दो-तीन बातें हैं जिन पर ध्यान दिया जाना ज़रूरी है. अश्विन ने जो किया वो नियमों के खिलाफ नहीं है. क्रीज़ से बाहर निकलने वाले बल्लेबाज़ को रन आउट करना उनका अधिकार था. आउट देना है या बॉल को डेड करार देना है, इसका फैसला अंपायर को करना था. अंपायर ने आउट समझा, तो दे दिया. अश्विन पर ब्लेम काहे? कुछ लोग कह रहे हैं कि वॉर्निंग देनी चाहिए थी. क्यों भैया? जब बल्लेबाज़ छक्का मारने के लिए क्रीज़ से निकलता है, तो देता है कोई वॉर्निंग? वो छोड़िए, जब कोई स्विच हिट जैसा अप्रत्याशित शॉट खेलता है क्या तब देता है वॉर्निंग? नहीं. कोई नहीं देता. तो बॉलर से ही उम्मीद क्यों? ऐसा कोई नियम तो है नहीं. दूसरी बात. कई बार जब बल्लेबाज़ रन आउट होता है तो वो महज़ एक-दो इंच का करीबी मामला होता है. ऐसे में क्यों किसी बल्लेबाज़ को छूट मिलनी चाहिए कि वो 10-15 इंच ग्राउंड गेंद फेंकने से पहले ही कवर कर ले? ये तो अनफेयर हुआ न? आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में जहां एक-एक रन कीमती हो, वहां एक दो इंच से मिस हुआ रन आउट टीमों पर बेहद भारी पड़ सकता है. वो सफ़ेद लकीर होती ही इसलिए है ताकि बल्लेबाज़ उसके अंदर रहे. क्रीज़ की सीमा रेखा है वो. उसे तोड़ोगे तो अगले को पूरा अधिकार है आपको आउट करने का. अश्विन ने वही किया. उस ओवर में चौथी बार यूं क्रीज़ छोड़कर निकले थे बटलर.
रही बात स्पिरिट ऑफ़ गेम की. तो सर जी जब आपकी रूल बुक ही ऐसे किसी स्पिरिट की गुंजाइश नहीं छोड़ती, तो बॉलर कैसे कसूरवार हुआ? आपकी रूल बुक कहती है कि ऐसे बैट्समैन को आउट किया जा सकता है. अगर आपको खेल की स्पिरिट बचानी ही है तो पहले रूल बुक चेंज करवाइए. उसमें स्पष्ट लिखिए कि ऐसे रन आउट करना अलाउड होगा कि नहीं? नियमों में आपके खोट है, गालियां बॉलर की किस्मत में आ रही हैं. अनफेयर तो ये है बॉस! वीडियो:























