय कप्तान ने बताया,
“उन्होंने (सचिन) मुझसे एक बात कही थी, तुम्हें हमेशा वही करना चाहिए जो तुम्हारे लिए सही हो. मैच से पहले अगर नेट में बैटिंग करने का मन नहीं है तो मत करो. सिर्फ इसलिए मत करो क्योंकि दूसरे लोग आधे घंटे नेट में बैटिंग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे हमेशा वही करते थे जो उन्हें ठीक लगता था.”
सचिन से सलाह लेने के कुछ महीने बाद कोहली ने शानदार वापसी की. ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर उन्होंने चार टेस्ट मैचों में चार शतक बनाए, जिसमें एडिलेड टेस्ट की दोनों पारियों में लगाया गया शतक शामिल था.

सुरेश रैना: बाएं हाथ के स्टाइलिश इंडियन बैटर सुरेश रैना लगभग 12 साल तक इंटरनेशनल क्रिकेट का हिस्सा रहे. इस दौरान कई बार वो टीम से अंदर बाहर होते रहे. साल 2017 में रैना टीम से बाहर चल रहे थे. उनकी फिटनेस से लेकर बैटिंग को लेकर सवाल उठ रहे थे. इस दौरान रैना ने सचिन से मदद मांगी. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में रैना बताते हैं,
“मैं काफी 'लो' फील कर रहा था. इसलिए एक दिन उनको (सचिन) मैसेज किया. मैं मुंबई आना चाहता हूं. अपने बिजी शेड्यूल से क्या आप मेरे लिए कुछ समय निकाल सकते हैं. उन्होंने मेरे लिए समय निकाला. मैंने सचिन पाजी के साथ कुछ दिन बिताए. उनके साथ रोज तीन घंटे प्रैक्टिस किया. उन्होंने मुझको बताया कि मैं अच्छी बैटिंग कर रहा हूं. मेरे पैर ठीक से चल रहे हैं. और मैं पहले से ज्यादा सधा हुआ (कॉम्पैक्ट) दिख रहा हूं. मैंने खुद भी अपने वीडियो देखा. मेरा हेड पोजिशन भी ठीक हो रहा था.”
सचिन की सलाह और ट्रेनिंग रैना की काम आई. बैटिंग और फिटनेस पर काम करके साल भर बाद 2018 में उन्होंने भारतीय टीम में वापसी की. इंग्लैंड टूर पर जाने वाले वनडे टीम में उनको जगह मिली.
युवराज सिंह: साल 2011 में टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जिताने में बैट और बॉल दोनों से अहम भूमिका निभाने वाले युवराज सिंह इस टूर्नामेंट से पहले मुश्किल दौर से गुजर रहे थे. उनके बल्ले से रन नहीं आ रहे थे. इस दौरान युवराज ने सचिन से बात की. युवी याद करते हैं,
“मुश्किल समय में मैंने सचिन से अपनी बैटिंग, फॉर्म और फिटनेस के बारे में बात की. उन्होंने मुझसे कहा कि जब टीम को सबसे ज्यादा जरूरत होगी तब तुम ही टीम के काम आओगे.यह बेहद खास बात थी, जो मेरे मन में हमेशा रहेगी. मुझे याद है कि मेरे पास सचिन के साथ मेरी एक तस्वीर है, जिसे मैंने अपने लॉकर में रखा हुआ है. मैं बैटिंग के लिए जाने से पहले उस तस्वीर को देखता था. वह मेरे प्रेरणास्रोत हैं.”
इसके बाद क्या हुआ? ये शायद बताने की भी जरूरत नहीं. उन्होंने बैट और बॉल दोनों से अविस्मरणीय प्रदर्शन किया. उनका प्रदर्शन वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे बेहतरीन ऑलराउंड परफॉर्मेंस में से एक था. युवी ने टूर्नामेंट में 362 रन बनाए और 15 विकेट लिए. इस प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया.
शुभमन गिल : शुभमन गिल साल 2025 के इंग्लैंड टूर के लिए भारतीय टेस्ट टीम के कैप्टन चुने गए. ये उनके लिए टेस्ट टीम की कप्तानी का पहला मौका था. गिल के पास इंग्लैंड में कोई भी फुल लेंथ सीरीज खेलने का अनुभव नहीं था. इसे बड़े दौरे से पहले शुभमन सलाह के लिए सचिन के पास पहुंचे. उन्होंने बताया,
“मैंने सचिन सर से बात की. साथ में मैथ्यू वेड से नंबर लेकर स्टीव स्मिथ से भी बात की. दोनों ने एक ही सलाह दी. सीधे बल्ले से डिफेंड करो और स्क्वायर एरिया (बैटर के ठीक बाएं या दाईं तरफ) में रन बनाओ.”
