अमेरिका-इजरायल के ईरान हमले के बीच एक शख्स की खामोशी चर्चा का विषय बन गई है. वो शख्स कोई और नहीं बल्कि, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस हैं. ईरान के साथ शुरू हुए जंग के बाद से ही जेडी वेंस को लेकर कोई खबर नहीं आ रही है. न ही इस जंग को लेकर वेंस कुछ खास एक्टिव नजर आ रहे हैं. अब अमेरिका समेत विश्व के राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि वेंस इस समय कहां हैं? ईरान के साथ जंग पर वेंस एक्टिव क्यों नहीं हैं?
ईरान युद्ध के बीच गुमनाम हुए जेडी वेंस? लोग पूछ रहे, 'आखिर कहां हैं वाइस प्रेसिडेंट?'
ईरान के साथ जंग पर जेडी वेंस की अनुपस्थिति ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. ऐसा करना भी काफी विचित्र था. क्योंकि, अमेरिका में शायद यह पहला मौका होगा, जब देश किसी दूसरे देश पर सैन्य कार्रवाई करे और अमेरिकी उप-राष्ट्रपति की भागीदारी न के बराबर नजर आए.
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल नहीं चाहते कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो. इसी वजह से दोनों ने मिलकर ईरान पर हमला किया. इस ऑपरेशन के बाद अमेरिका सरकार के कई मंत्री सामने आए और इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी लेकिन इस बीच ट्रंप के डिप्टी जेडी वेंस नदारद रहे. उनकी अनुपस्थिति ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. ऐसा करना काफी अजीब था क्योंकि अमेरिका में शायद यह पहला मौका होगा, जब किसी दूसरे देश पर सैन्य कार्रवाई हो और अमेरिकी उपराष्ट्रपति की भागीदारी न के बराबर नजर आए.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जेडी वेंस ने लगभग 72 घंटों तक इस जंग पर कोई रिएक्शन नहीं दिया था. जबकि, डॉनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी और कैबिनेट के अन्य अधिकारी इस अटैक को डिफेंड करने लगे थे. अमेरिकी परंपरा के मुताबिक ऐसे जंगी हालातों में राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति सबसे मुखर राजनीतिक नेता होता है.
अमेरिका के ईरान पर हमले के समर्थन में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ जरूर मुखर होकर सामने आए. वो ट्रंप सरकार के इस कदम के प्रमुख समर्थक के रूप में उभरे थे. टाइम्स ऑफ इंडिया ने ‘द संडे टाइम्स’ की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जंग के बारे में जानकारी देने के लिए रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को लगाया गया लेकिन जेडी वेंस इस समय भी मंच से गायब ही रहे. यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया में कम्युनिकेशन स्टडीज के प्रोफेसर रोजर स्टाल ने भी इस विषय पर टिप्पणी की है. रोजर युद्ध की बयानबाजी का भी अध्ययन करते हैं.
उन्होंने ‘द संडे टाइम्स’ को बताया कि अमेरिका लड़ाई की जो वजह बता रहा है, वह पहले के अमेरिकी हस्तक्षेप से काफी अलग लग रहा है. स्टाल ने आगे कहा कि लोगों को इस जंग को लेकर, जो नैतिक कारण बताए जा रहे हैं, वह काफी नहीं हैं. ये सब अमेरिका का एक शक्ति प्रदर्शन हो सकता है, जिसमें उनकी मिलिट्री पावर, उनके हथियारों की आजमाइश और एक सोच कि इस जंग को हम जीतने वाले हैं, शामिल है.
बता दें कि जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो जेडी वेंस की चुप्पी चर्चा में आ गई. देश में मिलिट्री संकट के दौरान उपराष्ट्रपति हमेशा अहम भूमिका में नजर आते हैं. जब जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में इराक पर हमला किया गया, तब तत्कालीन उपराष्ट्रपति डिक चेनी बुश सरकार की ओर से इराक स्ट्रैटेजी के एक जाने-माने डिफेंडर थे. वहीं, बराक ओबामा के समय जो बाइडेन भी ऐसे समय पर मुखर नजर आते थे.
इसी वजह से वेंस की चुप्पी पर कयासों का बाजार गर्म हो गया. इसमे एक सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या वह जानबूझकर लड़ाई से दूरी बनाए हुए थे? लोग इसकी एक वजह उनकी खुद की पॉलिटिकल पहचान होना भी बता रहे हैं. बता दें कि ऐसा पहली दफा नहीं है, जब वेंस की चुप्पी पर सवाल किए जा रहे हैं. इससे पहले जब अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठा लिया था. तब भी उनकी चुप्पी पर सवाल उठे थे.
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