'मैंने अपना वनडे डेब्यू सौरव गांगुली और टेस्ट डेब्यू राहुल द्रविड़ के अंडर किया था. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम राहुल द्रविड़ को उनकी कप्तानी का पर्याप्त श्रेय नहीं देते हैं. हम सिर्फ सौरव गांगुली, MS धोनी और अब विराट कोहली की बात करते हैं, लेकिन राहुल भी भारत के लिए बेहतरीन कप्तान रहे हैं. उनका रिकॉर्ड, शायद वह सबसे अंडर-रेटेड क्रिकेटर और उतने ही अंडर-रेटेड लीडर भी हैं. हम इंग्लैंड में जीते, वेस्ट इंडीज़ में जीते, हमने लगातार 14 या 15 (असल में 17) मैच जीते.'
# टीम मैन द्रविड़
गंभीर ने द्रविड़ की जमकर तारीफ की. उन्होंने याद दिलाया कि द्रविड़ अपनी टीम के लिए हर भूमिका निभाने को तैयार रहते थे. जानने लायक है कि द्रविड़ ने 2003 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के लिए विकेटकीपिंग भी की थी. यहां तक कि उन्होंने टेस्ट में ओपनर का जिम्मा भी उठाया था. गंभीर ने कहा,'आप एक क्रिकेटर के रूप में द्रविड़ को देखिए, मैं सोचता हूं कि अगर आप उनसे टेस्ट में ओपनिंग करने को कहेंगे तो उन्होंने ऐसा किया, उन्होंने नंबर तीन पर बैटिंग की, भारत के लिए विकेटकीपिंग की, फिनिशर के रूप में बल्लेबाजी की, उन्होंने वो सबकुछ किया जो भारतीय टीम या भारतीय कप्तान ने उनसे करने के लिए कहा और आप ऐसे ही रोल मॉडल्स चाहते हैं. मेरे लिए, मैं सोचता हूं कि उन्होंने बड़ा प्रभाव डाला. सौरव गांगुली ने अपनी दबंगई के चलते लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में हमेशा ही बड़ा प्रभाव डाला लेकिन ओवरऑल भारतीय क्रिकेट में राहुल द्रविड़ का प्रभाव सबसे ज्यादा था.'गंभीर ने कहा कि द्रविड़ ने अपना पूरा करियर सचिन की छाया में बिता दिया लेकिन शायद उनका भारतीय क्रिकेट पर सचिन जितना ही प्रभाव था. गंभीर की बातों से शायद हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी सहमत होगा. इंडियन क्रिकेट में सिर्फ टीम के लिए खेलने वाले प्लेयर्स की जब भी बात होगी, सबसे पहला नाम द्रविड़ का ही लिया जाएगा.
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