शुभमन गिल ने इस सलाह पर काम किया और इसका जबरदस्त रिजल्ट भी मिला. उन्होंने पांच टेस्ट मैचों में 754 रन बनाए, जिसमें चार शतक शामिल थे. गिल ने टीम को पांच टेस्ट मैचों की सीरीज 2-2 से ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई.
हरमनप्रीत कौर: साल 2026 वीमेंस वनडे वर्ल्ड कप. भारतीय महिला क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया को सेमीफाइनल में हराकर आठ साल बाद वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची. फिर फाइनल में साउथ अफ्रीका को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया. टूर्नामेंट जीतने के बाद आईसीसी रिव्यू शो में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने बताया कि फाइनल से पहले सचिन ने उनको फोन किया था और बड़े मुकाबले में संतुलित रहने की सलाह दी थी. हरमन ने बताया,
“मैच से एक रात पहले सचिन सर ने फोन किया. उन्होंने अपना अनुभव शेयर करते हुए हमें संतुलन बनाए रखने की सलाह दी. सचिन सर ने बताया कि जब खेल तेज गति से चल रहा हो तो उसे थोड़ा धीमा कर दें. इसे कंट्रोल करने की कोशिश करो क्योंकि जब आप बहुत दौड़ोगे तो लड़खड़ाने की संभावना रहती है. हमें इसी से बचना है. मैं सीनियर प्लेयर्स से मिली सलाह के बारे में सोच रही थी. खुद पर नियंत्रण रखो और धैर्य बनाए रखो. फिर वो पल आएगा और तुम उसे हासिल कर पाओगी.”
शेफाली वर्मा: वनडे विश्व कप सेमीफाइनल से पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ओपनर प्रतिका रावल चोटिल हो गईं. उनकी जगह टीम में शेफाली वर्मा को शामिल किया गया. सेमीफाइनल मुकाबले में शेफाली कुछ खास नहीं कर पाईं लेकिन तीन दिन बाद हुए फाइनल में उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन किया और भारतीय टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. इस मुकाबले के बाद शेफाली ने बताया कि फाइनल से पहले सचिन से मिलने से उन्हें बहुत हौसला मिला था. शेफाली ने बताया,
“जब मैंने उन्हें (सचिन) को देखा तो मुझे बहुत हौसला मिला. मैं लगातार उनसे बात करती रही और वे मुझे लगातार मेरा आत्मविश्वास बढ़ा रहे थे. वे क्रिकेट के उस्ताद हैं. उन्हें देखकर हमेशा प्रेरणा मिलती रहती है.”
फाइनल मैच में शेफाली वर्मा ने 78 गेंदों में 87 रन बनाए और फिर गेंदबाजी में 36 रन देकर दो अहम विकेट चटकाए. इस हरफनमौला प्रदर्शन के लिए शेफाली को फाइनल मुकाबले में 'मैन ऑफ द मैच' का अवार्ड अपने नाम किया.
ये तो रही प्लेयर्स की बात. कई मौकों पर टीम मैनेजमेंट और बीसीसीआई भी सचिन की सलाह लेती रही है. भारत के सबसे सफलतम कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी देने की सलाह सचिन ने ही दी थी. दरअसल साल 2007 के फिफ्टी ओवर वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का प्रदर्शन काफी खराब रहा. टीम पहले राउंड में ही बाहर हो गई. इसके बाद राहुल द्रविड़ ने कप्तानी छोड़ दी. बीसीसीआई ने कप्तानी के लिए सचिन को एप्रोच किया. उन्होंने इनकार करते हुए धोनी का नाम आगे बढ़ाया. रेस्ट इज हिस्ट्री. अपने क्रिकेटिंग करियर में भारतीय टीम की उम्मीदों को अपने कंधों पर ढोने वाले सचिन हमेशा भारतीय क्रिकेट की मदद के लिए निस्वार्थ भाव से आगे आते रहे हैं.
वीडियो: वैभव सूर्यवंशी और सचिन तेंदुलकर की कैसी थी शुरुआत?











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