साल 2018. जकार्ता एशियन गेम्स. भारतीय शूटर लक्ष्य श्योरण ने ट्रैप इवेंट में सिल्वर मेडल जीता था. लक्ष्य को उस समय अफसोस था कि वह गोल्ड मेडल नहीं जीत सके. 8 साल बाद लक्ष्य का गोल्ड जीतने का सपना उनकी बहन ने पूरा किया. नेशनल चैंपियन और लक्ष्य की कजिन नीरू ढांडा ने 2026 एशियन गेम्स में महिला ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीता. अपने इस मेडल का श्रेय भी उन्होंने भाई लक्ष्य को ही दिया.
एशियन गेम्स का शूटिंग गोल्ड जीतकर नीरू ढांडा ने भाई का 'अफसोस' दूर कर दिया
26 साल की नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में दो मेडल जीते. इसमें ट्रैप इवेंट का इंडिविजुअल गोल्ड और टीम इवेंट का सिल्वर मेडल शामिल है. नीरू ने गोल्ड जीतकर अपने शूटर भाई लक्ष्य का सपना पूरा किया.

लक्ष्य ने जब 2018 में सिल्वर मेडल जीता था तो उनका जोरदार स्वागत हुआ था. स्वागत करने वालों में नीरू भी शामिल थीं. उस समय वह स्कूल लेवल पर कबड्डी खेलती थीं. लक्ष्य को देखकर उन्होंने भी शूटिंग करने का फैसला किया. लेकिन यह इतना आसान नहीं था. एक मिडिल क्लास परिवार के लिए शूटिंग जैसे खेल का खर्च उठाना बहुत मुश्किल था. नीरू का परिवार जब असमंजस में था, तब उनको अपने चाचा सोमवीर श्योरण और कजिन लक्ष्य का साथ मिला.
आसान नहीं थी शुरुआतनीरू शिवपुरी से फरीदाबाद शिफ्ट हो गईं. वह सोमवीर के परिवार के साथ रहने लगीं. उन्होंने लक्ष्य की गन से दिल्ली की करणी सिंह रेंज में ट्रेनिंग शुरू की. शुरुआत में उन्हें रिकॉइल की वजह से दिक्कत होती थी.
दरअसल जब गोली बंदूक से आगे की तरफ निकलती है तो बंदूक उसके विपरीत दिशा में झटका देती है. पीछे की ओर लगने वाले झटके को रिकॉइल कहते हैं. नए शूटर्स को रिकॉइल से काफी परेशानी होती है. इससे कंधे में काफी दर्द रहता है. नीरू के लिए भी यह दर्द सहन करना कई बार बहुत मुश्किल हो जाता था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे उन्होंने जरूरी बैलेंस हासिल कर लिया. एक साल बाद नीरू ने मध्य प्रदेश शूटिंग एकेडमी के ट्रायल्स दिए. इन ट्रायल्स में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और उनका चयन हो गया. वह फरीदाबाद से भोपाल शिफ्ट हो गईं. उनके खेल में सुधार आता रहा और वह नेशनल स्तर पर मेडल्स जीतने लगीं.
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कोरोना के बाद की वापसीकोरोना काल में नीरू काफी मुश्किल में पड़ गई थीं. वह कोरोना पॉज़िटिव पाई गई थीं. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन धीरे-धीरे उनकी तबीयत खराब होती गई. कोरोना प्रोटोकॉल के कारण परिवार का कोई भी सदस्य अस्पताल में नहीं रुक सकता था. उनको अस्पताल की तरफ से कोई अपडेट नहीं दिया जा रहा था. बहुत कोशिशों के बाद नीरू को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया. तब जाकर उनकी हालत में सुधार हुआ. कोरोना का उनके शरीर पर बुरा असर हुआ. उन्हें शूटिंग के लिए लौटने में समय लगा. लेकिन एक बार रेंज पर वापस आईं तो फिर मुड़कर नहीं देखा.
साल 2025 में नीरू ने नेशनल टाइटल जीता. विवान कपूर के साथ मिलकर अल्माटी में हुए ISSF वर्ल्ड कप में मिक्स्ड टीम ट्रैप इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता. इसके बाद इसी साल जुलाई में लोनाटो में हुए वर्ल्ड कप के महिला ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया. वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला शूटर हैं. इसके बाद उन्होंने ट्रायल्स में जीत हासिल करके एशियन गेम्स टीम में जगह पक्की की.
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